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स्वच्छता रैंकिंग ने आने को पंजाब यूनिवर्सिटी ने कसी कमर, गीला व सूखा कूड़ा अलग रखने के आदेश
Tue, 08 Jan 2019 03:07 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 08 Jan 2019 03:07 PM IST
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2018 में स्वच्छता रैकिंग में शॉर्टलिस्ट तक नहीं हो पाए पंजाब यूनिवर्सिटी ने इस बार रैकिंग में आने के लिए कमर कस ली है। पीयू प्रशासन ने कैंपस में रहने वाले एक हजार से अधिक परिवारों को निर्देश दिए हैं कि वह घरों से निकलने वाले गीले व सूखे कूड़े को अलग-अलग रखें। वहीं, सभी हॉस्टल्स में कंपोस्ट खाद के लिए गड्ढे भी खोदे गए हैं ताकि पेड़ों के पत्ते आदि उनमें डाले जा सकें और कुछ दिन बाद वहां से खाद तैयार हो सके। इसके अलावा गोद लिए गांवों में किए जाने वाले कार्यों का भी रिकॉर्ड रखना होगा। जिक्र योग्य है कि वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने स्वच्छता रैंकिंग जारी की।
बीते साल पीयू इसके लिए शॉर्टलिस्ट तक नहीं हो पाया था, जबकि अन्य रैंकिंग में आगे बढ़ रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए पीयू इस बार कोई चूक नहीं होने देने चाहता है। सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वह अपने-अपने विभाग व आसपास सफाई बेहतर बनाए रखें। शौचालय, लैब, क्लास रूम में भी सफाई के लिए उचित प्रबंध करते हुए उसकी नियमित मॉनीटरिंग की जाए। विभागों के आसपास के पेड़ों से गिरने वाले पत्ते कंपोस्ट गड्ढे में डाले जाएं। साथ ही विभाग अध्यक्ष आपस में एक-दूसरे विभागों की इस कार्य में मदद भी करें।
सोलर पैनल पर काम करना बाकी
पीयू ने कई साल पहले सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन इस पर अब तक काम नहीं हो पाया। यह भी स्वच्छता के लिए जरूरी है। जिम्मेदार लोगों का तर्क है कि मार्च में इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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कितना पानी सेव किया पता नहीं
पीयू में आठ से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग कुएं बनाए गए हैं। वर्षों पहले इनका शुभारंभ हुआ था, लेकिन पीयू को यह पता नहीं कि अब तक कितना पानी कुओं के जरिये धरती में गया और कितना पानी रिचार्ज हो पाया। अब संबंधित लोगों को आदेश दिए गए हैं कि वह इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार करें।
इन बिंदुओं पर शुरू हुआ काम
- निकलने वाले कूड़े के निस्तारण पर।
- गोद लिए गांवों में किए गए कार्यों का रिकॉर्ड रखना शुरू।
- पानी की सप्लाई और उसकी शुद्धता।
- शौचालयों की संख्या और उनकी नियमित सफाई।
- एनर्जी के सेविंग और उत्पादन पर नजर।
स्वच्छता रैंकिंग को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। गीला व सूखा कूड़ा पूरे परिसर में अलग करवाया जा रहा है। कई अन्य बिंदुओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है कि इस बार रैंकिंग अच्छी आएगी।
- प्रो. एम राजीव लोचन, निदेशक, आईक्यूएसी पीयू
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बीते साल पीयू इसके लिए शॉर्टलिस्ट तक नहीं हो पाया था, जबकि अन्य रैंकिंग में आगे बढ़ रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए पीयू इस बार कोई चूक नहीं होने देने चाहता है। सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वह अपने-अपने विभाग व आसपास सफाई बेहतर बनाए रखें। शौचालय, लैब, क्लास रूम में भी सफाई के लिए उचित प्रबंध करते हुए उसकी नियमित मॉनीटरिंग की जाए। विभागों के आसपास के पेड़ों से गिरने वाले पत्ते कंपोस्ट गड्ढे में डाले जाएं। साथ ही विभाग अध्यक्ष आपस में एक-दूसरे विभागों की इस कार्य में मदद भी करें।
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सोलर पैनल पर काम करना बाकी
पीयू ने कई साल पहले सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन इस पर अब तक काम नहीं हो पाया। यह भी स्वच्छता के लिए जरूरी है। जिम्मेदार लोगों का तर्क है कि मार्च में इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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कितना पानी सेव किया पता नहीं
पीयू में आठ से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग कुएं बनाए गए हैं। वर्षों पहले इनका शुभारंभ हुआ था, लेकिन पीयू को यह पता नहीं कि अब तक कितना पानी कुओं के जरिये धरती में गया और कितना पानी रिचार्ज हो पाया। अब संबंधित लोगों को आदेश दिए गए हैं कि वह इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार करें।
इन बिंदुओं पर शुरू हुआ काम
- निकलने वाले कूड़े के निस्तारण पर।
- गोद लिए गांवों में किए गए कार्यों का रिकॉर्ड रखना शुरू।
- पानी की सप्लाई और उसकी शुद्धता।
- शौचालयों की संख्या और उनकी नियमित सफाई।
- एनर्जी के सेविंग और उत्पादन पर नजर।
स्वच्छता रैंकिंग को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। गीला व सूखा कूड़ा पूरे परिसर में अलग करवाया जा रहा है। कई अन्य बिंदुओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है कि इस बार रैंकिंग अच्छी आएगी।
- प्रो. एम राजीव लोचन, निदेशक, आईक्यूएसी पीयू