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जीएमसीएच32 में पीजी कोर्स में चंडीगढ़ पूल के 32 दाखिले रद्द, संविधान के खिलाफ बताया आरक्षण
Wed, 24 Apr 2019 02:27 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Apr 2019 02:27 PM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर-32 के पीजी में दाखिले के लिए बनाए चंडीगढ़ पूल को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस पूल की 32 सीटों पर अब नीट परीक्षा के तहत मेरिट पर दाखिले करने के आदेश जीएमसीएच को दिए हैं। इस फैसले से चंडीगढ़ पूल पर अब तक किए गए सभी 32 दाखिले भी रद्द हो गए हैं। चंडीगढ़ पूल को चुनौती देते हुए दाखिल दो याचिकाओं का निपटारा करते हुए हार्ठकोर्ट ने ये आदेश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने जीएमसीएच में पीजी कोर्स (एमडी और एमएस) में चंडीगढ़ पूल की सीटों पर दाखिले के लिए जो शर्तें तय की हैं, वे तथ्यों और नियमों के विपरीत हैं। कोर्ट ने कहा कि डॉः प्रदीप जैन और सौरभ चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर चुका है कि टेक्निकल और मेडिकल एजुकेशन में इस तरह का आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कॉलेज पहले ही इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस पूल के लिए 32 सीटों को आरक्षित कर चुका है तो कैसे अलग से चंडीगढ़ पूल की सीटें तय कर दी गईं।
इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस पूल की 32 सीटों के अलावा बाकी बची 32 सीटों पर दाखिले के लिए पांच साल चंडीगढ़ में रहने की शर्त को जायज नहीं ठहराया जा सकता। इसके चलते दोनों ही कोटे में चंडीगढ़ के छात्रों को ही दाखिला मिलेगा और राज्य के बाहर के अन्य आवेदक दाखिले से वंचित रह जाएंगे। यह संविधान के अनुच्छेद-14 का सीधा उल्लंघन हुआ है, जिसमे प्रत्येक नागरिक को समान अवसर दिए जाने का अधिकार दिया गया है। इससे राज्य के बाहर के आवेदक जो ज्यादा मेरिट पर हैं, उनकी जगह चंडीगढ़ के छात्रों को तरजीह दे दी जाएगी।
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इससे साफ है कि इस आरक्षण से मेरिट की अनदेखी होगी जो सही नहीं है। जब ये याचिकाएं दायर की गई थीं, तभी हाईकोर्ट ने साफ कर दिया था कि इस पूल में किए दाखिले हाईकोर्ट द्वारा इन याचिकाओं पर सुनाए जाने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने जीएमसीएच में पीजी कोर्स (एमडी और एमएस) में चंडीगढ़ पूल की सीटों पर दाखिले के लिए जो शर्तें तय की हैं, वे तथ्यों और नियमों के विपरीत हैं। कोर्ट ने कहा कि डॉः प्रदीप जैन और सौरभ चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर चुका है कि टेक्निकल और मेडिकल एजुकेशन में इस तरह का आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कॉलेज पहले ही इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस पूल के लिए 32 सीटों को आरक्षित कर चुका है तो कैसे अलग से चंडीगढ़ पूल की सीटें तय कर दी गईं।
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इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस पूल की 32 सीटों के अलावा बाकी बची 32 सीटों पर दाखिले के लिए पांच साल चंडीगढ़ में रहने की शर्त को जायज नहीं ठहराया जा सकता। इसके चलते दोनों ही कोटे में चंडीगढ़ के छात्रों को ही दाखिला मिलेगा और राज्य के बाहर के अन्य आवेदक दाखिले से वंचित रह जाएंगे। यह संविधान के अनुच्छेद-14 का सीधा उल्लंघन हुआ है, जिसमे प्रत्येक नागरिक को समान अवसर दिए जाने का अधिकार दिया गया है। इससे राज्य के बाहर के आवेदक जो ज्यादा मेरिट पर हैं, उनकी जगह चंडीगढ़ के छात्रों को तरजीह दे दी जाएगी।
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इससे साफ है कि इस आरक्षण से मेरिट की अनदेखी होगी जो सही नहीं है। जब ये याचिकाएं दायर की गई थीं, तभी हाईकोर्ट ने साफ कर दिया था कि इस पूल में किए दाखिले हाईकोर्ट द्वारा इन याचिकाओं पर सुनाए जाने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे।