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री-एग्जाम फीस को लेकर पीयू प्रशासन बैकफुट पर, 2000 विद्यार्थी बिना फीस दिए देंगे परीक्षा
Sat, 02 Feb 2019 11:39 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 02 Feb 2019 11:39 AM IST
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छात्रों ने एडमिन ब्लॉक पर किया प्रदर्शन
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री-एग्जाम के लिए बीमार छात्रों से फीस लेने पर पीयू प्रशासन को किरकिरी का सामना करना पड़ा है। इसके विरोध में छात्रों ने एसएफएस के साथ मिलकर एडमिन ब्लॉक पर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया और शुल्क वापस ले लिया, तब जाकर छात्र शांत हुए। इस बार करीब 2000 विद्यार्थी री एग्जाम देंगे, इन्हें किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ेगा। सबसे अहम बात यह है कि री एग्जाम के लिए पहली बार शुल्क लिया जा रहा था। हर साल होने वाले सेमेस्टर एग्जाम में 200 से 300 विद्यार्थी बीमारी के कारण शामिल नहीं हो पाते हैं।
इन विद्यार्थियों का दोबारा एग्जाम कराया जाता है। इसके बदले में कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता। इस बार दिसंबर में हुए एग्जाम में लगभग 2000 विद्यार्थी बीमारी के कारण शामिल नहीं हो पाए। री एग्जाम के लिए विद्यार्थियों ने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किए। बावजू इसके 2500 रुपये से अधिक फीस ले ली गई। यह फीस कुछ विद्यार्थियों ने तो जमा कर दी और कुछ ने विरोध जताया। इसको लेकर एसएफएस ने एडमिन ब्लॉक पर धरना प्रदर्शन किया।
एक बार फीस लेकर दोबारा लेना गलत: कनुप्रिया
काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया ने कहा कि हर साल यह विद्यार्थी री एग्जाम के लिए फीस नहीं देते थे, लेकिन इस बार यूनिवर्सिटी ने इसे कमाई का जरिया बना दिया और छात्रों से फीस वसूलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों ने एक बार फीस जमा कर दी तो फिर दोबारा जमा करने का क्या अर्थ है। विश्वविद्यालय ने फीस को लेकर नोटिस भी जारी नहीं किया और कई बिंदुओं को स्पष्ट करने की कोशिश नहीं की गई। यह छात्रों का शोषण है जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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फीस को लेकर किया जा रहा शोषण: हरमन
छात्र नेता हरमन ने कहा कि यूनिवर्सिटी में छात्रों का फीस आदि को लेकर शोषण किया जा रहा है। हर चीज प्राइवेटाइजेशन की ओर जा रही है। प्राइवेट विश्वविद्यालयों को मोटा फंड दिया जा रहा है। पीयू में भी निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा यहां नहीं होने दिया जाएगा।
...और आखिर में फीस का प्रस्ताव कैंसिल
इस दौरान छात्रों ने नारेबाजी करते हुए धरना दिया। इसके बाद कंट्रोलर परविंदर सिंह, डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बात की। आखिर में फीस का प्रस्ताव कैंसिल कर दिया। उन्होंने कहा कि छात्र एग्जाम दें। फीस की चिंता न करें। उसके बाद विद्यार्थियों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह एकता की जीत है।
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इन विद्यार्थियों का दोबारा एग्जाम कराया जाता है। इसके बदले में कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता। इस बार दिसंबर में हुए एग्जाम में लगभग 2000 विद्यार्थी बीमारी के कारण शामिल नहीं हो पाए। री एग्जाम के लिए विद्यार्थियों ने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किए। बावजू इसके 2500 रुपये से अधिक फीस ले ली गई। यह फीस कुछ विद्यार्थियों ने तो जमा कर दी और कुछ ने विरोध जताया। इसको लेकर एसएफएस ने एडमिन ब्लॉक पर धरना प्रदर्शन किया।
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एक बार फीस लेकर दोबारा लेना गलत: कनुप्रिया
काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया ने कहा कि हर साल यह विद्यार्थी री एग्जाम के लिए फीस नहीं देते थे, लेकिन इस बार यूनिवर्सिटी ने इसे कमाई का जरिया बना दिया और छात्रों से फीस वसूलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों ने एक बार फीस जमा कर दी तो फिर दोबारा जमा करने का क्या अर्थ है। विश्वविद्यालय ने फीस को लेकर नोटिस भी जारी नहीं किया और कई बिंदुओं को स्पष्ट करने की कोशिश नहीं की गई। यह छात्रों का शोषण है जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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फीस को लेकर किया जा रहा शोषण: हरमन
छात्र नेता हरमन ने कहा कि यूनिवर्सिटी में छात्रों का फीस आदि को लेकर शोषण किया जा रहा है। हर चीज प्राइवेटाइजेशन की ओर जा रही है। प्राइवेट विश्वविद्यालयों को मोटा फंड दिया जा रहा है। पीयू में भी निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा यहां नहीं होने दिया जाएगा।
...और आखिर में फीस का प्रस्ताव कैंसिल
इस दौरान छात्रों ने नारेबाजी करते हुए धरना दिया। इसके बाद कंट्रोलर परविंदर सिंह, डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बात की। आखिर में फीस का प्रस्ताव कैंसिल कर दिया। उन्होंने कहा कि छात्र एग्जाम दें। फीस की चिंता न करें। उसके बाद विद्यार्थियों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह एकता की जीत है।