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नैक के मानकों पर अब खरा उतरने को तैयार पंजाब यूनिवर्सिटी, पूरी कर दी गई हैं 80 फीसदी जरूरतें

Mon, 13 May 2019 01:52 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 13 May 2019 01:52 PM IST
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Punjab University Chandigarh Ready to Fullfill NAAC Rules
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
पंजाब यूनिवर्सिटी नैक के मानकों पर अब खरा उतरने के लिए तैयार है। पीयू ने हर बिंदू पर बेहतर ढंग से कार्य किया है। बोर्ड व चॉक प्रणाली कक्षाओं में पढ़ाने के लिए बनी है, लेकिन पूरे कैंपस को वाई-फाई फ्री कर दिया गया है। हर जगह नेटवर्क है, जिसके जरिये विद्यार्थी खुद ही नेट पर पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ समय पहले आईक्यूएसी ने वाइस चांसलर को पत्र लिखा है।
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इसमें बताया गया कि नैक की ओर से जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, उसकेअधिकांश मानक पूरे हो गए हैं। च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम की पूर्ति 50 फीसदी हो पाई है। इसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। मार्च 2015 में नैक की टीम पीयू पहुंची थी। उन्होंने पाया था कि यहां विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की संख्या पर्याप्त न होने, संकाय की कमी, बोर्ड-चॉक विधि का शिक्षण के लिए चलन, सीबीसीएस विधि चलने, अपर्याप्त तकनीकी स्टाफ, कम प्लेसमेंट समेत कई बिंदुओं को पीयू को बताया।
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कई कमियां सामने आने के बाद नैक ने इनकी पूर्ति के लिए पीयू को वर्ष 2022 तक का समय दिया है। इन तीन वर्षों में पीयू ने बेहतर कार्य कर अधिकांश मानकों की पूर्ति की है। बाकी कार्य एक से दो साल में पूरे करने की दावे किए जा रहे हैं। मालूम हो कि नैक की टीम ग्रेडिंग जारी करती है, उसी पर रैंकिंग भी जारी होती है।
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इन पर पूरा हुआ काम

- मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभागों द्वारा अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाए गए।
- कंसल्टेंसी के माध्यम से आय जुटाने के प्रयास हुए।
- छात्रों की भागीदारी को ट्रैक करने के लिए संरचित तंत्र के लिए पोर्टल की व्यवस्था की गई।
- सामान व फाइलों के रखरखाव की स्थिति में सुधार हुआ।
- स्वच्छता के लिए गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जा रहा है।
- सूचना संसाधन पोर्टल के जरिये छात्रों की प्रगति पर ध्यान दिया जा रहा है।
- छात्रों का वैधानिक, शैक्षणिक और औपचारिक प्रतिनिधित्व बना हुआ है।
- आईक्यूएसी को प्रभावी बनाया गया है जो हर मामले को सुलझाने के प्रयास कर रही है।
- परामर्श के माध्यम से गरीब राजस्व सृजन का कार्य हो रहा है।
- छात्रावासों की संख्या दस से बढ़कर 11 हो रही है। इसकेअलावा हॉस्टलों का उच्चीकरण हो रहा है।
- प्लेसमेंट व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ। हर साल हजारों विद्यार्थियों को नौकरी दिलाई जा रही है।

पांच बिंदुओं पर तेजी से चल रहा काम

- मूल्य आधारित शिक्षा सभी कार्यक्रमों में एकीकृत नहीं हो पा रही है।
- सीबीसीएस सिस्टम पूरी तरह अभी लागू नहीं हो सका है।
- छात्रों के फीडबैक सभी विभागों से पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं।
- अग्रिम शिक्षार्थियों की पहचान के लिए तंत्र विकसित किया जाना था, इस पर अभी काम चल रहा है।
- संकायों में स्टाफ की कमी है। इसकी अनुमति शासन से नहीं मिली।

नैक की ओर से जिन बिंदुओं पर रिपोर्ट दी गई थी उनकी पूर्ति के लिए काम तेजी से चल रहा है। कई मानकों की पूर्ति हो गई है। बाकी पर भी जल्द सफलता मिलेगी।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी पीयू
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