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डीएसडब्ल्यू विवादः पीयू को हाईकोर्ट से राहत, सीनेट की बैठक बुलाने के आदेश पर खंडपीठ की रोक

Sat, 14 Sep 2019 10:46 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 14 Sep 2019 10:46 AM IST
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Punjab University Chandigarh Got Relief from Punjab Haryana High Court in DSW Controversy
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
पंजाब यूनिवर्सिटी के डीन स्टूडेंट वेल्फेयर (डीएसडब्ल्यू) प्रो इमैन्युअल नाहर की एक्सटेंशन विवाद के बीच शुक्रवार को पीयू के लिए हाईकोर्ट से राहत की खबर आई। हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी जिसमें सिंगल बेंच ने पीयू को सात दिन के भीतर सीनेट की बैठक बुला डीएसडब्ल्यू की नियुक्ति विवाद पर निर्णय लेने को कहा गया था।
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हालांकि प्रो. नाहर के डीएसडब्ल्यू बनने के आदेश खंडपीठ के इस आदेश के बावजूद बरकरार रहेंगे। समय की कमी की वजह से बहस पूरी नहीं हो सकी इसलिए अब सोमवार को फिर इस याचिका पर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वीसी के आदेश पर डीएसडब्ल्यू के पद से हटाए गए प्रो इमैन्युअल नाहर को बड़ी राहत देते हुए उन्हें 16 सितंबर तक इस पद पर बनाए रखने के आदेश दिए थे।
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साथ ही पीयू को 7 दिन के भीतर दोबारा सीनेट बुलाकर डीएसडब्ल्यू के पद पर नए सिरे से निर्णय लेने के आदेश दिए थे। सिंगल बेंच के इसी फैसले को पीयू ने खंडपीठ में चुनौती दी है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखी लेकिन बहस पूरी नहीं हो सकी।
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इस पर पीयू ने कहा कि सोमवार को ही सिंगल बेंच के समक्ष इस केस की सुनवाई है और उन्होनें सात दिन के भीतर सीनेट की बैठक बुलाने के आदेश दिए थे। ऐसे में उस आदेश पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट ने इससे सहमति जताते हुए सिंगल बेंच के पूरे आदेश के स्थान पर सिर्फ सीनेट की बैठक बुलाने के आदेश पर रोक लगा दी।

 

विवाद के विषय जिनका देना है उत्तर

- हाईकोर्ट के समक्ष विवाद का विषय बना कि क्या सिंडीकेट की सिफारिश के साथ वीसी की सिफारिश भी किसी प्रस्ताव के लिए  अनिवार्य है या उसके बिना भी काम चल सकता है।
- क्या सीनेट का बहुमत जिस पक्ष में हो उसे दरकिनार कर वीसी को सीनेट में बहुमत को दरकिनार कर कोई निर्णय लेने की शक्ति रखते हैं।
- क्या सिंगल बेंच को अधिकार है कि अंतरिम आदेश में याची द्वारा मांगी गई सभी राहत उसे दे दी जाए।

 

यह रही दलीलें

- वीसी की ओर से कहा गया मुझे यूनिवर्सिटी चलानी है और यूनिवर्सिटी के विकास के लिए सीनेट के सदस्यों का साथ जरूरी है जो नहीं मिल रहा।
- सीनेटरों ने कहा कि सीनेट में डेमोक्रेसी से काम होता है और ऐसे में बहुमत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अगर ऐस किया तो यह डेमोक्रेसी के खिलाफ होगा।
- वीसी की ओर से कहा गया कि पीयू केकैलेंडर में डीएसडब्लयू पद पर नियुक्ति के लिए वीसी और सीनेट दोनों की मंजूरी का प्रावधान है। केवल सीनेट की मंजूरी प्रो. नाहर को पद पर एक्सटेंशन देने के लिए काफी नहीं है।
- प्रो. नाहर व सीनेटरों ने कहा सिंडीकेट और सीनेट दोनों ने प्रो. नाहर की एक्सटेंशन का फैसला लिया लेकिन इसके खिलाफ जा वीसी ने प्रो. जगत भूषण की नियुक्ति कर दी। इस तरह से 74 सदस्यों की सीनेट में से 48 सदस्य यानी बहुमत खारिज करना कहां तक वैध है।
- वीसी ने कहा कि दैनिक कार्यों के लिए वह जिम्मेदार होते हैं और उसके पास अपनी टीम के चयन का अधिकार है। सीनेटर तो ज्यादातर बाहर ही रहते हैं। लिहाजा वीसी ही डीएसडब्ल्यू को नियुक्त कर सकता है।
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