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पीयू की सीनेट ने दिया साथ तो प्रो. देविंदर होंगे डीएसडब्ल्यू, वीसी के पसंदीदा और लंबा अनुभव

Wed, 12 Jun 2019 02:07 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 12 Jun 2019 02:07 PM IST
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Professor Devinder May be punjab university chandigarh dsw, pu senate
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
अगर सीनेट ने साथ दिया तो पीयू के अगले डीएसडब्ल्यू प्रो. देविंदर सिंह होंगे। इसके लिए सीनेट का एक पक्ष उनके नाम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। साथ ही वीसी प्रो. राजकुमार के भी करीबी हैं। माना जा रहा है कि यदि ठीक से इस पक्ष ने अपनी पैरवी की तो सीनेट में उनके नाम पर मुहर लगना तय है। डीएसडब्ल्यू वर्तमान में प्रो. इमैनुअल नाहर हैं। वह यूसोल के प्रोफेसर हैं। पीयू में यूसोल का अधिक रोल नहीं माना जाता है। साथ ही उनके स्टूडेंट्स भी प्रोटेस्ट आदि में अधिक हिस्सा नहीं लेते।
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यह भी बात सामने आई है कि उनके कार्यकाल में बड़े-बड़े प्रोटेस्ट हुए हैं। छात्रों को शांत करने व उन्हें विश्वास में पूरी तरह वह नहीं ले पाए। चाहे फीस बढ़ोत्तरी को लेकर हुआ बड़ा प्रोटेस्ट हो या फिर छात्राओं के 24 घंटे हॉस्टल खुलवाने का आंदोलन। हालांकि उन्होंने इसके लिए प्रयास काफी किए थे। जानकारों का कहना है कि उनके नाम को दूसरा पक्ष आगे बढ़ा रहा है, जो वीसी नहीं चाहते। वीसी ने खुद ही सिंडिकेट की बैठक में उनके नाम पर सहमति नहीं जताई।
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पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी वीसी ने असहमति दर्ज कराई है। बताते हैं कि लॉ विभाग के प्रो. देविंदर सिंह का शिक्षण क्षेत्र में लंबा अनुभव है। स्टूडेंट्स व शिक्षकों के काफी करीबी हैं। हर किसी की बात को बखूबी समझते हैं। प्रशासनिक नजरिये से भी वह फिट बैठते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें एसवीसी का चार्ज दिया गया था। अब वह इस कार्य से मुक्त हैं। अब उन्हें सीनेट के काफी सदस्य, शिक्षक व स्टूडेंट्स डीएसडब्ल्यू देखना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि उसी के लिए सीनेट का एक पक्ष माहौल बना रहा है।
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वहीं दूसरा खेमा भी अपनी प्रतिष्ठा के लिए मेहनत में जुटा है। अब देखना है कि मुहर किसके नाम पर लगती है। हालांकि इससे पहले सीनेट में सिंडिकेट के मेंबर्स वाले पक्ष का दबदबा रहा है।


डीएसडब्ल्यू वीमेन भी बदल सकतीं हैं
डीएसडब्ल्यू वीमेन प्रो. नीना कप्लास के नाम पर सिंडिकेट ने मुहर लगा दी लेकिन वीसी प्रो. राजकुमार ने इस नाम पर भी असहमति जताई। यहां भी सीनेट ने साथ दिया तो उनकी जगह भी दूसरा चेहरा लाया जा सकता है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि यदि प्रशासनिक लेवल पर समझौता हुआ तो एक डीएसडब्ल्यू भाजपा की विचारधारा से तो दूसरा कांग्रेसी विचारधारा वाला होगा। इसी तरह वार्डन की तैनाती में भी हो सकता है। साक्षात्कार में जिस कमेटी ने वार्डन की सिफारिश की उनके नामों पर वीसी ने मुहर नहीं लगाई। बताया जाता है कि वीसी अपने विवेक से ही नामों पर मुहर लगाएंगे।
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