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कागज की बर्बादी रोकने को पीयू का फंडा, अब यात्रा भत्ते के लिए बार-बार नहीं भरना होगा फार्म

Sat, 18 Jan 2020 11:42 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार. अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार. अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 18 Jan 2020 11:42 AM IST
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Punjab University Find Out the Way to Ban Wastage of Paper
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब यूनिवर्सिटी ने कागज की बर्बादी रोकने के लिए नया कदम उठाया है। अब अधिकारियों व कर्मचारियों को यात्रा भत्ते के लिए बार बार आवेदन नहीं करना होगा। इसके अलावा एक बार आवेदन होने के बाद प्रमोशन के दौरान ही फार्म भरना  होगा। इस पहल से कर्मचारियों को राहत तो मिली ही है, साथ ही उनके समय की भी बचत हुई है पीयू डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार के अलावा कर्मचारियों को यात्रा भत्ता देती है। किसी को 500 तो किसी को 1500 रुपये मिलते हैं।
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हर माह इसके लिए सभी को आवेदन करना पड़ता है। इसके लिए कर्मचारियों को समय भी निकालना पड़ता है और हजारों की संख्या में कागज के पेज भी लगते हैं। इसका खर्च भी पीयू के खजाने पर पड़ता है। इस पर पीयू ने गहन मंथन किया। पीयू पहले ही कागज की बर्बादी रोकने के लिए मंथन कर चुका है। हालांकि वह प्लान पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाया, लेकिन यात्रा भत्ते के नाम पर भरने वाले आवेदन अब बार बार नहीं करने होंगे।
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जब किसी का प्रमोशन होता है तभी आवेदन की जरूरत महसूस होगी। उससे पहले नहीं। सूत्रों का कहना है कि इसका लाभ हजारों लोगों को मिला है। यह प्रक्रिया फरवरी माह से लागू कर दी गई है। पीयू का कहना है कि जब यात्रा भत्ता हर माह देना ही है तो फिर कागज की बर्बादी क्यों की जाए। साथ ही इस पर पैसे भी खर्च होते हैं, जो बचेंगे। वीसी प्रो. राजकुमार ने यह आदेश सभी विभाग अध्यक्षों, कार्यालयों के अधीक्षकों आदि को दिए हैं।
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सीनेट का एजेंडा नहीं हो पाया सॉफ्ट

सिंडिकेट व सीनेट के एजेंडे पर पीयू हर साल 50 लाख रुपये से अधिक खर्च करता है। कागज के अलावा धन की बर्बादी हो रही है। साथ ही समय भी अधिक लग रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सीनेट में यह प्रस्ताव लाया गया कि सभी को सॉफ्ट कॉपी मुहैया कराई जाए। कुछ सदस्य इस बात से सहमत थे तो कुछ नहीं। सूत्रों का कहना है कि एजेंडे बनाने के नाम पर खेल भी होता है। इसीलिए यह प्रक्रिया लागू नहीं हो पा रही है। जानकार कहते हैं कि पीयू चाहे तो 50 लाख रुपये सालाना बचा सकता है।

वीडियोग्राफी पर दस लाख खर्च
सीनेट की बैठक के दौरान वीडियोग्राफी होती है। इस पर भी पीयू 10 लाख रुपये खर्च कर रहा है। इस वीडियोग्राफी को बंद करने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने मांग उठाई थी। कुछ अन्य सदस्य भी राजी हो गए थे लेकिन यह काम भी पीयू नहीं कर पाया। इस पर भी काम करने की जरूरत है। यह दस लाख रुपये भी पीयू अपने खजाने में बचा सकता है।
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