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पहली बार 20 मिनट में खत्म हो गई पीयू की सीनेट मीटिंग खत्म, कई मुद्दों पर बहस, कुछ रह गए ऐसे

Mon, 22 Apr 2019 02:06 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 22 Apr 2019 02:06 PM IST
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Punjab University Chandigarh Senate Meeting on 21 April
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब यूनिवर्सिटी में रविवार को बुलाई गई स्पेशल सीनेट मीटिंग महज 20 मिनट में समाप्त हो गई। कई मुद्दों पर बहस हुई और कुछ ऐसे ही रह गए। मीटिंग में विरोध के बावजूद इंफोसिस फाउंडेशन की ट्रस्टी सुधा मूर्ती को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की उपाधि देने पर मुहर लगा दी गई। मीटिंग के दौरान कई सीनेटरों ने अपनी बात रखने की कोशिश की पर उन्हें समय नहीं दिया गया।
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सिर्फ 3 सीनेटर ही बोल सके और पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राज कुमार ने फैसला लेकर राष्ट्रगान शुरू करवा दिया। तमाम सीनेटर इस संबंध में अपनी बात रखना चाहते थे पर अचानक शुरू हुए राष्ट्रगान की वजह से वह कुछ कह नहीं सके। कई सीनेटों की चाय हाथ में ही रह गई। वहीं मीटिंग में प्रो. चमन ने कहा कि वीसी ने पीयू का कैलेंडर भी फॉलो नहीं किया।
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किसी भी नाम पर सहमति बनाने के लिए बैलेट पेपर पर वोट कराना आवश्यक होता है, लेकिन यह प्रोसेस फॉलों नहीं किया गया। इसके खिलाफ वह चांसलर से शिकायत करेंगे। उनके द्वारा डिग्री को अप्रूव नहीं करने की मांग करेंगे। गौरतलब है कि 28 अप्रैल को होने वाली कन्वोकेशन में सुधा मूर्ती के अलावा इसरो के डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के चेयरमैन डॉ के सीवान को विज्ञान रत्न दिया जाएगा।
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सुधा मूर्ती को ऑनरेरी डिग्री देना पीयू की परंपरा के खिलाफ- प्रो चमन

बैठक शुरू होते ही प्रो. चमन लाल ने कहा कि सुधा मूर्ती को ऑनरेरी डिग्री प्रदान करना पीयू की परंपरा के खिलाफ है। वह एक पॉपुलर लाइफस्टाइल राइटर रहीं है, लेकिन लिटरेचर के लिए उनका योगदान उतना नहीं है। वह अपने लेखों को लेकर काफी मशहूर रहीं है, एनजीओ को लेकर उनको तमाम प्रकार अवार्ड मिल चुके हैं पर डॉक्टर आफ लिटरेचर की उपाधि देना यह ठीक नहीं है।

प्रो. चमन ने इस मौके पर चार कारणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुधा मूर्ति को भले पद्मश्री मिला हो पर लिटरेचर के क्षेत्र में कोई पुरस्कार नहीं मिला है। उन्हें न साहित्य अकादमी और न ही ज्ञानपीठ का सम्मान मिला है। सुधा मूर्ती को उनकी स्टेट यूनिवर्सिटी ने भी सम्मानित नहीं किया है। उन्होंने कन्नड़ और अंग्रेजी में कई पॉपुलर लेख लिखे हैं।

प्रो. चमन ने कहा कि सुधा मूर्ती ने एक समाज सेवी के तौर पर कई बेहतरीन कार्य किए हैं, जिनमें देश में कई लाईब्रेरी शुरू कराना हैं। डॉक्टर आफ लिटरेचर की उपाधि सिर्फ उसी व्यक्ति को देनी चाहिए, जिसने इस क्षेत्र में काफी काम किया हो। उन्होंने सुधा मूर्ती के स्थान पर हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार मनु भंडारी और पंजाबी साहित्यकार गुरबचन सिंह भुल्लर का नाम ऑनरेरी डिग्री के लिए प्रस्तावित किया।

स्पेशल सीनेट बैठक पर उठे सवाल

अचानक बुलाई गई सीनेट की बैठक पर सीनेटर अशोक गोयल ने सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रही है, इस बीच इस सीनेट की बैठक का क्या मतलब। लाखों रुपये खर्च कर बुलाई गई यह बैठक सिंडिकेट द्वारा थोपा गया फैसला है। उन्होंने वीसी प्रो. राज कुमार से कहा कि वह जवाब कि दें कि किसने यह स्पेशल बैठक बुलाने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ऑनरेरी डिग्री को लेकर पीयू की छवि धूमिल हो रही है। अगर स्पेशल बैठक बुलाई गई तो सिर्फ तीन लोगों को ही क्यों बोलने दिया गया।

कई सीनेटरों ने फैसले को बताया सही
बैठक के दौरान सीनेटर मुकेश अग्रवाल ने कहा कि 24 साल में पहली बार किसी नाम को लेकर हंगामा खड़ा किया जा रहा है। ज्ञानपीठ पुरस्कार के विजेताओं पर भी सवाल उठते हैं, ऐसे में वह सिंडिकेट के फैसले को सही मानते हैं। उन्होंने कहा कि ऑनरेरी पुरस्कार मांगा नहीं जाता बल्कि व्यक्ति के सम्मान ने दिया जाता है। ऐसे में इस पर सवाल उठाना व्यक्ति की छवि को धूमल करना है। सीनेटर नवदीप गोयल ने कहा कि सुधा मूर्ति को डॉक्टर आफ लिटरेचर की उपाधि देना ठीक है और स्पेशल सीनेट बुलाने पर सवाल उठाना गलत है।

4 सिंडिकेट, 11 सीनेट सहस्य रहे गैर हाजिर
स्पेशल सीनेट की बैठक में 4 सिंडिकेट के सदस्य व 11 सीनेट सदस्य गैरहाजिर रहे। इन सभी ने ऑनलाइन सुधा मूर्ती को ऑनरेरी डिग्री देने के फैसले पर स्वीकृति दे दी।

पंजाब विश्वविद्यालय में 28 अप्रैल को होने वाली कन्वोकेशन में सुधा मूर्ति और डा. के सिवान को सम्मानित करना पीयू के लिए गर्व का विषय है।
- प्रोफेसर करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार, पंजाब विश्वविद्यालय
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