{"_id":"5c7caffdbdec227366792b14","slug":"punjab-university-chandigarh-scheme-to-save-paper-via-phd-paper","type":"story","status":"publish","title_hn":"नई पहलः पंजाब यूनिवर्सिटी में अब पीएचडी पेपर के 10 नहीं चार बंडल होंगे जमा, भेजा जाएगा प्रस्ताव","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
नई पहलः पंजाब यूनिवर्सिटी में अब पीएचडी पेपर के 10 नहीं चार बंडल होंगे जमा, भेजा जाएगा प्रस्ताव
Mon, 04 Mar 2019 10:26 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 04 Mar 2019 10:26 AM IST
विज्ञापन
कागज की बर्बादी
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कागज की बर्बादी रोकने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ कई योजनाएं बना रहा है। इसी कड़ी में अब पीएचडी पेपर की संख्या कम करने जा रहा है। पहले पीएचडी कर रहे अभ्यर्थियों को दस बंडल पेपर के जमा करने होते थे लेकिन अब चार ही बंडल पेपर जमा करने होंगे। इससे एक अभ्यर्थी के पांच से छह हजार रुपये की बचत होगी। साथ ही कागज भी अधिक नहीं लगेगा। नए शैक्षिक सत्र से इस योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी है।
यूजीसी को भी योजना बताई जाएगी ताकि अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह योजना लागू हो। आंकड़ों पर गौर करें तो पीयू में 700 से अधिक रिसर्च स्कॉलर हैं। हर साल 150 से अधिक स्कॉलर अपनी थिसिस जमा करते हैं। इसके पहले दस बंडल कागजों के देने होते थे। यानी रिसर्च पेपर की दस प्रतियां जमा होती थीं। एक प्रति में लगभग एक हजार कागज होते हैं। इन कागजों पर दस हजार रुपये तक खर्च होते हैं। इससे अभ्यर्थी को भी अधिक मेहनत करनी होती है। समय की भी बर्बादी होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब विश्वविद्यालय ने पेपरों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। पीयू की इस योजना का लाभ हर साल 400 से 500 अभ्यर्थियों को यहां मिलेगा। यदि यह योजना दूसरे विश्वविद्यालय भी अपनाते हैं तो हर साल लाखों पीएचडी स्कॉलर्स को लाभ मिल सकेगा।
विज्ञापन
बैक टू बैक लिखना होगा जरूरी
विभाग व कार्यालयों में अभी भी पेपर के एक तरफ ही लिखा जा रहा है। दूसरी साइड खाली है। यह भी कागज की बर्बादी है। इसे रोकने के लिए भी पीयू कदम उठा रहा है। इसके लिए एक मॉनीटरिंग कमेटी बनाई जाएगी जो इस पर गौर करेगी। यदि कोई कार्यालय या विभाग कागजों का पालन नहीं करेगा तो उस पर कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
सीनेट बैठक का एजेंडा हो सकता है सॉफ्ट
सीनेट व सिंडिकेट की बैठक का एजेंडा तैयार करने में ही हर साल 40 से 50 लाख रुपये कागजों पर खर्च हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पीयू प्रथम चरण में सीनेट के एजेंडे को सदस्यों तक सॉफ्ट कॉपी के रूप में पहुंचाने की तैयारी है। यदि किसी सदस्य की डिमांड किसी बिंदु को लेकर हार्ड कॉपी की होगी तो संबंधित सदस्य को हार्ड कॉपी मुहैया कराई जाएगी।
पीयू पेपरलैस योजना की ओर कदम बढ़ा रहा है। कागज की बर्बादी अधिक न हो इसलिए पीएचडी के पेपर भी अब चार सेट में ही जमा किए जाएंगे। इससे अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
-- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू
विज्ञापन
यूजीसी को भी योजना बताई जाएगी ताकि अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह योजना लागू हो। आंकड़ों पर गौर करें तो पीयू में 700 से अधिक रिसर्च स्कॉलर हैं। हर साल 150 से अधिक स्कॉलर अपनी थिसिस जमा करते हैं। इसके पहले दस बंडल कागजों के देने होते थे। यानी रिसर्च पेपर की दस प्रतियां जमा होती थीं। एक प्रति में लगभग एक हजार कागज होते हैं। इन कागजों पर दस हजार रुपये तक खर्च होते हैं। इससे अभ्यर्थी को भी अधिक मेहनत करनी होती है। समय की भी बर्बादी होती है।
विज्ञापन
इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब विश्वविद्यालय ने पेपरों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। पीयू की इस योजना का लाभ हर साल 400 से 500 अभ्यर्थियों को यहां मिलेगा। यदि यह योजना दूसरे विश्वविद्यालय भी अपनाते हैं तो हर साल लाखों पीएचडी स्कॉलर्स को लाभ मिल सकेगा।
विज्ञापन
बैक टू बैक लिखना होगा जरूरी
विभाग व कार्यालयों में अभी भी पेपर के एक तरफ ही लिखा जा रहा है। दूसरी साइड खाली है। यह भी कागज की बर्बादी है। इसे रोकने के लिए भी पीयू कदम उठा रहा है। इसके लिए एक मॉनीटरिंग कमेटी बनाई जाएगी जो इस पर गौर करेगी। यदि कोई कार्यालय या विभाग कागजों का पालन नहीं करेगा तो उस पर कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
सीनेट बैठक का एजेंडा हो सकता है सॉफ्ट
सीनेट व सिंडिकेट की बैठक का एजेंडा तैयार करने में ही हर साल 40 से 50 लाख रुपये कागजों पर खर्च हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पीयू प्रथम चरण में सीनेट के एजेंडे को सदस्यों तक सॉफ्ट कॉपी के रूप में पहुंचाने की तैयारी है। यदि किसी सदस्य की डिमांड किसी बिंदु को लेकर हार्ड कॉपी की होगी तो संबंधित सदस्य को हार्ड कॉपी मुहैया कराई जाएगी।
पीयू पेपरलैस योजना की ओर कदम बढ़ा रहा है। कागज की बर्बादी अधिक न हो इसलिए पीएचडी के पेपर भी अब चार सेट में ही जमा किए जाएंगे। इससे अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
-- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू