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फीस वृद्धि के मसले पर अब दबाव के ‘चक्रव्यूह’ में फंसी सीनेट, डबल नुकसान होगा

Sat, 29 Apr 2017 01:44 PM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 29 Apr 2017 01:44 PM IST
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pressure on punjab university senate due to support to fee controversy
Punjab University Professor Arun Kumar Grover
फीस वृद्धि के मसले पर पीयू के सीनेटर्स चक्रव्यूह में फंसते नजर आ रहे है। दबाव और असमंजस का आलम यह है कि सीनेट को डबल नुकसान होगा। यदि सीनेटर्स सात मई को होने वाली सीनेट की बैठक में फीस वृद्धि को वापस लाने के प्रस्ताव का समर्थन करते हैं तो पीयू की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
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इससे पीयू का घाटा और बढ़ जाएगा। दूसरी ओर, यदि सीनेटर्स फीस वृद्धि के मसले पर चर्चा ही नहीं करते तो छात्रों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। सात मई को पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट की बैठक प्रस्तावित है।
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पीयू अथॉरिटी का भी झेल रहे दबाव
विद्यार्थियों के अलावा सीनेटर्स पर पंजाब यूनिवर्सिटी अथारिटी का भी दबाव है। पीयू की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सीनेट ने पिछली बैठक  में फीस वृद्धि का प्रस्ताव पारित किया था। वीरवार को हुई बैठक में कोर कमेटी ने वित्तीय हालातों का हवाले देते हुए रोलबैक से साफ इंकार कर चुकी है।
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दूसरी ओर, आंदोलन करने वाले विद्यार्थियों  को भी पीयू अथारिटी साफ कह चुकी है कि फीस वृद्धि का प्रस्ताव सीनेट लाई है और सीनेट ने इसके लिए  पीयू के मौजूदा घाटे को आधार बनाया था। इसलिए सीनेट चाहे तो प्रस्ताव को रोलबैक कर ले। मगर पीयू अथारिटी के छात्रों को दिए इस जवाब से भी सीनेटर्स पसोपेश में फंसे हुए है। कुछ सीनेटर्स ने बताया कि वाकई सीनेटर्स पर इस वक्त दबाव की स्थिति है।
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