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पीयू के कूटनीतिक पैंतरे के खिलाफ सीनेटर्स का हंगामा, मजबूरी में माननी पड़ी हार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 08 May 2017 09:39 AM IST
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पीयू के कूटनीतिक पैंतरे के खिलाफ सीनेटर्स का हंगामा
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रविवार को हुई सीनेटर्स की बैठक में पीयू के कूटनीतिक पैंतरे के खिलाफ भी जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान सीनेटर्स ने रविवार को बुलाई गई विशेष बैठक के वजूद पर भी सवाल खड़ा कर वीसी को कठघरे में खड़ा कर दिया। अंतत: वीसी को इस ‘विशेष’ बैठक को ‘सामान्य’ बैठक करार देना पड़ा। इसके बाद सीनेटर्स ने छात्रों की तमाम समस्याओं को सीनेट हॉल में बुलंद किया।
हुआ यूं कि अभी सीनेट की बैठक शुरू ही हुई थी कि पीयू अथॉरिटी के कूटनीतिक पैंतरे के खिलाफ सीनेटर्स पूरी तरह से भड़क गए। सीनेटर्स ने समय से पहले पुरने एजेंडे पर बुलाई गई सीनेट की विशेष बैठक की वैधता पर सवाल खड़ा किया। कई सीनेटर्स ने अपनी सीट से उठकर हंगामा करते हुए वीसी से पूछा कि ‘वीसी ये बताएं कि समय से पहले पुराने एजेंडे पर ही बैठक क्यों बुलाई गई? दूसरा बैठक ‘विशेष’ है या ‘सामान्य’ ये भी बताया जाए, क्योंकि सीनेटर्स यहां छात्रों की समस्याओं व अन्य मसले भी उठाना चाहते हैं।’
दबाव जब काफी बढ़ा और सीनेटर्स के सवाल तीखे होते गए तो बैठक के बीच ही वीसी ने इस विशेष बैठक को ‘सामान्य’ बैठक करार दे दिया। उसके बाद सीनेटर्स ने छात्रों की सभी समस्याओं और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मसले को जोरशोर से उठाया।
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हुआ यूं कि अभी सीनेट की बैठक शुरू ही हुई थी कि पीयू अथॉरिटी के कूटनीतिक पैंतरे के खिलाफ सीनेटर्स पूरी तरह से भड़क गए। सीनेटर्स ने समय से पहले पुरने एजेंडे पर बुलाई गई सीनेट की विशेष बैठक की वैधता पर सवाल खड़ा किया। कई सीनेटर्स ने अपनी सीट से उठकर हंगामा करते हुए वीसी से पूछा कि ‘वीसी ये बताएं कि समय से पहले पुराने एजेंडे पर ही बैठक क्यों बुलाई गई? दूसरा बैठक ‘विशेष’ है या ‘सामान्य’ ये भी बताया जाए, क्योंकि सीनेटर्स यहां छात्रों की समस्याओं व अन्य मसले भी उठाना चाहते हैं।’
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दबाव जब काफी बढ़ा और सीनेटर्स के सवाल तीखे होते गए तो बैठक के बीच ही वीसी ने इस विशेष बैठक को ‘सामान्य’ बैठक करार दे दिया। उसके बाद सीनेटर्स ने छात्रों की सभी समस्याओं और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मसले को जोरशोर से उठाया।
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सौ गुनाहगार छूट जाएं, एक निर्दोष सजा न पाए
सौ गुनाहगार छूट जाएं, एक निर्दोष सजा न पाए
पीयू अथॉरिटी की सोच थी कि सीनेटर्स की विशेष बैठक को सिर्फ और सिर्फ पीयू के आर्थिक संकट पर केंद्रित रखा जाए, लेकिन सीनेट की बैठक की शुरूआत से लेकर रात आठ बजे तक धीरे-धीरे सिलसिला ऐसा बनता चला गया कि अधिकतर सीनेटर्स विशेष बैठक के मूल एजेंडे से परे हटकर सिर्फऔर सिर्फ छात्रों के हित में एकजुट होते चले गए। सीनेटर्स की यही एकजुटता पीयू अथॉरिटी पर लगातार दबाव बनाती गई और अंतत: रात तक पीयू अथॉरिटी को छात्रों के हित में झुकना पड़ा।
