‘पीयू को 44 करोड़ दिसंबर अंत तक जारी करे यूजीसी’
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पंजाब यूनविर्सिटी की खस्ता वित्तीय हालत के चलते इसके बंद होने के कुलपति केबयान को आधार बनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से लिए गए संज्ञान के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इस माह के अंत तक 44 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी करने के आदेश दिए हैं।
सोमवार को हाईकोर्ट को बताया गया कि कोर्ट के आदेशों के अनुरूप एमएचआरडी सचिव, यूजीसी चेयरमैन और वीसी के बीच बैठक हुई थी। इसमें पीयू की लंबित ग्रांट जारी करने पर सहमति बन गई है।
बैठक में चर्चा का मुद्दा बने विषयों के बारे में जानकारी देते हुए कोर्ट को बताया गया कि पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी की तर्ज पर टीचिंग व नॉन टीचिंग का अनुपात 1:1 रखने के लिए कहा गया है।
इसके लिए पांच वर्ष का समय दिया गया है। इसकेसाथ ही पीयू को आय को बढ़ाने के लिए बनाई गई योजना की जानकारी भी सौंपने के लिए कहा गया है ताकि इससे यह देखा जा सके की कैसे पीयू के घाटे को पूरा किया जा सकता है।
इसके तहत फीस, डेवलेपमेंट चार्जिस, कंसल्टेंसी, एकेडमिक प्रोजेक्ट्स, एफिलिएशन फीस में बढ़ोतरी आदि विकल्पों पर विचार कर इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके आधार पर इस बार और भविष्य में मिलने वाली ग्रांट को बढ़ाकर घाटा पूरा करने पर विचार होगा।
इस दौरान यह भी कहा गया कि पंजाब सरकार की भूमिका भी इस मामले में अहम है और ऐसे में उनसे ग्रांट की राशि को बढ़ाने का अनुरोध किया जाएगा।
पीयू के दर्जे को लेकर हुई चर्चा रहा अहम पहलू
बैठक में इस पर भी चर्चा की गई है कि पीयू की ओर से भविष्य में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के कोई भी नए पद सृजित कर बिना केंद्र की अनुमति नियुक्ति न करे। किसी भी स्थिति में रिक्त पदों को चाहे किसी भी प्रकार भरना हो, इसके लिए पूर्व में केंद्र की अनुमति ली जाए।
इसके साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही केंद्र की ओर से ग्रांट बढ़ाने पर घाटा पूरा होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उस स्थिति में ग्रांट बढ़ने के बावजूद भी पीयू घाटे में बनी रहेगी।
सबसे अहम पहलू पीयू के दर्जे को लेकर हुई चर्चा रहा। इस दौरान यह निर्धारित हुआ कि पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं मिल रहा है और इसका इंटर स्टेट बॉडी कॉर्पोरेट का दर्जा बरकरार रहेगा।
इस दौरान कुलपति ने हाईकोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जो मुद्दे चर्चा में शामिल नहीं थे, उन्हें भी इस रिपोर्ट के माध्यम से बैठक का हिस्सा बताया जा रहा है।
टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ का अनुपात विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई फिर भी यह बैठक का हिस्सा बनाकर पेश किया जा रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट सही नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस पर जवाब देने के लिए सुनवाई 19 जनवरी तक स्थगित कर दी है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्य पाल जैन ने कहा कि अगर कुलपति प्रो. ग्रोवर को इस पर आपत्ति है तो वे अपनी आपत्ति लिखित में दर्ज करवा दें ताकि आपत्ति को केंद्र सरकार के पास भेजा जा सके।