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खुशखबरीः चंडीगढ़ के सेंट कबीर स्कूल में अब ले सकते हैं दाखिला, हाईकोर्ट से मिल गई बड़ी राहत
Thu, 27 Jun 2019 09:55 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 27 Jun 2019 09:55 AM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सेंट कबीर स्कूल को बड़ी राहत देते हुए खाली पड़ी 25 प्रतिशत सीटों को सत्र 2019-20 के लिए भरने की अनुमति दे दी है। इससे पहले स्कूल ने माइनॉरिटी स्टेटस बताते हुए 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत आर्थिक पिछड़ा वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में केस लंबित होने के चलते इन सीटों को रिक्त रखा गया था।
चंडीगढ़ शिक्षा निदेशक ने याचिका दाखिल कर बताया था कि 1988 में पहली बार कबीर एजुकेशन सोसाइटी ने एस्टेट ऑफिस में अर्जी देकर स्कूल चलाने के लिए जमीन मांगी थी। एस्टेट ऑफिस ने अक्तूबर 1988 में सोसाइटी को सेक्टर-26 में इसके लिए 20077 वर्ग फीट जमीन 99 वर्ष के लिए लीज पर दे दी थी।
उसी समय तय किया गया था कि स्कूल पर डीपीआई चंडीगढ़ द्वारा जारी निर्देश लागू होंगे। वर्ष 1996 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी स्कूलों को 15 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला देने के निर्देश दिए थे। सितंबर 2009 में केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस देने का अधिकार राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश को सौंप दिया था।
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स्कूल माइनॉरिटी स्टेटस के लिए इनसे ही एनओसी लेने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2009 में शिक्षा के अधिकार लागू होने के बाद इस फैसले को कई स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।
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चंडीगढ़ शिक्षा निदेशक ने याचिका दाखिल कर बताया था कि 1988 में पहली बार कबीर एजुकेशन सोसाइटी ने एस्टेट ऑफिस में अर्जी देकर स्कूल चलाने के लिए जमीन मांगी थी। एस्टेट ऑफिस ने अक्तूबर 1988 में सोसाइटी को सेक्टर-26 में इसके लिए 20077 वर्ग फीट जमीन 99 वर्ष के लिए लीज पर दे दी थी।
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उसी समय तय किया गया था कि स्कूल पर डीपीआई चंडीगढ़ द्वारा जारी निर्देश लागू होंगे। वर्ष 1996 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी स्कूलों को 15 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला देने के निर्देश दिए थे। सितंबर 2009 में केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस देने का अधिकार राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश को सौंप दिया था।
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स्कूल माइनॉरिटी स्टेटस के लिए इनसे ही एनओसी लेने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2009 में शिक्षा के अधिकार लागू होने के बाद इस फैसले को कई स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।
वर्ष 2012 में सेंट कबीर स्कूल ने चंडीगढ़ प्रशासन को बाइपास कर सीधे नेशनल माइनॉरिटी कमीशन के समक्ष अर्जी दे स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस दिए जाने की मांग की। प्रावधान के अनुसार इसके लिए स्कूल को प्रशासन से एनओसी अनिवार्य थी। कमिश्नर ने भी प्रावधानों का उल्लंघन किया और वर्ष 2014 में स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस दे दिया।
अगस्त 2015 में प्रशासन ने सेंट कबीर स्कूल को कई बार निर्देश देते हुए जमीन की अलॉटमेंट की शर्तों के तहत आदेशों को लागू करने के लिए कहा, परंतु स्कूल ने कहा कि वो माइनॉरिटी संस्थान है उस पर नियम लागू नहीं होते हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासन की याचिका पर सुनवाई करते हुए माइनॉरिटी स्टेटस पर रोक लगा दी थी।
विवेक हाईस्कूल की तर्ज पर मांगी थी मंजूरी
इसके बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से अर्जी दाखिल करते हुए इस शिक्षण सत्र में आरटीई के तहत भरी जाने वाली सीटों को स्कूल प्रबंधन के तहत भरे जाने की अनुमति मांगी। विवेक हाई स्कूल का हवाला देते हुए इसकी अनुमति मांगी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षण संस्थान केलिए लंबे समय तक सीटें खाली रखना वित्त व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।
ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका लंबित रहते फिलहाल इस शिक्षण सत्र में 25 प्रतिशत सीटों को भरने की अनुमति दे दी है।
अगस्त 2015 में प्रशासन ने सेंट कबीर स्कूल को कई बार निर्देश देते हुए जमीन की अलॉटमेंट की शर्तों के तहत आदेशों को लागू करने के लिए कहा, परंतु स्कूल ने कहा कि वो माइनॉरिटी संस्थान है उस पर नियम लागू नहीं होते हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासन की याचिका पर सुनवाई करते हुए माइनॉरिटी स्टेटस पर रोक लगा दी थी।
विवेक हाईस्कूल की तर्ज पर मांगी थी मंजूरी
इसके बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से अर्जी दाखिल करते हुए इस शिक्षण सत्र में आरटीई के तहत भरी जाने वाली सीटों को स्कूल प्रबंधन के तहत भरे जाने की अनुमति मांगी। विवेक हाई स्कूल का हवाला देते हुए इसकी अनुमति मांगी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षण संस्थान केलिए लंबे समय तक सीटें खाली रखना वित्त व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।
ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका लंबित रहते फिलहाल इस शिक्षण सत्र में 25 प्रतिशत सीटों को भरने की अनुमति दे दी है।