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पंजाब यूनिवर्सिटी गवर्नेंस रिफॉर्म पर अब हाईकोर्ट करेगी सुनवाई, 23 जुलाई को पेश होगा मसौदा
Thu, 09 May 2019 12:58 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 09 May 2019 12:58 PM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब यूनिवर्सिटी की बदहाल वित्तीय स्थिति के मामले में बुधवार को पीयू के पूर्व वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने गवर्नेंस रिफॉर्म की मांग की। इस मांग पर चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने केंद्र से जवाब मांग लिया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा कि यूनिवर्सिटी की वित्तीय स्थिति के लिए केंद्र ने पीयू को 207.80 करोड़ ग्रांट तय कर दी है जिसमे हर वर्ष 6 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होगी।
पीयू के गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए या तो पीयू प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजे या हाईकोर्ट केंद्र को निर्देश दे। जैन ने कहा कि पीयू प्रस्ताव नहीं भेजेगा क्योंकि यह प्रो. ग्रोवर की मांग है। ऐसे में ग्रोवर अपनी इस मांग को हाईकोर्ट के रिकॉर्ड पर लाएं जिस पर हाईकोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश जारी करे। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील पर गवर्नेंस रिफॉर्म का पूरा मसौदा 23 जुलाई को पेश करने के आदेश दे दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि इसके अनुरूप केंद्र को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही केंद्र ने बताया कि पीयू शिक्षकों के पे स्केल रिवीजन पंजाब सरकार द्वारा पे स्केल की रिवीजन की नोटिफिकेशन के बाद ही की जा सकती है। केंद्र ने कहा कि पीयू का स्टेटस इंटर-स्टेट बॉडी कॉरपोरेट का है और ऐसे में पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी मान उनके बराबर ग्रांट नहीं दी जा सकती।
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सीनेट और सिंडीकेट के ढांचे पर उठे थे सवाल
प्रो. ग्रोवर ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर पीयू के सीनेट और सिंडीकेट के ढांचे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मौजूदा ढांचे के चलते एकेडमिक्स की बजाय अब सीनेट और सिंडीकेट के सदस्य बने रहने का ही खेल चल रहा है। यह वर्ष 1904 की व्यवस्था तब से चली आ रही है।
लिहाजा अब समय आ गया है कि पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म की जाए। हलफनामे के बाद पीयू की सीनेट और सिंडीकेट ने वीसी के सभी अधिकार वापस लेने तक का प्रस्ताव पारित कर दिया था और हाईकोर्ट में दिए इस हलफनामे को वापस लिए जाने का फैसला सुना दिया था। लेकिन ग्रोवर ने हलफनामे को वापस लेने से इंकार कर दिया था।
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पीयू के गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए या तो पीयू प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजे या हाईकोर्ट केंद्र को निर्देश दे। जैन ने कहा कि पीयू प्रस्ताव नहीं भेजेगा क्योंकि यह प्रो. ग्रोवर की मांग है। ऐसे में ग्रोवर अपनी इस मांग को हाईकोर्ट के रिकॉर्ड पर लाएं जिस पर हाईकोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश जारी करे। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील पर गवर्नेंस रिफॉर्म का पूरा मसौदा 23 जुलाई को पेश करने के आदेश दे दिए हैं।
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कोर्ट ने कहा कि इसके अनुरूप केंद्र को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही केंद्र ने बताया कि पीयू शिक्षकों के पे स्केल रिवीजन पंजाब सरकार द्वारा पे स्केल की रिवीजन की नोटिफिकेशन के बाद ही की जा सकती है। केंद्र ने कहा कि पीयू का स्टेटस इंटर-स्टेट बॉडी कॉरपोरेट का है और ऐसे में पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी मान उनके बराबर ग्रांट नहीं दी जा सकती।
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सीनेट और सिंडीकेट के ढांचे पर उठे थे सवाल
प्रो. ग्रोवर ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर पीयू के सीनेट और सिंडीकेट के ढांचे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मौजूदा ढांचे के चलते एकेडमिक्स की बजाय अब सीनेट और सिंडीकेट के सदस्य बने रहने का ही खेल चल रहा है। यह वर्ष 1904 की व्यवस्था तब से चली आ रही है।
लिहाजा अब समय आ गया है कि पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म की जाए। हलफनामे के बाद पीयू की सीनेट और सिंडीकेट ने वीसी के सभी अधिकार वापस लेने तक का प्रस्ताव पारित कर दिया था और हाईकोर्ट में दिए इस हलफनामे को वापस लिए जाने का फैसला सुना दिया था। लेकिन ग्रोवर ने हलफनामे को वापस लेने से इंकार कर दिया था।