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उद्योगों से कमाई करेगा पीयू, छात्रों को मिलेगा रोजगार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Apr 2017 09:26 AM IST
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Panjab University
- फोटो : amar ujala
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पंजाब यूनिवर्सिटी अब एक खास प्रोजेक्ट के तहत न केवल औद्योगिक इकाइयों से कमाई करेगी, बल्कि इसके जरिए पीयू के छात्रों के लिए भी रोजगार के कई अवसर भी पैदा करेगी। इसका लाभ पीयू के विद्यार्थियों को मिलेगा। इसमें यूएस की फ्लोरिडा पालीटेक्निक यूनिवर्सिटी भी पीयू को पूरा सहयोग करेगी। दूसरा फ्लोरिडा और पीयू के छात्र और फैकल्टी का रिसर्च उद्देश्य से एक-दूसरे विश्वविद्यालयों में आदान-प्रदान भी हो सकेगा।
इस संबंधी पंजाब यूनिवर्सिटी और फ्लोरिडा पालीटेक्निक यूनिवर्सिटी बीच एमओयू भी साइन हुआ है। इस अनुबंध के तहत दोनों विश्वविद्यालय अब इंडस्ट्री स्पोंसर रिसर्च पर काम करेंगे। यह रिसर्च न केवल छात्रों और फैकल्टी को बूस्ट अप करेगी, बल्कि इंडस्ट्रीज को दोनों विश्वविद्यालयों से भी जोड़ेगी। इससे उद्योगाें की समस्याओं का भी समाधान होगा और छात्रों को रोजगार भी मिलेगा। साथ ही फ्लोरिडा के छात्र व फैकल्टी रिसर्च के लिए पीयू आ सकेंगे और पीयू के छात्र व फैकल्टी शोध कार्य के लिए फ्लोरिडा जा सकेंगे।
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इस संबंधी पंजाब यूनिवर्सिटी और फ्लोरिडा पालीटेक्निक यूनिवर्सिटी बीच एमओयू भी साइन हुआ है। इस अनुबंध के तहत दोनों विश्वविद्यालय अब इंडस्ट्री स्पोंसर रिसर्च पर काम करेंगे। यह रिसर्च न केवल छात्रों और फैकल्टी को बूस्ट अप करेगी, बल्कि इंडस्ट्रीज को दोनों विश्वविद्यालयों से भी जोड़ेगी। इससे उद्योगाें की समस्याओं का भी समाधान होगा और छात्रों को रोजगार भी मिलेगा। साथ ही फ्लोरिडा के छात्र व फैकल्टी रिसर्च के लिए पीयू आ सकेंगे और पीयू के छात्र व फैकल्टी शोध कार्य के लिए फ्लोरिडा जा सकेंगे।
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इस तरह मिलेगा शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों को फायदा
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़।
- फोटो : डेमो फोटो
इस तरह मिलेगा शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों को फायदा
विशेषज्ञ साइंटिस्ट डा. जसप्रीत सिंह दाऊ और फ्लोरिडा पालीटेक्निक यूनिवर्सिटी के एसोसिएट डायरेक्टर मुस्तफा एकहॉबेंस ने बताया कि इंडस्ट्री स्पोंसर रिसर्च में कई तरह के ऐसे इको फ्रेंडली शोध होंगे, जो उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होंगे और विश्वविद्यालयों व छात्रों के लिए भी। आज उद्योगों पर सबसे बड़ी चुनौती है अपनी इंडस्ट्री के लिए पर्यावरण विभाग से एनओसी लेना।
कई उद्योगों के लिए तो इसी चक्कर में फंसकर यूनिट बंद करने की नौबत आ जाती है, क्योंकि उद्योगों के पास अपने उत्पादन के दौरान पैदा होने वाले विभिन्न पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का कोई समाधान नहीं होता। इसलिए अब उद्योगों की ऐसी समस्याओं का समाधान शोधकर्ता छात्रों द्वारा विश्वविद्यालयों के ही इंफ्रास्ट्रक्चर से किया जाएगा। अपनी समस्या के समाधान के लिए उद्योग विश्वविद्यालयों को फीस के रूप में अदायगी भी करेंगे और भविष्य में भी इस तरह की समस्याएं न हो, शोधकर्ता छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होते ही रोजगार भी ऑफर करेंगे।
विशेषज्ञों ने बताया कि उत्पादन के दौरान पर्यावरण प्रदूषण की यह समस्या केवल भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के उद्योग भी झेलते हैं और प्रदूषण बोर्ड व ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसे अन्य इकाइयों के सख्त नियमों के आगे बेबस हो जाते हैं। उन्हें ऐसी समस्याओं का समाधान नहीं मिल पाता, वो समाधान अब दोनों विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता छात्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए उन्हें उपलब्ध करवाया जाएगा।
विशेषज्ञ साइंटिस्ट डा. जसप्रीत सिंह दाऊ और फ्लोरिडा पालीटेक्निक यूनिवर्सिटी के एसोसिएट डायरेक्टर मुस्तफा एकहॉबेंस ने बताया कि इंडस्ट्री स्पोंसर रिसर्च में कई तरह के ऐसे इको फ्रेंडली शोध होंगे, जो उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होंगे और विश्वविद्यालयों व छात्रों के लिए भी। आज उद्योगों पर सबसे बड़ी चुनौती है अपनी इंडस्ट्री के लिए पर्यावरण विभाग से एनओसी लेना।
कई उद्योगों के लिए तो इसी चक्कर में फंसकर यूनिट बंद करने की नौबत आ जाती है, क्योंकि उद्योगों के पास अपने उत्पादन के दौरान पैदा होने वाले विभिन्न पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का कोई समाधान नहीं होता। इसलिए अब उद्योगों की ऐसी समस्याओं का समाधान शोधकर्ता छात्रों द्वारा विश्वविद्यालयों के ही इंफ्रास्ट्रक्चर से किया जाएगा। अपनी समस्या के समाधान के लिए उद्योग विश्वविद्यालयों को फीस के रूप में अदायगी भी करेंगे और भविष्य में भी इस तरह की समस्याएं न हो, शोधकर्ता छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होते ही रोजगार भी ऑफर करेंगे।
विशेषज्ञों ने बताया कि उत्पादन के दौरान पर्यावरण प्रदूषण की यह समस्या केवल भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के उद्योग भी झेलते हैं और प्रदूषण बोर्ड व ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसे अन्य इकाइयों के सख्त नियमों के आगे बेबस हो जाते हैं। उन्हें ऐसी समस्याओं का समाधान नहीं मिल पाता, वो समाधान अब दोनों विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता छात्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए उन्हें उपलब्ध करवाया जाएगा।