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पीयू में NRI स्टूडेंट्स कम, वीसी ने भी माना ज्यादातर सीटे हैं खाली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 04 Nov 2017 06:06 PM IST
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VC Arun Grover On PU
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी को ग्लोबल बनाने के सपने देख रहे पीयू प्रबंधन के लिए चिंता का विषय है कि एनआरआई स्टूडेंट्स के दाखिले का स्तर लगातार कम हो रहा है। पिछले साल जहां एनआरआई कोटे के तहत 41 दाखिले हुए थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा आधे से भी कम सिर्फ 17 पर सिमट गया है।
कहीं न कहीं दाखिले की प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और इंटरनेशनल स्तर पर स्टूडेंट्स को प्रभावित करने के लिए एक्सपर्ट ना होना भी इसका एक मुख्य कारण है। इसके अलावा इस बार एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पीयू में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के विभाग में कुछ ऐसी शिकायतें आई हैं कि नाम के कंफयूजन में पीयू के बजाय दूसरी जगह दाखिला करा बैठे। दरअसल पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से मिलते नाम के कुछ अन्य निजी संस्थान हैं। सूत्रों के मुताबिक पीयू को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि गलती से दूसरी जगह दाखिले का आवेदन हुआ, जो मंजूर भी हो गया।
नियमों में बदलाव मुख्य कारण
एनआरआई कोटे के तहत दाखिले में दो बार नियम बदले गए। पहले कहा गया कि किसी एनआरआई या विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति का वह बच्चा पीयू में दाखिला ले सकता है, जो कम से कम तीन साल से भारत के अलावा किसी अन्य देश में रह रहा हो। लेकिन बाद में फिर नियम बदल दिए गए, जिसमें से तीन साल की दूसरे देश में रहने की शर्त हटा दी गई। वहीं पीएचडी और एमफिल के लिए तो पिछले माह तक भी नियम बदलते रहे। इस तरह बार-बार नियमों का बदलना दाखिले पर असर डाल रहा है।
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कहीं न कहीं दाखिले की प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और इंटरनेशनल स्तर पर स्टूडेंट्स को प्रभावित करने के लिए एक्सपर्ट ना होना भी इसका एक मुख्य कारण है। इसके अलावा इस बार एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पीयू में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के विभाग में कुछ ऐसी शिकायतें आई हैं कि नाम के कंफयूजन में पीयू के बजाय दूसरी जगह दाखिला करा बैठे। दरअसल पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से मिलते नाम के कुछ अन्य निजी संस्थान हैं। सूत्रों के मुताबिक पीयू को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि गलती से दूसरी जगह दाखिले का आवेदन हुआ, जो मंजूर भी हो गया।
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नियमों में बदलाव मुख्य कारण
एनआरआई कोटे के तहत दाखिले में दो बार नियम बदले गए। पहले कहा गया कि किसी एनआरआई या विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति का वह बच्चा पीयू में दाखिला ले सकता है, जो कम से कम तीन साल से भारत के अलावा किसी अन्य देश में रह रहा हो। लेकिन बाद में फिर नियम बदल दिए गए, जिसमें से तीन साल की दूसरे देश में रहने की शर्त हटा दी गई। वहीं पीएचडी और एमफिल के लिए तो पिछले माह तक भी नियम बदलते रहे। इस तरह बार-बार नियमों का बदलना दाखिले पर असर डाल रहा है।
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हर विभाग में है कोटा, ज्यादातर खाली
इंटरनेशनल स्तर पर कम हो रहे नंबर
देश की चौथे नंबर की यूनिवर्सिटी के एक सर्वे में इंटरनेशनल स्तर पर नंबर कम हो रहे हैं। एक रेंकिंग में पीयू को 2015 के सेशन के बाद इंटरनेशनल स्तर पर 29.2 नंबर दिए गए थे, जबकि 2016 में यह घटकर 14.1 हो गए। पीयू में इंटरनेशनल फैकल्टी ना के बराबर होना और विदेशों में स्टूडेंट्स को प्रभावित करने के लिए कोई टीम और अन्य ठोस कदम न उठाए जाना भी एक बड़ा कारण है।
हर विभाग में है कोटा, ज्यादातर खाली
पीयू के लगभग सभी विभागों में एनआरआई कोट के तहत सीटें हैं, जो लगभग खाली पड़ी हैं। वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर भी मानते हैं कि काफी सीटें खाली हैं। वीसी ने कहा कि सीटें जरूर खाली हैं, लेकिन पीयू को ग्लोबल स्तर पर लेकर जाने का काम किया जा रहा हैै। कई विदेशी संस्थानों के साथ स्टूडेंट-टीचर एक्सचेंज की योजना चल रही है।
देश की चौथे नंबर की यूनिवर्सिटी के एक सर्वे में इंटरनेशनल स्तर पर नंबर कम हो रहे हैं। एक रेंकिंग में पीयू को 2015 के सेशन के बाद इंटरनेशनल स्तर पर 29.2 नंबर दिए गए थे, जबकि 2016 में यह घटकर 14.1 हो गए। पीयू में इंटरनेशनल फैकल्टी ना के बराबर होना और विदेशों में स्टूडेंट्स को प्रभावित करने के लिए कोई टीम और अन्य ठोस कदम न उठाए जाना भी एक बड़ा कारण है।
हर विभाग में है कोटा, ज्यादातर खाली
पीयू के लगभग सभी विभागों में एनआरआई कोट के तहत सीटें हैं, जो लगभग खाली पड़ी हैं। वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर भी मानते हैं कि काफी सीटें खाली हैं। वीसी ने कहा कि सीटें जरूर खाली हैं, लेकिन पीयू को ग्लोबल स्तर पर लेकर जाने का काम किया जा रहा हैै। कई विदेशी संस्थानों के साथ स्टूडेंट-टीचर एक्सचेंज की योजना चल रही है।