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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के नाम पर विवाद, सुझाव- बदला जाए, हजारों स्टूडेंट्स हो रहे हैं भ्रमित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Dec 2018 03:15 PM IST
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कोर्ट, कंज्यूमर फोरम
- फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी नाम को लेकर विवादों में घिरता जा रहा है। इसको लेकर एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता अजय जग्गा ने आपत्ति दायर की है। उन्होंने कहा है कि इस यूनिवर्सिटी के नाम के आगे चंडीगढ़ जोड़ने से स्टूडेंट्स भ्रमित हो रहे हैं। वह इसे सरकारी यूनिवर्सिटी समझकर ऑनलाइन दाखिले ले रहे हैं। कई स्टूडेंट दाखिले लेने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंच रहे हैं। वहां जाने के बाद उनकी आंखें खुल रही हैं कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी व पंजाब यूनिवर्सिटी अलग-अलग हैं। इससे पीयू को भी नुकसान पहुंच रहा है। इन सब बातों का हवाला देते हुए उन्होंने चांसलर वेंकैया नायडू, पीयू वीसी व यूजीसी को खत लिखा है। पीयू प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अग्रिम कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
सीनेट में प्रो. गुरमीत ने उठाया यह मुद्दा
पिछले दिनों हुई सीनेट की बैठक में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह ने यह मामला उठा दिया। कहा था कि चंडीगढ़ विश्वविद्यालय को स्टडेंट्स सरकारी संस्थान समझकर ऑनलाइन दाखिला ले रहे हैं। उसके बाद वह पंजाब विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं लेकिन जब उनको हकीकत पता लग रही है तो वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। इससे पीयू को भी लोस हो रहा है। कहा कि शहर के नाम से विश्वविद्यालय जुड़ना और उसे मान्यता मिलना गंभीर इश्यू है। यह बात सुनकर वीसी प्रो. राजकुमार दंग रह गए। उन्होंने कहा है कि इस पर जल्द से जल्द एक्शन लिया जाएगा।
केस स्टडी
पिछले साल इलाहाबाद के अविनाश सिंह ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में ऑनलाइन ही दाखिला लिया था। उसके बाद वह पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंच गए। दाखिले की रसीद दिखाई तो उन्हें पता लगा कि जिस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया है वह चंडीगढ़ से 25 किमी दूर है। चंडीगढ़ के एरिया से भी उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसी तरह के केस वर्ष 2013, 2014 में आए थे।
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ऐसे रखे गए नाम
चाहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी हो या फिर लखनऊ। इनके नाम सरकार ने शहर से जोड़कर रखे। इनकी पहचान सरकारी संस्थानों से भी होती है। इसी तरह चंडीगढ़ शहर का नाम भी यूनिवर्सिटी से जुड़ा है तो सभी इसे सरकारी समझ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय कुछ स्टूडेंट जरूर भ्रमित हुए थे, लेकिन उसके बाद ऐसे केस सामने नहीं आए हैं। हम यूनिवर्सिटी के नाम के आगे घड़ूंआ लिख रहे हैं, जो स्थान का नाम है।
- प्रो. आरएस बावा, वाइस चांसलर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआ
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सीनेट में प्रो. गुरमीत ने उठाया यह मुद्दा
पिछले दिनों हुई सीनेट की बैठक में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह ने यह मामला उठा दिया। कहा था कि चंडीगढ़ विश्वविद्यालय को स्टडेंट्स सरकारी संस्थान समझकर ऑनलाइन दाखिला ले रहे हैं। उसके बाद वह पंजाब विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं लेकिन जब उनको हकीकत पता लग रही है तो वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। इससे पीयू को भी लोस हो रहा है। कहा कि शहर के नाम से विश्वविद्यालय जुड़ना और उसे मान्यता मिलना गंभीर इश्यू है। यह बात सुनकर वीसी प्रो. राजकुमार दंग रह गए। उन्होंने कहा है कि इस पर जल्द से जल्द एक्शन लिया जाएगा।
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केस स्टडी
पिछले साल इलाहाबाद के अविनाश सिंह ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में ऑनलाइन ही दाखिला लिया था। उसके बाद वह पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंच गए। दाखिले की रसीद दिखाई तो उन्हें पता लगा कि जिस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया है वह चंडीगढ़ से 25 किमी दूर है। चंडीगढ़ के एरिया से भी उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसी तरह के केस वर्ष 2013, 2014 में आए थे।
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ऐसे रखे गए नाम
चाहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी हो या फिर लखनऊ। इनके नाम सरकार ने शहर से जोड़कर रखे। इनकी पहचान सरकारी संस्थानों से भी होती है। इसी तरह चंडीगढ़ शहर का नाम भी यूनिवर्सिटी से जुड़ा है तो सभी इसे सरकारी समझ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय कुछ स्टूडेंट जरूर भ्रमित हुए थे, लेकिन उसके बाद ऐसे केस सामने नहीं आए हैं। हम यूनिवर्सिटी के नाम के आगे घड़ूंआ लिख रहे हैं, जो स्थान का नाम है।
- प्रो. आरएस बावा, वाइस चांसलर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआ