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पेरेंट्स को हाईकोर्ट ने दिया झटका, संत कबीर स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया रुकी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 16 Feb 2018 10:18 AM IST
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चंडीगढ़ में सेक्टर 26 स्थित संत करीब पब्लिक स्कूल में एडमिशन प्रक्रिया में गंभीर खामियां बताते हुए हाईकोर्ट ने ड्रा के द्वारा होने वाले नामांकन पर फिलहाल रोक लगा दी है। 4 साल के बच्चे अर्जुन सिसौदिया द्वारा दाखिल की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने यह रोक लगाई। याचिका दाखिल करते हुए अर्जुन ने अपने पिता के माध्यम से कोर्ट को बताया कि संत कबीर स्कूल ने 1 दिसंबर 2017 को 2018-19 के एडमिशन के लिए नोटिस जारी किया था।
8 दिसंबर को याची ने इसके लिए आवेदन किया था और 15 जनवरी को ड्रा निकाला जाना था। आरोप हैं कि ड्रा शुरू होते ही अनियमितताओं का दौर भी आरंभ हो गया। हाईकोर्ट को बताया गया कि कुल 90 सीटों में से 50 से अधिक आरक्षित हो गई, जो कुल सीटों का 50 प्रतिशत से अधिक है। ऐसा होना न केवल एडमिशन पॉलिसी के खिलाफ है बल्कि भारत सरकार द्वारा तय मानकों के भी विपरीत है। पारदर्शिता का अभाव रहा।
इसके चलते पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। याची ने बताया सबसे पहले सिविल कैटगरी में 31 सीटों के लिए ड्रा निकाला गया। इसके बाद एलुमनि कैटगरी में 10 सीटों के लिए ड्रा निकाला गया। सिख माइनॉरिटी की 18 सीटों को तोड़कर 14 और 4 कर दिया गया। 14 सिख माइनॉरिटी के लिए 44 आवेदन थे। इन आवेदनों में से 14 को छांट कर बाकी केबचे तीस को फिर से मुख्य ड्रा में शामिल कर लिया गया।
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याची ने कहा कि अब सामान्य श्रेणी में बची सीटों पर आरक्षण कोटा में विफल आवेदकों को भी शामिल किया जा रहा है जो सही नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए याचिका पर यूटी प्रशासन, स्कूल प्रबंधन, डीपीआई व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही ड्रा ऑफ लॉट्स पर भी अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
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8 दिसंबर को याची ने इसके लिए आवेदन किया था और 15 जनवरी को ड्रा निकाला जाना था। आरोप हैं कि ड्रा शुरू होते ही अनियमितताओं का दौर भी आरंभ हो गया। हाईकोर्ट को बताया गया कि कुल 90 सीटों में से 50 से अधिक आरक्षित हो गई, जो कुल सीटों का 50 प्रतिशत से अधिक है। ऐसा होना न केवल एडमिशन पॉलिसी के खिलाफ है बल्कि भारत सरकार द्वारा तय मानकों के भी विपरीत है। पारदर्शिता का अभाव रहा।
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इसके चलते पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। याची ने बताया सबसे पहले सिविल कैटगरी में 31 सीटों के लिए ड्रा निकाला गया। इसके बाद एलुमनि कैटगरी में 10 सीटों के लिए ड्रा निकाला गया। सिख माइनॉरिटी की 18 सीटों को तोड़कर 14 और 4 कर दिया गया। 14 सिख माइनॉरिटी के लिए 44 आवेदन थे। इन आवेदनों में से 14 को छांट कर बाकी केबचे तीस को फिर से मुख्य ड्रा में शामिल कर लिया गया।
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याची ने कहा कि अब सामान्य श्रेणी में बची सीटों पर आरक्षण कोटा में विफल आवेदकों को भी शामिल किया जा रहा है जो सही नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए याचिका पर यूटी प्रशासन, स्कूल प्रबंधन, डीपीआई व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही ड्रा ऑफ लॉट्स पर भी अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।