सौ गुनाहगार छूट जाएं, एक निर्दोष सजा न पाए
बच्चों की मांगों को नहीं दबाया जा सकता। पीयू अथॉरिटी जिद छोड़े और तुरंत प्रभाव से छात्रों पर दर्ज केस वापस लें। क्योंकि भले ही सौ गुनहागार छूट जाएं, मगर एक भी निर्दोष छात्र को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
-डा. गुरमीत सिंह, सीनेटर
वीसी नहीं चाहते थे बैठक में छात्रों की समस्या उठे
सीनेट की बैठक में छात्रों की समस्याओं को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है। दरअसल, वीसी नहीं चाहते थे कि बैठक में छात्रों की समस्याओं की चर्चा हो, इसलिए बैठक को ‘विशेष’ मीटिंग बताया गया, लेकिन आज छात्रों के आंदोलन को सकारात्मक ढंग से खत्म किए जाने की जरूरत है।
-अशोक गोयल, सीनेटर-
सौ गुनाहगार छूट जाएं, एक निर्दोष सजा न पाए
बच्चों की मांगों को नहीं दबाया जा सकता। पीयू अथॉरिटी जिद छोड़े और तुरंत प्रभाव से छात्रों पर दर्ज केस वापस लें। क्योंकि भले ही सौ गुनहागार छूट जाएं, मगर एक भी निर्दोष छात्र को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
-डा. गुरमीत सिंह, सीनेटर
वीसी नहीं चाहते थे बैठक में छात्रों की समस्या उठे
सीनेट की बैठक में छात्रों की समस्याओं को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है। दरअसल, वीसी नहीं चाहते थे कि बैठक में छात्रों की समस्याओं की चर्चा हो, इसलिए बैठक को ‘विशेष’ मीटिंग बताया गया, लेकिन आज छात्रों के आंदोलन को सकारात्मक ढंग से खत्म किए जाने की जरूरत है।
-अशोक गोयल, सीनेटर-
हर साल निजी फंड से दो लाख रुपये दूंगा
Pawan kumar Bansal
- फोटो : अमर उजाला
हर साल निजी फंड से दो लाख रुपये दूंगा
ठीक है पीयू आज आर्थिक संकट में है। इसके लिए अतिरिक्त फंड की लड़ाई जारी है। मैं भी अपनी स्वेच्छा से अपनी कमाई से हर साल पीयू को दो लाख रुपये दूंगा। दूसरा, बच्चे गुस्से में थे, लिहाजा 11 अप्रैल की हिंसा हो गई, लेकिन आज उन पर दर्ज क्रिमिनल केस हर हाल में वापस होने चाहिए।
-पवन बंसल, पूर्व सांसद एवं सीनेटर
पीयू को मजबूत करना जरूरी
पीयू जिस दौर से आज गुजर रहा है, बहुत दुखदायी है। इसलिए जरूरी है कि पीयू के आर्थिक ढांचे को मजबूत किया जाए। छात्रों की मांगों पर भी विचार करना और उसका हल ढूंढना भी हमारी ही जिम्मेवारी बनती है।
-जरनैल सिंह, सीनेटर
पुलिस पर क्रास केस दर्ज क्यों नहीं हुआ?
पीयू में 11 अप्रैल को हिंसा हुई, छात्रों पर केस दर्ज हो गए, लेकिन पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई। कक्षाओं व लैब से निकालकर छात्रों को पुलिस ने जो बर्बरता पूर्वक मारा, उसका जिम्मेवार कौन है? क्यों पीयू अथॉरिटी ने पुलिस के खिलाफ क्रॉस केस दर्ज करवाया। पुलिस के खिलाफ तुरंत शिकायत देकर क्रॉस केस दर्ज करवाया जाए।
-डीपी रंधावा, सीनेटर
किस ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुआ था लाठीचार्ज?
पुलिस अपराध रोकने के लिए होती है न कि अपराध करने के लिए। लैब में प्रैक्टिकल कर रहे और कक्षाओं में पढ़ रहे निर्दोष छात्रों को टारगेट कर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें घायल किया, ये अपराध है। दूसरा, पीयू पुलिस के खिलाफ शिकायत देकर ये भी पूछे कि मौके पर कौन ड्यूटी मजिस्ट्रेट था, जिसने 11 अप्रैल को लाठीचार्ज के आदेश दिए?
