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पांच साल में नैक के 50 फीसदी मानक ही पूरी कर पाई पंजाब यूनिवर्सिटी, लग सकता है झटका

Thu, 17 Sep 2020 09:59 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 17 Sep 2020 09:59 AM IST
सार

  • वर्ष 2022 में नैक की टीम करेगी पीयू का दौरा, जांचेगी पुराने सुझावों पर कितना काम हुआ
  • विभागों के मर्ज का सबसे बड़ा था काम, वह केवल समितियों के बनाने तक ही सीमित

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Punjab University Fail to Complete NAAC Standards in Five Years
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

विस्तार

पंजाब विश्वविद्यालय ने पांच साल में नेशनल असिस्मेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) के महज 50 फीसदी ही मानकों को पूरा किया है। अब पीयू के पास मानकों की पूर्ति के लिए लगभग दो साल बचे हैं। इस समय में विभागों के मर्ज से लेकर एक दर्जन मानकों की पूर्ति करनी है। इतने कम समय में मानकों की पूर्ति करना असंभव दिख रहा है। इसी को लेकर शिक्षकों ने सवाल उठा दिए कि कहीं पीयू बी ग्रेड में न चला जाए। इससे पीयू को बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक संस्थानों की ग्रेडिंग ही तय करती है कि उन्हें कितना और कहां से फंड मिलेगा।
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ये हैं महत्वपूर्ण काम, जिन पर नहीं लगी अंतिम मुहर
नैक की टीम ने पीयू का दौरा वर्ष 2015 में किया था। उस दौरान टीम को कमियां ही कमियां मिली थीं। छोटे-छोटे विभाग देखकर नैक की टीम ने नाराजगी जताई थी। कहा था कि एक मुख्य विभाग बनाकर अन्य छोटे विभागों को उसमें मर्ज कर दिया जाए। इससे कर्मचारियों की आवश्यकता भी कम होगी और काम भी बेहतर हो पाएगा। पीयू ने इस सुझाव पर अब तक कमेटी ही बनाई है। एक खाका खींचा भी गया, लेकिन उसका विरोध हो गया। विभागों के मर्ज करने का सबसे बड़ा काम है, लेकिन इसके लिए पीयू आगे नहीं आ रही है। जिम्मेदार भी कमेटियां बनाने तक ही सीमित हैं।
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नैक की टीम ने कहा था कि शिक्षकों व छात्रों के अनुपात में बड़ा अंतर है। इसे पूरा किया जाना चाहिए, क्योंकि शिक्षक कम होने के कारण शिक्षण कार्य प्रभावी नहीं हो पाता। पीयू ने इसको लेकर रिक्तियां जरूर निकालीं, लेकिन उन पर सिंडिकेट ने अड़ंगा लगा दिया। उसके बाद यह प्रकरण भी ठंडे बस्ते में चला गया। नैक की टीम ने यह भी कहा था कि च्वास्ड बेस क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू किया जाए ताकि विद्यार्थी मनपसंद विषय पढ़ सकें। पीयू ने विज्ञान संकाय में तो इसे लागू कर दिया, लेकिन कला वर्ग के विद्यार्थियों को यह लाभ अब तक नहीं मिल पाया।
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आईक्यूएसी ने चेताया था, काम लटक रहा

पिछले वर्षों में पीयू के आईक्यूएसी की ओर से वाइस चांसलर को पत्र लिखा गया था कि नैक की ओर से जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, उसके कई कार्य बाकी हैं। च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम की पूर्ति 50 फीसदी हो पाई है। इसके अलावा स्टाफ की कमी है। इस पर और गौर करने की जरूरत है।

चेतावनी के बाद भी पीयू की ओर से कार्य तेजी से नहीं हुआ। पीयू ने मानकों की पूर्ति वर्ष 2020 तक न होते देख नैक से अनुरोध किया था कि उन्हें इस कार्य के लिए दो साल का अतिरिक्त समय दिया जाए। इस अनुरोध पर दो साल बढ़ाते हुए नैक ने वर्ष 2022 में दौरा करने को कहा था जबकि नैक का दौरा पांच साल में ही होता है।

नैक के मानकों की पूर्ति की जा रही है। काफी काम हो गया है। दो साल का समय अभी बचा है। बाकी मानक भी पूरे कर लेंगे। तेजी से कार्य चल रहा है।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी, पीयू

इन बिंदुओं पर हुआ काम

- मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभागों द्वारा अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाए गए।
- कंसल्टेंसी के माध्यम से आय जुटाने के प्रयास हुए।
- छात्रों की भागीदारी को ट्रैक करने के लिए संरचित तंत्र के लिए पोर्टल की व्यवस्था की गई।
- सामान व फाइलों के रखरखाव की स्थिति में सुधार हुआ।
- सूचना संसाधन पोर्टल के जरिए छात्रों की प्रगति पर ध्यान दिया जा रहा है।
- आईक्यूएसी को प्रभावी बनाया गया है जो हर मामले को सुलझाने के प्रयास कर रही है।
- परामर्श के माध्यम से गरीब राजस्व सृजन का कार्य हो रहा है।
- बोर्ड आधारित शिक्षण प्रणाली बदली और वाई-फाई की सुविधा दी गई।

इन बिंदुओं पर काम बाकी

- मूल्य आधारित शिक्षा सभी कार्यक्रमों में एकीकृत नहीं हो पा रही है।
- सीबीसीएस सिस्टम पूरी तरह अभी लागू नहीं हो सका है।
- छात्रों के फीडबैक सभी विभागों से पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं।
- अग्रिम शिक्षार्थियों की पहचान के लिए तंत्र विकसित किया जाना था, इस पर अभी काम चल रहा है।
- संकायों में स्टाफ की कमी है। इसकी अनुमति शासन से नहीं मिली।
- विभागों के मर्ज करने, शिक्षकों की भर्ती करने का काम बाकी।
- तकनीकी स्टाफ की कमी अधिक है।
- विभागों से कम प्लेसमेंट हो रहे हैं।
- हॉस्टलों की कमी महसूस की गई।
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