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दिक्कतें ही दिक्कतें: लाइब्रेरी शाम चार बजे ही बंद, खाने के रेट आसमान में, गुणवत्ता का नाम नहीं
Thu, 20 Dec 2018 09:56 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 20 Dec 2018 09:56 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी में गर्ल्स हॉस्टल तक 24 घंटे खुले, लेकिन सेक्टर- 11 के पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज में लाइब्रेरी शाम चार बजे के बाद ही बंद हो जाती है। खास बात यह है कि इस समय एग्जाम चल रहे हैं। लाइब्रेरी के इतनी जल्द बंद होने से स्टूडेंट की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा खाने की गुणवत्ता को लेकर भी स्टूडेंट्स परेशान हैं। उनसे मनमुताबिक रेट भी लिए जा रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी कॉलेज प्रशासन को है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
लड़के और लड़कियों का यह कॉलेज एक समय में दूसरे कॉलेजों के लिए नजीर हुआ करता था, लेकिन आज यहां स्थिति उलट है। यहां समस्याएं ही समस्याएं छात्रों को घेर रही हैं। इस समय एग्जाम चल रहे हैं। लाइब्रेरी का समय कागजों में नौ से छह बजे तक है, लेकिन छात्रों के मुताबिक सुबह दस से चार बजे तक लाइब्रेरी खुल रही है। यही नहीं सिलेबस से जुड़ी किताबें भी यहां कम हैं जबकि अन्य किताबों की भरमार है। इसके कारण स्टूडेंट्स अपने घर ही पढ़ाई कर रहे हैं। यहां की खुली कैंटीन की हालत भी बदतर है।
आरोप है कि यहां एक ही कैंटीन संचालक को कॉलेज प्रशासन चाहता है, उसी को हर साल टेंडर दे रहा है। इसका परिणाम छात्रों का भुगतना पड़ रहा है। खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं है। समोसे व ब्रेड पकोड़े जिस तेल में बनते हैं वही तेल दूसरे खाद्य पदार्थों में प्रयोग हो रहा है जबकि जला हुआ तेल बीमारियों को दावत देता है। रेटलिस्ट लगी है, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है। इसके अलावा वॉशरूम में नलों से पानी टपक रहा है। सफाई भी पूरी तरह नहीं हो पा रही है। पानी की टंकियों की सफाई का भी बुरा हाल है।
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ये भी हैं दिक्कतें
- समय से न मिल रही स्कॉलरशिप।
- अटेंडेंस के नाम पर विद्यार्थियों का हो रहा शोषण।
- स्टूडेंट्स की संख्या के मुताबिक शिक्षक भी नहीं।
- पार्किंग में बाहरी गाड़ियां भी आकर हो रही हैं खड़ी।
- बाहर के स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल में 15 फीसदी सीटें निर्धारित हैं, लेकिन वह नहीं मिलतीं।
- स्टूडेंट्स को अथॉरिटी से मिलने के लिए करना होता है इंतजार।
लाइब्रेरी के खुलने का समय सुबह नौ बजे है और शाम छह बजे तक खुलती है। कैंटीन को बेहतर करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। यह डबल स्टोरी बनेगी। समय समय पर गुणवत्ता की भी जांच की जाती है।
- डॉ. रमा अरोरा, प्राचार्य, पीजीजीसी सेक्टर 11
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लड़के और लड़कियों का यह कॉलेज एक समय में दूसरे कॉलेजों के लिए नजीर हुआ करता था, लेकिन आज यहां स्थिति उलट है। यहां समस्याएं ही समस्याएं छात्रों को घेर रही हैं। इस समय एग्जाम चल रहे हैं। लाइब्रेरी का समय कागजों में नौ से छह बजे तक है, लेकिन छात्रों के मुताबिक सुबह दस से चार बजे तक लाइब्रेरी खुल रही है। यही नहीं सिलेबस से जुड़ी किताबें भी यहां कम हैं जबकि अन्य किताबों की भरमार है। इसके कारण स्टूडेंट्स अपने घर ही पढ़ाई कर रहे हैं। यहां की खुली कैंटीन की हालत भी बदतर है।
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आरोप है कि यहां एक ही कैंटीन संचालक को कॉलेज प्रशासन चाहता है, उसी को हर साल टेंडर दे रहा है। इसका परिणाम छात्रों का भुगतना पड़ रहा है। खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं है। समोसे व ब्रेड पकोड़े जिस तेल में बनते हैं वही तेल दूसरे खाद्य पदार्थों में प्रयोग हो रहा है जबकि जला हुआ तेल बीमारियों को दावत देता है। रेटलिस्ट लगी है, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है। इसके अलावा वॉशरूम में नलों से पानी टपक रहा है। सफाई भी पूरी तरह नहीं हो पा रही है। पानी की टंकियों की सफाई का भी बुरा हाल है।
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ये भी हैं दिक्कतें
- समय से न मिल रही स्कॉलरशिप।
- अटेंडेंस के नाम पर विद्यार्थियों का हो रहा शोषण।
- स्टूडेंट्स की संख्या के मुताबिक शिक्षक भी नहीं।
- पार्किंग में बाहरी गाड़ियां भी आकर हो रही हैं खड़ी।
- बाहर के स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल में 15 फीसदी सीटें निर्धारित हैं, लेकिन वह नहीं मिलतीं।
- स्टूडेंट्स को अथॉरिटी से मिलने के लिए करना होता है इंतजार।
लाइब्रेरी के खुलने का समय सुबह नौ बजे है और शाम छह बजे तक खुलती है। कैंटीन को बेहतर करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। यह डबल स्टोरी बनेगी। समय समय पर गुणवत्ता की भी जांच की जाती है।
- डॉ. रमा अरोरा, प्राचार्य, पीजीजीसी सेक्टर 11