-डा. अजय रंगा, सीनेटर
ठीक है पीयू आज आर्थिक संकट में है। इसके लिए अतिरिक्त फंड की लड़ाई जारी है। मैं भी अपनी स्वेच्छा से अपनी कमाई से हर साल पीयू को दो लाख रुपये दूंगा। दूसरा, बच्चे गुस्से में थे, लिहाजा 11 अप्रैल की हिंसा हो गई, लेकिन आज उन पर दर्ज क्रिमिनल केस हर हाल में वापस होने चाहिए।
-पवन बंसल, पूर्व सांसद एवं सीनेटर
पीयू को मजबूत करना जरूरी
पीयू जिस दौर से आज गुजर रहा है, बहुत दुखदायी है। इसलिए जरूरी है कि पीयू के आर्थिक ढांचे को मजबूत किया जाए। छात्रों की मांगों पर भी विचार करना और उसका हल ढूंढना भी हमारी ही जिम्मेवारी बनती है।
-जरनैल सिंह, सीनेटर
पुलिस पर क्रास केस दर्ज क्यों नहीं हुआ?
पीयू में 11 अप्रैल को हिंसा हुई, छात्रों पर केस दर्ज हो गए, लेकिन पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई। कक्षाओं व लैब से निकालकर छात्रों को पुलिस ने जो बर्बरता पूर्वक मारा, उसका जिम्मेवार कौन है? क्यों पीयू अथॉरिटी ने पुलिस के खिलाफ क्रॉस केस दर्ज करवाया। पुलिस के खिलाफ तुरंत शिकायत देकर क्रॉस केस दर्ज करवाया जाए।
-डीपी रंधावा, सीनेटर
किस ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुआ था लाठीचार्ज?
पुलिस अपराध रोकने के लिए होती है न कि अपराध करने के लिए। लैब में प्रैक्टिकल कर रहे और कक्षाओं में पढ़ रहे निर्दोष छात्रों को टारगेट कर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें घायल किया, ये अपराध है। दूसरा, पीयू पुलिस के खिलाफ शिकायत देकर ये भी पूछे कि मौके पर कौन ड्यूटी मजिस्ट्रेट था, जिसने 11 अप्रैल को लाठीचार्ज के आदेश दिए?
-डा. अजय रंगा, सीनेटर
वीसी साहब, पिता बनकर छात्रों की सुनों
पीयू में पुलिस की एंट्री बंद करो
पीयू के पास अपनी सिक्योरिटी पर्याप्त है। जवानों की नफरी भी बहुत ज्यादा है, लेकिन उसके बावजूद 11 अप्रैल को पीयू कैंपस में पुलिस को क्यों बुलवाया गया? जब पुलिस से ही पीयू में काम चलाना है, तो सिक्योरिटी की जरूरत क्या है? पीयू में पुलिस की एंट्री पूरी तरह बंद करो।
-प्रिंसिपल श्री गोसर, सीनेटर
कॉल के बाद क्यों गायब हुए थी वीसी
पीयू में 11 अप्रैल का प्रदर्शन अचानक नहीं था। एक हफ्ते पहले छात्रों ने धरने की कॉल दी थी। उसके बावजूद वीसी उस दिन गायब क्यों रहे? वीसी यदि उस दिन छात्राें को समझा देते, तो छात्र शांत होकर लौट जाते। लेकिन बातचीत के लिए न वीसी आए, न उनका नुमाइंदा आया, इसलिए हालात बिगड़े, लिहाजा जिम्मेवारी पीयू अथॉरिटी की है।
-प्रोफेसर, राजेश गिल, सीनेटर
ईगो छोड़कर छात्रों से बात करे पीयू अथॉरिटी
करीबन एक महीने से छात्र सड़कों पर बैठे आंदोलन कर रहे हैं, ये क्या हो रहा है। कई बार अपना ईगो छोड़ना पड़ता है। पीयू अथॉरिटी भी इस मसले पर अपना अभिमान पीछे रख, छात्रों से सकारात्मक बातचीत कर, उन्हें फीसवृद्धि में राहत दे। फीस वृद्धि वाकई बहुत ज्यादा है।
-अनुचतरथ, पूर्व मेयर, सीनेटर
वीसी साहब, पिता बनकर छात्रों की सुनो
बच्चे गलती करते हैं तो मां-बाप उन्हें समझाते हैं। वीसी साहब आप भी पिता बनकर छात्रों की बात सुनो, मुझे उम्मीद है, छात्र आपकी बात मानेंगे, आपको भी उनकी थोड़ी बात माननी पड़ेगी। फीसवृद्धि तो वापस लेनी पड़ेगी, ये पूरी तरह जायज नहीं है।
-वीरेंद्र गिल, सीनेटर
पीयू का स्थायी समाधान ढूंढना पड़ेगा
