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पंजाब यूनिवर्सिटी अब पब्लिकेशन के जरिये रैंकिंग में लगाएगी छलांग, तैयार किया जा रहा डाटाबेस
Mon, 20 May 2019 11:20 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 20 May 2019 11:20 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी निरफ समेत कई रैंकिंग में पिछड़ने के बाद अब मजबूत डाटाबेस तैयार कर रहा है। सबसे महत्वपूर्ण डाटा पब्लिकेशन का है, वह इकट्ठा किया जा रहा है। इसके लिए आईक्यूएसी निदेशक डॉ. आशीष जैन की ओर से सभी विभाग अध्यक्षों को चिट्ठी भेजी गई है। विभागों से भी प्रोफेसर्स के पब्लिकेशन की संख्या, प्रकार, उनका प्रभाव आदि जाना है। इसका डाटाबेस तैयार होने के बाद पीयू अन्य बिंदुओं पर काम करेगा।
पीयू के शिक्षकों के पब्लिकेशन बड़े पैमाने पर देश व विदेशों के जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। साइंस फैकल्टी के प्रोफेसरों के इन पब्लिकेशनों का प्रभाव भी बेहतर है। देश दुनिया के रिसर्च स्कॉलर व अन्य शिक्षाविद भी अपने रिसर्च में पीयू के शिक्षकों के जर्नल्स का जिक्र करते हैं। उसी के आधार पर आगे वैज्ञानिक कार्य करते हैं। एक बेहतर रिसर्च करोड़ों लोगों को रास्ता दिखाता है। पीयू का यूआईपीएस विभाग सबसे अधिक मजबूत है।
इस विभाग के प्रोफेसरों के पब्लिकेशन पूरी दुनिया के प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित होते हैं। पीयू का आईक्यूएसी विभाग इन पब्लिकेशन का डाटा इकट्ठा करेगा और उसके बाद रैंकिंग के लिए अपलोड किए जाएंगे। बताया जाता है कि सर्वाधिक अंक इनके हासिल होते हैं। यह कार्य मई माह के आखिरी तक पूरा हो जाएगा। उसके बाद पीयू अन्य बिंदुओं पर कार्य करेगा।
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पीयू के शिक्षकों के पब्लिकेशन बड़े पैमाने पर देश व विदेशों के जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। साइंस फैकल्टी के प्रोफेसरों के इन पब्लिकेशनों का प्रभाव भी बेहतर है। देश दुनिया के रिसर्च स्कॉलर व अन्य शिक्षाविद भी अपने रिसर्च में पीयू के शिक्षकों के जर्नल्स का जिक्र करते हैं। उसी के आधार पर आगे वैज्ञानिक कार्य करते हैं। एक बेहतर रिसर्च करोड़ों लोगों को रास्ता दिखाता है। पीयू का यूआईपीएस विभाग सबसे अधिक मजबूत है।
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इस विभाग के प्रोफेसरों के पब्लिकेशन पूरी दुनिया के प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित होते हैं। पीयू का आईक्यूएसी विभाग इन पब्लिकेशन का डाटा इकट्ठा करेगा और उसके बाद रैंकिंग के लिए अपलोड किए जाएंगे। बताया जाता है कि सर्वाधिक अंक इनके हासिल होते हैं। यह कार्य मई माह के आखिरी तक पूरा हो जाएगा। उसके बाद पीयू अन्य बिंदुओं पर कार्य करेगा।
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इन पर काम करने की जरूरत
- मूल्य आधारित शिक्षा सभी कार्यक्रमों में एकीकृत नहीं हो पा रही है।
- सीबीसीएस सिस्टम पूरी तरह अभी लागू नहीं हो सका है।
- छात्रों के फीडबैक सभी विभागों से पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं।
- अग्रिम शिक्षार्थियों की पहचान के लिए तंत्र विकसित किया जाना था, इस पर अभी काम चल रहा है।
- संकायों में स्टाफ की कमी है। इसकी अनुमति शासन से नहीं मिली है।
- सफाई का आलम पुराने जैसा है। कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
- प्लेसमेंट की व्यवस्था में समुचित सुधार नहीं हो पाया है।
- सीबीसीएस सिस्टम पूरी तरह अभी लागू नहीं हो सका है।
- छात्रों के फीडबैक सभी विभागों से पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं।
- अग्रिम शिक्षार्थियों की पहचान के लिए तंत्र विकसित किया जाना था, इस पर अभी काम चल रहा है।
- संकायों में स्टाफ की कमी है। इसकी अनुमति शासन से नहीं मिली है।
- सफाई का आलम पुराने जैसा है। कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
- प्लेसमेंट की व्यवस्था में समुचित सुधार नहीं हो पाया है।
ये मानक पूरे किए
- मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभागों द्वारा अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाए गए।
- छात्रों की भागीदारी को ट्रैक करने के लिए संरचित तंत्र के लिए पोर्टल की व्यवस्था की गई।
- सामान व फाइलों के रखरखाव की स्थिति में सुधार हुआ।
- छात्रावासों की संख्या दस से बढ़कर 11 हो रही है। इसके अलावा हॉस्टलों का उच्चीकरण हो रहा है।
पीयू की अच्छी रैंकिंग के लिए सभी विभागों के पब्लिकेशन का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। साथ ही अन्य मानकों पर भी काम हो रहा है। जल्द ही यह कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
---- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी
- छात्रों की भागीदारी को ट्रैक करने के लिए संरचित तंत्र के लिए पोर्टल की व्यवस्था की गई।
- सामान व फाइलों के रखरखाव की स्थिति में सुधार हुआ।
- छात्रावासों की संख्या दस से बढ़कर 11 हो रही है। इसके अलावा हॉस्टलों का उच्चीकरण हो रहा है।
पीयू की अच्छी रैंकिंग के लिए सभी विभागों के पब्लिकेशन का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। साथ ही अन्य मानकों पर भी काम हो रहा है। जल्द ही यह कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
---- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी