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पीयूः टूटा पिंजरा और लड़कियों को मिला 'आजादी का हक', जानिए कैसे और अब क्या होगा आगे

Sun, 16 Dec 2018 10:02 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 16 Dec 2018 10:02 AM IST
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Punjab University Chandigarh Girl Students got Freedon from Girl Hostals
लड़कियों को आजादी मिल ही गई
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में आखिरकार लड़कियों को आजादी मिल ही गई। अब हॉस्टल 24 घंटे खुलेंगे, पर ये हक मिला कैसे और अब आगे क्या होगा। बात चाहे जेपी आंदोलन की हो या फिर अन्ना के आंदोलन की, जिसने भी दृढ़ इच्छा व संकल्प के साथ आंदोलन किया, सफलता पाई और बदलाव की बयार बही। इसी संकल्प और दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ पंजाब विश्वविद्यालय में छात्राओं के गर्ल्स हॉस्टल 24 घंटे खोलने को लेकर बीते 28 अक्टूबर को आंदोलन की नींव रखी गई। छात्राओं ने रणनीति के मुताबिक मोर्चा संभाला। 48 दिन चले इस संघर्ष के बाद छात्राओं को जीत हासिल हुई।
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इस जीत के पीछे के पांच थिंक टैंक व 44 आंदोलनकारी थे, जिन्होंने कभी हार न मानने की कसम खा रखी थी। इन्होंने अहिंसा का रास्ता अपनाया। साथ ही डा. भीमराव आंबेडकर और भगत सिंह की राह भी चुनी। पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव का परिणाम आते ही एसएफएस से अध्यक्ष कनुप्रिया चुनकर आईं। जीत के बाद घोषणाओं पर काम शुरू कर दिया। प्रमुख मुद्दा 24 घंटे गर्ल्स हॉस्टल खुलवाने का था। 22 सितंबर को एसएफएस के मुख्य पदाधिकारियों की बैठक हुई। उसके लिए आंदोलन के मुखिया चुने गए। मुख्य थिंक टैंक का जिम्मा छात्र दमन को दिया गया और आंदोलन को लीड करने का काम अध्यक्ष कनुप्रिया व हसनप्रीत को मिला।
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पांच दिन बाद 27 सितंबर को फिर कमेटी की बैठक कैंपस के एक कोने में डिस्कशन के बहाने हुई। उसी में पूरे आंदोलन की रणनीति रख दी गई। तय हुआ दस दिन तक प्रोटेस्ट का रुख नुक्कड़-नाटक, काव्य पाठ, रैलियां की जाएंगी। फिर घेराव, दरवाजा दस्तक, चिट्ठी वार शुरू होगा। अगर 25 दिन तक कोई निर्णय नहीं होता है तो फिर बैरियर पार करेंगे। राजनीतिक, गैर राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ताओं को कैंपस में न्योता देंगे और उसके बाद वीसी दफ्तर व आवास का जोरदार तरीके से घेराव किया जाएगा। छात्रों को भी प्रोटेस्ट में शामिल किया जाएगा। 35 दिन में निर्णय नहीं हुआ तो फिर स्टूडेंट मौन धारण करेंगे और यह सन्नाटा एक चेतावनी व संदेश पीयू प्रशासन को देगा। यदि इसमें भी अफसर नहीं जागते तो फिर तरीका 11 अप्रैल 2017 का होगा।
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पीयू प्रशासन भांप गया था लड़कियों के सन्नाटे को

गनीमत रही पीयू प्रशासन छात्राओं के इस सन्नाटे को भांप गया और सीनेट के सदस्यों का उन्हें साथ मिल गया और छात्राओं के हक में फैसला ले लिया गया। रणनीति में लगे इन छात्र-छात्राओं ने रात में कभी दो घंटे तो कभी तीन घंटे ही नींद ली थी। बारिश में भीगकर रात काटी। यहीं नहीं परीक्षा की तैयारी भी फटे तंबू के नीचे रहकर कर रही थीं। यहां तक की सुरक्षा के लिए भी छात्र रोस्टर के मुताबिक ड्यूटी दे रहे थे।

पता था पीयू तोड़ देगा छात्रों की एकता को
रणनीति बनाने वाली अध्यक्ष कनुप्रिया, हसनप्रीत, आइसा अध्यक्ष विजय कुमार, पीएसयू ललकार अध्यक्ष अमनदीप कौर, एसएफएस लीडर हरमन, राजविंदर आदि को पता था कि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए पीयू प्रशासन कई दबाव बनाएगा। यही कारण रहा कि पहले प्रोटेस्ट में छात्राओं की संख्या हजारों में रही और फिर घटकर 40 से 45 तक पहुंच गई लेकिन इनका विश्वास नहीं टूटा था। रणनीति यहां तक थी कि यदि जबरन जेल में सबको बंद किया जाता तो भी फिर एक व्यक्ति इस आजादी की मांग को प्रोटेस्ट स्थल पर उठाता रहता।

नवदीप व अशोक की जोड़ी ने दिया साथ
छात्र-छात्राओं के इस आंदोलन को आठ दिसंबर से ही बल मिल गया था जब प्रो. नवदीप गोयल ने इसे सिंडिकेट में उठाया। उसके बाद से प्रो. नवदीप व प्रो. अशोक ने हाथ मिला और छात्राओं के साथ खड़े हो गए। इन दोनों प्रोफेसर्स के सदस्य सिंडिकेट व सीनेट में सर्वाधिक हैं तो उन्हीं के कहने पर छात्राओं की मांग सीनेट में प्रमुखता से रखी गई और बहस व कुछ सदस्यों के विरोध के बाद भी उनकी बात पर मुहर लग गई। सीनेट में बनाई कमेटी में छात्र संघ अध्यक्ष व सचिव को शामिल करने की बात रखी गई लेकिन वीसी ने अनुमति नहीं दी। इस पर हंगामा भी हुआ।

ये भी रही मांग, जिन पर होना है निर्णय

- स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष व सचिव को सीनेट सदस्य बनाया जाए
- पीयूकैश कमेटी में स्टूडेंट्स का प्रतिनिधि शामिल हो
- 75 फीसद अटेंडेंस को घटाकर 50 फीसद की जाएं
- हॉस्टल्स की पारदर्शिता के लिए सॉफ्टवेयर सिस्टम लागू हो
- पीयू परिसर में फोर व्हीलर्स बैन किए जाएं
- रीडिंग रूम खोले जाएं
- यूबीएस व अन्य विभागों में बंद कैंटीन खोली जाएं

इन पर होगा काम
- तकनीकी की मदद से ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप करेंगे जो बायोमेट्रिक मशीन से जुड़ा होगा। जैसे ही स्टूडेंट्स हॉस्टल छोड़ेंगे तो उसका संदेश उनके जिम्मेदार लोगों को मिलेगा।
- सिक्योरिटी के लिए गार्ड तैनात किए जाएंगे। इसके लिए बजट की व्यवस्था की जाएगी।
- सीनेट में उठे प्रस्ताव के बाद चांसलर को पीयू खत लिखेगा कि स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष व सचिव को सीनेट का सदस्य बनाया जाए।
-  स्टूडेंट्स के आगे होने वाले आंदोलनों को लेकर तुरंत निर्णय होगा। जरूरत पड़ने पर सिंडिकेट की आपात बैठक भी बुलाई जाएगी।
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