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Hindi News ›   Chandigarh ›   PU pension case : the bail plea rejected of accused

पीयू पेंशन गबन में सहआरोपी की जमानत याचिका खारिज 

Tue, 25 Oct 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 25 Oct 2016 12:15 AM IST
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PU pension case : the bail plea rejected of accused
कोर्ट - फोटो : file photo

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) पेंशन सेल में 2.8 करोड़ रुपये के गबन मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)ने पिछले सप्ताह ऋषि नामक आरोपी को गिरफ्तार किया था। सोमवार को इलाका मजिस्ट्रेट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। रविवार को ही पुलिस ने रिमांड समाप्त होने पर ऋषि को न्यायिक हिरासत में भेजा था। 

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ईओडब्ल्यू के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी ने स्क्रूटनी के बाद पुलिस को बताया था कि उनकी जांच में सामने आया है कि पेंशन सेल से किसी ऋषि नामक व्यक्ति के खाते में भी अलग-अलग बार में 3.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। 
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पुलिस ने जांच की तो पता चला कि मार्बल मार्केट में काम करने वाला ऋषि मामले में मुख्य आरोपी पूजा बग्गा के मामा का बेटा है। उसके खाते में कुल 3.5 लाख रुपये पेंशन सेल से धोखाधड़ी के जरिए ट्रांसफर हुए थे। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 
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अदालत से रिमांड लेने के बाद पुलिस ने रविवार को उसे ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं आरोपी ने उसी दिन जमानत याचिका दायर कर दी थी। इस पर अदालत ने सोमवार के लिए पुलिस को नोटिस कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। सोमवार को पुलिस ने मामले में जवाब दाखिल किया। पुलिस के जमानत के विरोध पर अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। 

बता दें कि 6 सितंबर 2015 को सेक्टर-11 थाना पुलिस ने आपराधिक स्तर पर विश्वासघात करने, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में केस दर्ज किया था। इसमें मुख्य आरोपी पूजा बग्गा, सुपरिंटेंडेंट नरेश सभ्रवाल, बग्गा का पति जतिंदर सिंह, देवर बलजिंदर सिंह, ननद परमजीत कौर, उसका पति रवि कुमार, पिता संपूर्ण सिंह और मां सरिता देवी को आरोपी बनाया गया था। 


वहीं बीती 10 अगस्त को ही पुलिस ने मामले में सप्लीमेंट्ररी चालान पेश किया था। सप्लीमेंटरी चालान यूनिवर्सिटी की सीनेट की ओर से प्रोसीक्यूशन सेक्शन होने और वाइस चांसलर की ओर से मंजूरी मिलने के बाद दायर किया। इसमें वीसी की मंजूरी के बाद सुपरिंटेंडेंट नरेश सभ्रवाल के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।

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