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झटकाः पंजाब यूनिवर्सिटी के 52 प्रोफेसरों को प्रमोशन के लिए दोबारा भरने होंगे आवेदन, नए नियमों से
Mon, 14 Oct 2019 01:24 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 14 Oct 2019 01:24 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी के 52 असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर्स को झटका लगा है। उनको प्रमोशन के लिए अब दोबारा नए नियमों के मुताबिक आवेदन करने होंगे। पुराने नियमों के मुताबिक भरे आवेदन मान्य नहीं होंगे। ऐसे में इन शिक्षकों के प्रमोशन की डेट नए सिरे से जारी होगी। सूत्रों का कहना है कि ऑडिट की आपत्ति के बाद पीयू की इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच अपनी गलती सुधार रही है। इसके लिए जल्द ही आदेश जारी होंगे। यूजीसी की ओर से जुलाई 2018 में शिक्षकों के प्रमोशन के लिए नई गाइड लाइन जारी की गई।
नए नियमों के मुताबिक कैटेगरी वन व टू को सरल बनाया गया। शिक्षकों के पढ़ाने के घंटे से लेकर कई बिंदुओं पर राहत दी गई। कैटेगरी थ्री को कुछ हार्ड किया गया। नियमों में यह भी लिखा गया कि शॉर्टली जो शिक्षक अपना रिसर्च आदि पूरा कर लेते हैं तो उन्हें भी प्रमोशन की लिस्ट में लिया जा सकता है। ऐसे कई शिक्षकों ने आवेदन किए। इस शॉर्टली का अर्थ इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच ने गलत निकाला था। उसी दौरान ऑडिट के पास भी फाइल पहुंची तो उन्होंने आपत्ति लगा दी। उन्होंने नियमों का हवाला दिया।
बताया जाता है कि शिक्षकों को नई गाइड लाइन के मुताबिक प्रमोशन का लाभ दिया जाना चाहिए था और उसी के मुताबिक आवेदन मांगे जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्हें लाभ पुरानी गाइड लाइन के मुताबिक दिए गए। इस प्रकरण को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो अधिकारियों की आंखें खुलीं। सूत्रों का कहना है कि अब इसमें संशोधन होने जा रहा है। इन शिक्षकों से दोबारा आवेदन लिए जाएंगे, साक्षात्कार के अंक पुराने ही मान्य होंगे।
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मालूम हो कि 31 शिक्षकों को पहले लाभ दिया गया था और 20 शिक्षक पिछले माह हुए साक्षात्कार के आधार पर प्रमोशन की लिस्ट में शामिल हुए थे। इन सभी ने यूजीसी की पुरानी गाइड लाइन के मुताबिक आवेदन किए थे। शिक्षकों को कुछ राहत यह मिलेगी कि उनके साक्षात्कार पुराने ही मान्य होंगे। केवल आवेदन दोबारा करना होगा और आगे की प्रक्रिया अन्य विभाग करेंगे। कुछ शिक्षकों को इसका पता चला तो उन्होंने कहा कि इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच व ऑडिट विभाग इसके जिम्मेदार हैं। शिक्षकों को गुमराह किया गया।
शिक्षक नई गाइड लाइन से भी आवेदन कर देते लेकिन इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच ने जब आदेश दे दिए तो फिर उन्हें लाभ दिए जाने चाहिए।
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नए नियमों के मुताबिक कैटेगरी वन व टू को सरल बनाया गया। शिक्षकों के पढ़ाने के घंटे से लेकर कई बिंदुओं पर राहत दी गई। कैटेगरी थ्री को कुछ हार्ड किया गया। नियमों में यह भी लिखा गया कि शॉर्टली जो शिक्षक अपना रिसर्च आदि पूरा कर लेते हैं तो उन्हें भी प्रमोशन की लिस्ट में लिया जा सकता है। ऐसे कई शिक्षकों ने आवेदन किए। इस शॉर्टली का अर्थ इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच ने गलत निकाला था। उसी दौरान ऑडिट के पास भी फाइल पहुंची तो उन्होंने आपत्ति लगा दी। उन्होंने नियमों का हवाला दिया।
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बताया जाता है कि शिक्षकों को नई गाइड लाइन के मुताबिक प्रमोशन का लाभ दिया जाना चाहिए था और उसी के मुताबिक आवेदन मांगे जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्हें लाभ पुरानी गाइड लाइन के मुताबिक दिए गए। इस प्रकरण को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो अधिकारियों की आंखें खुलीं। सूत्रों का कहना है कि अब इसमें संशोधन होने जा रहा है। इन शिक्षकों से दोबारा आवेदन लिए जाएंगे, साक्षात्कार के अंक पुराने ही मान्य होंगे।
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मालूम हो कि 31 शिक्षकों को पहले लाभ दिया गया था और 20 शिक्षक पिछले माह हुए साक्षात्कार के आधार पर प्रमोशन की लिस्ट में शामिल हुए थे। इन सभी ने यूजीसी की पुरानी गाइड लाइन के मुताबिक आवेदन किए थे। शिक्षकों को कुछ राहत यह मिलेगी कि उनके साक्षात्कार पुराने ही मान्य होंगे। केवल आवेदन दोबारा करना होगा और आगे की प्रक्रिया अन्य विभाग करेंगे। कुछ शिक्षकों को इसका पता चला तो उन्होंने कहा कि इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच व ऑडिट विभाग इसके जिम्मेदार हैं। शिक्षकों को गुमराह किया गया।
शिक्षक नई गाइड लाइन से भी आवेदन कर देते लेकिन इस्टेब्लिसमेंट ब्रांच ने जब आदेश दे दिए तो फिर उन्हें लाभ दिए जाने चाहिए।