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रिसर्च डे के मौके पर पीजीआई में सम्मान समारोह, शोधकर्ताओं ने दिए टिप्स...कैसे करें शोध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 08 Oct 2018 12:18 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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पीजीआई में रिसर्च डे के मौके पर इमटेक के डायरेक्टर प्रो. अनिल कौल ने बताया कि भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में लगातार तरक्की कर रहा है। खासकर तीन से चार सालों में काफी तेजी देखी जा रही है। इनोवेशन तभी सक्सेस होगा जब उसमें नयापन होगा। ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए कि विदेश में कुछ हुआ और उस आइडिया को कॉपी कर उस पर काम कर दिया। नयापन लाने के लिए हमें रोज अभ्यास की जरूरत पड़ेगी। पेशेंट का भारी लोड होने के बावजूद अच्छे शोध करने पर पीजीआई को उन्होंने बधाई भी दी।
मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे सीएसआईआर न्यू दिल्ली के पूर्व डीजी प्रो. गिरीश साहनी ने सुझाव देते हुए कहा कि पीजीआई को अपनी समस्याओं पर की पहचान करनी होगी और उस मुद्दों के समाधान पर काम करना होगा। आंध्र प्रदेश स्थित श्री वेंकटेश्वरा इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर कम वाइस चांसलर प्रो. टीएस रवि कुमार ने पेशेंट केयर की गुणवत्ता में अनुसंधान के महत्व पर बल दिया। रिसर्च डे के मौके पर बेहतरीन रिसर्च करने वाले डाक्टरों को सम्मानित किया गया।
असिस्टेंट प्रोफेसर की कैटेगिरी में मेडिसिन की सहजल धूरिया, इंद्रपाल सहगल, विवेक कुमार, सर्जरी की किरण जांगड़ा, कोमल अनिल गांधी, पारुल चावला गुप्ता, पैरामेडिकल में मनीष रोहिला, मंजू डंडापानी, अशोक कुमार यादव को दिया। एडिशनल प्रोफेसर की कैटेगिरी में शंकर प्रिंजा, अश्विनी सूद, दीपांकर डे, सर्जरी में एसएस डंडापानी, दिव्या जैन, प्रेमा मेनन, पैरा मेडिकल की अनूप घोस, बलविंदर मोहन, प्रशांत शर्मा को दिया गया। प्रोफेसर की कैटेगिरी में रितेश अग्रवाल, अजय डुसेजा, कौशलजीत एस सोडी, सर्जरी में जतिंदर कौर मक्कर, बबिता घई, सुष्मिता कौशिक, भूपेश कुमार, एमआर शिवाप्रकाश, कुसुम शर्मा और मनीषा बिस्वाल की रिसर्च पर पुरस्कृत किया गया।
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मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे सीएसआईआर न्यू दिल्ली के पूर्व डीजी प्रो. गिरीश साहनी ने सुझाव देते हुए कहा कि पीजीआई को अपनी समस्याओं पर की पहचान करनी होगी और उस मुद्दों के समाधान पर काम करना होगा। आंध्र प्रदेश स्थित श्री वेंकटेश्वरा इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर कम वाइस चांसलर प्रो. टीएस रवि कुमार ने पेशेंट केयर की गुणवत्ता में अनुसंधान के महत्व पर बल दिया। रिसर्च डे के मौके पर बेहतरीन रिसर्च करने वाले डाक्टरों को सम्मानित किया गया।
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असिस्टेंट प्रोफेसर की कैटेगिरी में मेडिसिन की सहजल धूरिया, इंद्रपाल सहगल, विवेक कुमार, सर्जरी की किरण जांगड़ा, कोमल अनिल गांधी, पारुल चावला गुप्ता, पैरामेडिकल में मनीष रोहिला, मंजू डंडापानी, अशोक कुमार यादव को दिया। एडिशनल प्रोफेसर की कैटेगिरी में शंकर प्रिंजा, अश्विनी सूद, दीपांकर डे, सर्जरी में एसएस डंडापानी, दिव्या जैन, प्रेमा मेनन, पैरा मेडिकल की अनूप घोस, बलविंदर मोहन, प्रशांत शर्मा को दिया गया। प्रोफेसर की कैटेगिरी में रितेश अग्रवाल, अजय डुसेजा, कौशलजीत एस सोडी, सर्जरी में जतिंदर कौर मक्कर, बबिता घई, सुष्मिता कौशिक, भूपेश कुमार, एमआर शिवाप्रकाश, कुसुम शर्मा और मनीषा बिस्वाल की रिसर्च पर पुरस्कृत किया गया।
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जर्मनी के शिक्षाविद पीयू पहुंचे, संयुक्त रिसर्च होंगे
पीयू का रिसर्च को लेकर करार अभी तक आस्ट्रेलिया व कनाडा यूनिवर्सिटी से था, लेकिन अब इसे और आगे बढ़ाया जा रहा है। जर्मनी के साथ भी शोध क्षेत्र में काम करने की संभावना जगी है। जर्मनी के शिक्षाविदों ने पीयू का दौरा किया और संभावनाएं तलाशीं। जर्मन अकादमिक विनियम सेवा के विशेषज्ञों ने पीयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर राजकुमार से मुलाकात की।