पीयू को बचाना है तो सिर्फबातचीत से कुछ नहीं बनेगा। पीयू को कुछ करोड़ नहीं, बल्कि सैकड़ों करोड़ चाहिए। फीसवृद्धि आर्थिक संकट से उबरने का समाधान नहीं है। पीयू की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए स्थायी समाधान ढूंढा जाए।
-अशोक गोयल, सीनेटर
पीयू के पास अपनी सिक्योरिटी पर्याप्त है। जवानों की नफरी भी बहुत ज्यादा है, लेकिन उसके बावजूद 11 अप्रैल को पीयू कैंपस में पुलिस को क्यों बुलवाया गया? जब पुलिस से ही पीयू में काम चलाना है, तो सिक्योरिटी की जरूरत क्या है? पीयू में पुलिस की एंट्री पूरी तरह बंद करो।
-प्रिंसिपल श्री गोसर, सीनेटर
कॉल के बाद क्यों गायब हुए थी वीसी
पीयू में 11 अप्रैल का प्रदर्शन अचानक नहीं था। एक हफ्ते पहले छात्रों ने धरने की कॉल दी थी। उसके बावजूद वीसी उस दिन गायब क्यों रहे? वीसी यदि उस दिन छात्राें को समझा देते, तो छात्र शांत होकर लौट जाते। लेकिन बातचीत के लिए न वीसी आए, न उनका नुमाइंदा आया, इसलिए हालात बिगड़े, लिहाजा जिम्मेवारी पीयू अथॉरिटी की है।
-प्रोफेसर, राजेश गिल, सीनेटर
ईगो छोड़कर छात्रों से बात करे पीयू अथॉरिटी
करीबन एक महीने से छात्र सड़कों पर बैठे आंदोलन कर रहे हैं, ये क्या हो रहा है। कई बार अपना ईगो छोड़ना पड़ता है। पीयू अथॉरिटी भी इस मसले पर अपना अभिमान पीछे रख, छात्रों से सकारात्मक बातचीत कर, उन्हें फीसवृद्धि में राहत दे। फीस वृद्धि वाकई बहुत ज्यादा है।
-अनुचतरथ, पूर्व मेयर, सीनेटर
वीसी साहब, पिता बनकर छात्रों की सुनो
बच्चे गलती करते हैं तो मां-बाप उन्हें समझाते हैं। वीसी साहब आप भी पिता बनकर छात्रों की बात सुनो, मुझे उम्मीद है, छात्र आपकी बात मानेंगे, आपको भी उनकी थोड़ी बात माननी पड़ेगी। फीसवृद्धि तो वापस लेनी पड़ेगी, ये पूरी तरह जायज नहीं है।
-वीरेंद्र गिल, सीनेटर
पीयू का स्थायी समाधान ढूंढना पड़ेगा
पीयू को बचाना है तो सिर्फबातचीत से कुछ नहीं बनेगा। पीयू को कुछ करोड़ नहीं, बल्कि सैकड़ों करोड़ चाहिए। फीसवृद्धि आर्थिक संकट से उबरने का समाधान नहीं है। पीयू की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए स्थायी समाधान ढूंढा जाए।
-अशोक गोयल, सीनेटर
टाइमलाइन: यूं चला पीयू में छात्रों का आंदोलन
Students, cops clash at Panjab University
- फोटो : फाइल फोटो
टाइमलाइन: यूं चला पीयू में छात्रों का आंदोलन
-26 मार्च को पीयू सीनेट की बैठक में फीस वृद्धि का फैसला हुआ।
-27 मार्च को एसएफएस ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया।
-03 अप्रैल को छात्राओं ने एसएफएस के साथ मिलकर फीस वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन किया।
-05 अप्रैल को भारी संख्या में सैकड़ों छात्राओं ने रोष जुलूस निकाला।
-06 अप्रैल को एसएफएस, पीएसयू ललकार, एसओआई, एनएसयूआई, एएसए, आइसा, पीपीएसओ ने मिलकर फीस वृद्धि के खिलाफ वीसी कार्यालय में मिलकर प्रदर्शन किया, पुलिस ने वाटर कैनन चलाई।
-07 अप्रैल को छात्र संगठनों ने ज्वाइंट स्टूडेंट एक्शन कमेटी का गठन किया। पुसू ने समर्थन दिया, 11 अप्रैल को यूनिवर्सिटी बंद का आह्वान किया।
-11 अप्रैल को विश्वविद्यालय बंद करवाकर वीसी कार्यालय का घेराव हुआ। प्रदर्शन हिंसा में तबदील हो गया, लाठीचार्ज व पथराव हुआ। पुलिसकर्मी व छात्र घायल हुए, छात्रों पर केस दर्ज हुए।
-26 मार्च को पीयू सीनेट की बैठक में फीस वृद्धि का फैसला हुआ।
-27 मार्च को एसएफएस ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया।
