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पंजाब यूनिवर्सिटी के 75 विभाग सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर गंभीर नहीं, भेजा गया नोटिस
Wed, 09 Jan 2019 02:42 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 09 Jan 2019 02:42 PM IST
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नोटिस
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पंजाब यूनिवर्सिटी के 75 विभाग सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर गंभीर नहीं हैं। इन विभागों को आईक्यूएसी निदेशक एम राजीव लोचन ने नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि देश के कई शिक्षण संस्थानों में ऐसे केस सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर जागरुकता के लिए हर शिक्षण संस्थान में इसका साहित्य, शिकायत प्रकोष्ठ के नाम व मोबाइल नंबर आदि लगाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वर्ष 2018 में पीयू के डेंटल इंस्टीट्यूट में एक डॉक्टर पर सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे थे।
यह मुद्दा विद्यार्थियों ने प्रमुखता से उठाया और विरोध प्रदर्शन भी किए। इसके बाद जांच हुई और आखिरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को नौकरी से निकाला गया। कुछ शिकायतें इस बीच और आईं। पीयू की ही एक महिला अधिकारी के बेटे पर भी सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे। अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बाद पीयू प्रशासन और गंभीर हो गया।
इस मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई और विभागों को आदेश दिए गए कि सेक्सुअल हरासमेंट को गंभीर हों और इससे जुड़ा साहित्य, कमेटी, फोन नंबर, शिकायत प्रकोष्ठ, की जाने वाली कार्रवाई आदि के बारे में जानकारी नोटिस बोर्ड पर लगाएं। आदेश देने के बाद इसके अनुपालन देखा गया। पाया कि डेंटल इंस्टीट्यूट ने ही यह गाइड लाइन अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा की हैं बाकी विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे। अब इन विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं। कहा गया है कि दो से चार दिन में यह सूचनाएं अपने नोटिस बोर्ड पर लगाएं।
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आयोजित किए गए थे सेमिनार
पीयू में सोशल विभाग की ओर से लंबे समय तक सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था। हर विभाग में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया। शिक्षकों को भी गाइड लाइन बताई गई थीं। इसके बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यूजीसी के आदेशों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
डेंटल इंस्टीट्यूट ने ही सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर सूचनाएं चस्पा की हैं। बाकी विभागों में यह नहीं दिखीं। विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे कहा गया है कि वह गाइड लाइन का पालन करें।
-प्रो. एम राजीव लोचन, निदेशक, आईक्यूएसी
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यह मुद्दा विद्यार्थियों ने प्रमुखता से उठाया और विरोध प्रदर्शन भी किए। इसके बाद जांच हुई और आखिरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को नौकरी से निकाला गया। कुछ शिकायतें इस बीच और आईं। पीयू की ही एक महिला अधिकारी के बेटे पर भी सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे। अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बाद पीयू प्रशासन और गंभीर हो गया।
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इस मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई और विभागों को आदेश दिए गए कि सेक्सुअल हरासमेंट को गंभीर हों और इससे जुड़ा साहित्य, कमेटी, फोन नंबर, शिकायत प्रकोष्ठ, की जाने वाली कार्रवाई आदि के बारे में जानकारी नोटिस बोर्ड पर लगाएं। आदेश देने के बाद इसके अनुपालन देखा गया। पाया कि डेंटल इंस्टीट्यूट ने ही यह गाइड लाइन अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा की हैं बाकी विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे। अब इन विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं। कहा गया है कि दो से चार दिन में यह सूचनाएं अपने नोटिस बोर्ड पर लगाएं।
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आयोजित किए गए थे सेमिनार
पीयू में सोशल विभाग की ओर से लंबे समय तक सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था। हर विभाग में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया। शिक्षकों को भी गाइड लाइन बताई गई थीं। इसके बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यूजीसी के आदेशों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
डेंटल इंस्टीट्यूट ने ही सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर सूचनाएं चस्पा की हैं। बाकी विभागों में यह नहीं दिखीं। विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे कहा गया है कि वह गाइड लाइन का पालन करें।
-प्रो. एम राजीव लोचन, निदेशक, आईक्यूएसी