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जो कुछ भी हो रहा वह पंजाब यूनिवर्सिटी के हित में नहीं है: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 May 2018 12:00 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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पीयू में सीनेट और सिंडीकेट की व्यवस्था को लेकर वीसी के हलफनामे को रजिस्ट्रार द्वारा वापस लेने की अर्जी देने पर हाईकोर्ट ने कहा कि जो कुछ हो रहा है वह दुखद है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यह सब देखकर हम बहुत दुखी हैं। हालांकि रजिस्ट्रार द्वारा दाखिल की गई अर्जी पर उन्होंने केंद्र व पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
पिछली सुनवाई पर यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्थाओं सीनेट और सिंडिकेट के ढांचे और इसके सदस्यों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वीसी ने हलफनामा दाखिल किया था और इसमें संशोधन की अपील की थी। लेकिन अब पीयू की सीनेट के आदेश पर रजिस्ट्रार ने अर्जी दाखिल करते हुए वीसी के हलफनामे को वापस लेने की हाईकोर्ट से इजाजत मांगी है।
हालांकि सुनवाई के दौरान वीसी ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर यह हलफनामा वापस नहीं लेंगे। वह पीयू स्टेक होल्डर्स में से एक हैं और ऐसे में अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं। सीनेट-सिंडिकेट पर उनकी राय से पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन भी सहमत है। एक और हलफनामा दाखिल करते हुए वीसी ने कहा कि सीनेट और सिंडिकेट को लेकर जो हलफनामा पहले दाखिल किया गया था वह उनकी अपनी राय है। इन दोनों ही हलफनामों पर कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से जवाब मांगा है।
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पीयू को वे चला रहे जिनका कोई लेना देना नहीं: वीसी
हाईकोर्ट ने कहा कि पीयू में हो रही गतिविधियों से वह बेहद आहत हैं। जो कुछ हो रहा है वह पीयू के हित में नहीं है। इस दौरान वीसी ने कहा कि यूनिवर्सिटी बिना शिक्षकों के कुछ भी नहीं है। लेकिन अब यूनिवर्सिटी उन लोगों द्वारा चलाई जा रही है जिनका पीयू से कुछ लेना-देना ही नहीं है। कोर्ट से बाहर आकर वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म्स का जो मुद्दा उठाया है चाहे उन पर कितना भी दबाव हो वह इसे अंजाम तक लेकर जाएंगे।
वह दो महीने बाद रिटायर हो रहे हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी एक आम इंसान की तरह इस केस से जुड़े रहेंगे। इस मामले को लेकर वह हाईकोर्ट नहीं आए थे बल्कि हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर उन्हें बुलाया था। वहीं सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके आदेशों के अनुरूप सरकार ने पीयू को 6 करोड़ 50 लाख रुपये ग्रांट के तौर पर जारी कर दिए हैं।
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पिछली सुनवाई पर यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्थाओं सीनेट और सिंडिकेट के ढांचे और इसके सदस्यों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वीसी ने हलफनामा दाखिल किया था और इसमें संशोधन की अपील की थी। लेकिन अब पीयू की सीनेट के आदेश पर रजिस्ट्रार ने अर्जी दाखिल करते हुए वीसी के हलफनामे को वापस लेने की हाईकोर्ट से इजाजत मांगी है।
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हालांकि सुनवाई के दौरान वीसी ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर यह हलफनामा वापस नहीं लेंगे। वह पीयू स्टेक होल्डर्स में से एक हैं और ऐसे में अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं। सीनेट-सिंडिकेट पर उनकी राय से पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन भी सहमत है। एक और हलफनामा दाखिल करते हुए वीसी ने कहा कि सीनेट और सिंडिकेट को लेकर जो हलफनामा पहले दाखिल किया गया था वह उनकी अपनी राय है। इन दोनों ही हलफनामों पर कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से जवाब मांगा है।
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पीयू को वे चला रहे जिनका कोई लेना देना नहीं: वीसी
हाईकोर्ट ने कहा कि पीयू में हो रही गतिविधियों से वह बेहद आहत हैं। जो कुछ हो रहा है वह पीयू के हित में नहीं है। इस दौरान वीसी ने कहा कि यूनिवर्सिटी बिना शिक्षकों के कुछ भी नहीं है। लेकिन अब यूनिवर्सिटी उन लोगों द्वारा चलाई जा रही है जिनका पीयू से कुछ लेना-देना ही नहीं है। कोर्ट से बाहर आकर वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म्स का जो मुद्दा उठाया है चाहे उन पर कितना भी दबाव हो वह इसे अंजाम तक लेकर जाएंगे।
वह दो महीने बाद रिटायर हो रहे हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी एक आम इंसान की तरह इस केस से जुड़े रहेंगे। इस मामले को लेकर वह हाईकोर्ट नहीं आए थे बल्कि हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर उन्हें बुलाया था। वहीं सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके आदेशों के अनुरूप सरकार ने पीयू को 6 करोड़ 50 लाख रुपये ग्रांट के तौर पर जारी कर दिए हैं।