-03 अप्रैल को छात्राओं ने एसएफएस के साथ मिलकर फीस वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन किया।
-05 अप्रैल को भारी संख्या में सैकड़ों छात्राओं ने रोष जुलूस निकाला।
-06 अप्रैल को एसएफएस, पीएसयू ललकार, एसओआई, एनएसयूआई, एएसए, आइसा, पीपीएसओ ने मिलकर फीस वृद्धि के खिलाफ वीसी कार्यालय में मिलकर प्रदर्शन किया, पुलिस ने वाटर कैनन चलाई।
-07 अप्रैल को छात्र संगठनों ने ज्वाइंट स्टूडेंट एक्शन कमेटी का गठन किया। पुसू ने समर्थन दिया, 11 अप्रैल को यूनिवर्सिटी बंद का आह्वान किया।
-11 अप्रैल को विश्वविद्यालय बंद करवाकर वीसी कार्यालय का घेराव हुआ। प्रदर्शन हिंसा में तबदील हो गया, लाठीचार्ज व पथराव हुआ। पुलिसकर्मी व छात्र घायल हुए, छात्रों पर केस दर्ज हुए।
टाइमलाइन: यूं चला पीयू में छात्रों का आंदोलन
Students, cops clash at Panjab University
-12 अप्रैल को छात्रों पर दर्ज परचे के खिलाफ पीयू कैंपस में कैडल मार्च निकाला गया।
-17 अप्रैल को छात्रों के समर्थन में कमेटी ने पीयू कैंपस में मार्च निकाला।
-18 अप्रैल को छात्रों के संगठन को आंदोलन के लिए दोबारा रिव्यू किया गया।
-19 अप्रैल को ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने स्टूडेंट सेंटर लॉन में पब्लिक मीटिंग बुलाई।
-21 अप्रैल को ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने वीसी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया।
-24 अप्रैल को स्टूडेंट सेंटर से रिसर्च स्कॉलर्स ने रोष मार्च निकाला।
-25 अप्रैल का एसएफएस ने रैली का आयोजन किया।
-27 अप्रैल को फीस वृद्धि के खिलाफ सोलिडेट्री कमेटी ने सुखना लेक पर वॉक फॉर सेव एजुकेशन मार्च निकाला।
-30 अप्रैल को पीयू सिंडीकेट सदस्यों की बैठक बुलाई गई।
-04 मई को ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से वीसी आवास पर रोष मार्च निकाला गया। पुलिस से नोकझोंक हुई, बीच में ही रोका।
-07 मई को सीनेट हॉल के बाहर ज्वाइंट एक्शन कमेटी का धरना दिन भर चला, रात आठ बजे छात्रों के आंदोलन के समक्ष झुका पीयू प्रशासन
-इसी दौरान एबीवीपी, एनएसयूआई, पीयूसीएससी व एसओआई की सांकेतिक भूखहड़ताल भी जारी रही।
-17 अप्रैल को छात्रों के समर्थन में कमेटी ने पीयू कैंपस में मार्च निकाला।
-18 अप्रैल को छात्रों के संगठन को आंदोलन के लिए दोबारा रिव्यू किया गया।
-19 अप्रैल को ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने स्टूडेंट सेंटर लॉन में पब्लिक मीटिंग बुलाई।
-21 अप्रैल को ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने वीसी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया।
-24 अप्रैल को स्टूडेंट सेंटर से रिसर्च स्कॉलर्स ने रोष मार्च निकाला।
-25 अप्रैल का एसएफएस ने रैली का आयोजन किया।
-27 अप्रैल को फीस वृद्धि के खिलाफ सोलिडेट्री कमेटी ने सुखना लेक पर वॉक फॉर सेव एजुकेशन मार्च निकाला।
-30 अप्रैल को पीयू सिंडीकेट सदस्यों की बैठक बुलाई गई।
-04 मई को ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से वीसी आवास पर रोष मार्च निकाला गया। पुलिस से नोकझोंक हुई, बीच में ही रोका।
-07 मई को सीनेट हॉल के बाहर ज्वाइंट एक्शन कमेटी का धरना दिन भर चला, रात आठ बजे छात्रों के आंदोलन के समक्ष झुका पीयू प्रशासन
-इसी दौरान एबीवीपी, एनएसयूआई, पीयूसीएससी व एसओआई की सांकेतिक भूखहड़ताल भी जारी रही।