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एक बड़े मुद्दे पर दोफाड़ हुई पीयू सिंडिकेट, कई मसलों पर बनी सहमति

Mon, 24 Jul 2017 01:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 24 Jul 2017 01:35 PM IST
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punjab universiry syndicate meeting
Punjab University VC Arun Grover Press conference
पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट रविवार को एक बड़े मुद्दे पर दोफाड़ हो गई। वहीं कई मसलों पर जमकर बवाल हुआ और कई पर सहमति बनी। पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के मुद्दे पर सिंडिकेट मेंबरों ने कड़ी आपत्ति जताई। इसी कारण अभी पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने में समय लगेगा। वहीं सिंडिकेट की मीटिंग में छात्रों के हित को लेकर अहम फैसला हुआ कि एडमिशन की तारीख बढ़ा दी गई है। वहीं पीयू के डॉक्टर्स को 65 वर्ष तक नौकरी करने का मौका मिलेगा।
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पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने के मामले पर सिंडीकेट मेंबर ने कड़ा एतराज जताया। पंजाब यूनिवर्सिटी को इसलिए केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने से मना किया, क्योंकि सीनेट और सिंडीकेट के अधिकार खत्म हो जाएंगे। वहीं लोगों के अधिकार संरक्षित नहीं रहेंगे। इस पर सहमति न बनने के कारण इस पर चर्चा अगले सिंडीकेट की बैठक में किए जाने पर सहमति बनी है। इस तरह पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी मिलने का मुद्दा टल गया है। सिंडीकेट मेंबर्स ने एतराज जताते हुए कहा है कि उत्तराखंड की यूनिवर्सिटी को दर्जा भले दे दिया हो लेकिन हालात में सुधार नहीं है।
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इसलिए पीयू के अस्तित्व को खतरा न हो, इसलिए इसे केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं होना चाहिए। हालांकि कुछ मेंबरों ने इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने पर स्वीकृति देने की मांग भी की। सिंडिकेट मेंबर्स ने कहा कि पहले जिन यूनिवर्सिटी को केंद्रीय दर्जा दिया गया है। उनकी स्टडी कराई जाए। उनके वित्तीय हालात और इन्फ्रास्ट्रक्चर की जांच की जाए। इसके बाद इस पर विचार किया जाए। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से  रविवार को हुई सिंडिकेट की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई। इसमें  खाली सीटों की एडमिशन की डेट, एमबीए इंस्टीट्यूट की अनुमति सहित कई मुद्दे पास किए गए हैं। 
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एडमिशन की डेट बढ़ाई 

punjab universiry syndicate meeting
Punjab University VC Arun Grover Press conference
पीयू अंडर ग्रेजुशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की सीटें न भरे जाने के कारण सिंडिकेट की बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब यूनिवर्सिटी की ओर से पांच अगस्त तक एडमिशन के लिए अप्लाई किया जा सकता है। इस पर कोई विलंब शुल्क नहीं लगेगा। वहीं 17 अगस्त तक प्रिंसिपल को विलंब शुल्क के साथ खाली सीटों पर एडमिशन मिलेगा। 17 से 31 अगस्त तक वाइस चांसलर की सहमति पर खाली सीटों पर दाखिला दिया जाएगा। पंजाब यूनिवर्सिटी में सीटें खाली होने के बाद यह एजेंडा सिंडिकेट की मीटिंग में पास किया गया है।

एनआरआई कोटे के पुराने रूल लगाए
 पीयू की ओर से एनआरआई सीट पर एक भी दाखिला न होने पर नियम में बदलाव किया गया है। इसमें एनआरआई के 2016- 17 के बनाए नियम लागू किए गए। इसमें बदलाव के बाद 2017- 18 में एक भी दाखिला पीयू में किसी भी सीट पर नहीं हुआ है। इसी कारण इसमें बदलाव कर दिया गया। अब ये सीटें आसानी से एनआरआई कोटे की भरी जा सकेंगी। इसमें इस सत्र में दाखिला नहीं होने के कारण ये नियम बनाए हैं। 

कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट नया किया 
 सिंडिकेट की मीटिंग में टीचिंग एवं नॉन टीचिंग स्टाफ में तैनात कर्मचारियों को वार्षिक नवीकरण के आधार पर काम करने वाले शिक्षकाें की नियुक्ति को मंजूरी दी। विस्तृत चर्चा के बाद सिंडिकेट की ओर से  सेक्टर -10 स्थित डीएवी कॉलेज को एमबीए कोर्स की 60 सीटों के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की स्वीकृति दी गई। सिंडीकेट की ओर से मीटिंग में पीयू के डॉक्टर्स की सेवा 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी जाएगी। यह नियम केंद्र सरकार के मानकों के आधार पर किए गए हैं।
 

दोबारा फीस नहीं भरनी होगी

punjab universiry syndicate meeting
punjab university
सिंडिकेट की ओर से बैठक में नियुक्ति मामले पर फैसला लिया गया कि 40 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसमें जिन्होंने पहले आवेदन किया है, उन्हें दोबारा फीस नहीं भरनी होगी। इसमें नए आवेदकों से फीस ली जाएगी। पुराने आवेदकों को रजिस्ट्रेशन केवल दोबारा कराना होगा। उनसे इस मामले की कोई फीस नहीं ली जाएगी।

डोनेशन से वेलफेयर और रिसर्च 
 सिडिंकेट की मीटिंग में यह भी पास हुआ है कि पीयू को जो फंड डोनेशन से आएगा। उसका इस्तेमाल स्टूडेंट्स वेलफेयर और रिसर्च के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस फंड का उपयोग विश्वविद्यालय की विरासत संरक्षण में भी लगाया जाएगा।

सशर्त माफी दिए जाने के मुद्दे पर चर्चा 
संगीत विभाग की डॉ. नीलम पॉल की नौकरी बहाली के लिए सशर्त माफी दिए जाने के मुद्दे पर सिंडिकेट में चर्चा हुई। इसमें फैसला हुआ कि वह पीयू के वीसी प्रोफेसर अरुण ग्रोवर से लिखित माफी मांगे। माफी मांगने के बाद वह प्रमोशन के लिए अप्लाई कर सकती हैं। वहीं पीयू के डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पंजाब सर्विस रूल लागू करने की मांग की है। इसको सिंडिकेट की मीटिंग में नकार दिया गया है। सिंडिकेट ने कहा कि यह रूल पंजाब यूनिवर्सिटी के अंदर नहीं है। इसलिए इसे नहीं माना जाएगा। 
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