उन्होंने जर्मनी में शोध के क्षेत्र व उनके आकार-प्रकार के बारे में बताया। शोध के बाद पैदा होने वाले अवसरों पर भी फोकस किया। पीयू के रिसर्च स्ट्रैक्चर को भी उन्होंने बारीकी से जाना। बताया गया कि पीयू से हर साल 200 से अधिक रिसर्च स्कॉलर निकलते हैं जो अपने में बड़ी बात है। स्टूडेंट्स के रिसर्च को भी जर्मन विशेषज्ञों ने देखा और तारीफ भी की। वीसी के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वह पीयू के साथ जल्द रिसर्च करार करेंगे।
उसके बाद डीन इंट्रैक्शन शंकरजी झा ने विभिन्न विभागों के स्टूडेंट्स के साथ विशेषज्ञों की बैठक कराई। स्टूडेंट्स के प्रश्नों में वजन देखकर जर्मन के विशेष खुशी जाहिर की। उन्होंने यह भी कहा कि यहां के स्टूडेंट्स की रूचि रिसर्च में अधिक है। राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संयुक्त शोध केंद्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इस दौरान रिसर्च के दौरान दी जाने वाली स्कॉलरशिप व वित्त पोषण योजनाओं के बारे में भी उन्हें बताया गया।
उन्होंने जर्मनी में शोध के क्षेत्र व उनके आकार-प्रकार के बारे में बताया। शोध के बाद पैदा होने वाले अवसरों पर भी फोकस किया। पीयू के रिसर्च स्ट्रैक्चर को भी उन्होंने बारीकी से जाना। बताया गया कि पीयू से हर साल 200 से अधिक रिसर्च स्कॉलर निकलते हैं जो अपने में बड़ी बात है। स्टूडेंट्स के रिसर्च को भी जर्मन विशेषज्ञों ने देखा और तारीफ भी की। वीसी के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वह पीयू के साथ जल्द रिसर्च करार करेंगे।
उसके बाद डीन इंट्रैक्शन शंकरजी झा ने विभिन्न विभागों के स्टूडेंट्स के साथ विशेषज्ञों की बैठक कराई। स्टूडेंट्स के प्रश्नों में वजन देखकर जर्मन के विशेष खुशी जाहिर की। उन्होंने यह भी कहा कि यहां के स्टूडेंट्स की रूचि रिसर्च में अधिक है। राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संयुक्त शोध केंद्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इस दौरान रिसर्च के दौरान दी जाने वाली स्कॉलरशिप व वित्त पोषण योजनाओं के बारे में भी उन्हें बताया गया।
बेहतर रिसर्च पर मिलेगा दस हजार इंसेंटिव
रिसर्च के जरिए पीयू का नाम पूरी दुनिया में हो। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी रिसर्च स्कॉलर को इंसेंटिव देने की योजना बना रही है। यह प्रोत्साहन दस हजार रुपये तक होगा। पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर्स की संख्या 300 से अधिक है। इन्हीं के अधीन रिसर्च स्कॉलर होते हैं। एक प्रोफेसर को चार से पांच स्टूडेंट आवंटित होते हैं।
रिसर्च तीन से लेकर सात साल तक होता है। इस बीच रिसर्च के लिए स्कॉलर को शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जाना पड़ता है। दूसरे विश्वविद्यालयों में बुक्स आदि की मदद भी ली जाती है। इस बीच खर्च भी रिसर्च स्कॉलर का बढ़ जाता है। रकम अधिक खर्च होने के चलते रिसर्च प्रभावित न हो। साथ ही गहराई में जाकर स्कॉलर शोध करें, इसके लिए पीयू उन्हें मजबूती देगा।
उसके लिए प्रोत्साहन राशि मिलेगी। हाल ही में पीयू ने 50 हजार रुपये 13 स्कॉलर को दिए हैं। हालांकि यह मदद के रूप में दिए थे। इसके कोई लिखित आदेश नहीं थे, लेकिन अब गाइड लाइन जारी होंगी। वाइस चांसलर प्रोफेसर राजकुमार कहते हैं कि इंसेंटिव की व्यवस्था की जा रही है। रिसर्च स्कॉलर को इससे लाभ मिलेगा।
रिसर्च तीन से लेकर सात साल तक होता है। इस बीच रिसर्च के लिए स्कॉलर को शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जाना पड़ता है। दूसरे विश्वविद्यालयों में बुक्स आदि की मदद भी ली जाती है। इस बीच खर्च भी रिसर्च स्कॉलर का बढ़ जाता है। रकम अधिक खर्च होने के चलते रिसर्च प्रभावित न हो। साथ ही गहराई में जाकर स्कॉलर शोध करें, इसके लिए पीयू उन्हें मजबूती देगा।
उसके लिए प्रोत्साहन राशि मिलेगी। हाल ही में पीयू ने 50 हजार रुपये 13 स्कॉलर को दिए हैं। हालांकि यह मदद के रूप में दिए थे। इसके कोई लिखित आदेश नहीं थे, लेकिन अब गाइड लाइन जारी होंगी। वाइस चांसलर प्रोफेसर राजकुमार कहते हैं कि इंसेंटिव की व्यवस्था की जा रही है। रिसर्च स्कॉलर को इससे लाभ मिलेगा।