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पंजाब यूनिवर्सिटी में टीचिंग करनी है, तो पीएचडी करनी होगी, नए फरमान की वजह 'निरफ रैंकिंग'

Sat, 27 Apr 2019 02:42 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 27 Apr 2019 02:42 PM IST
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Phd Must for Teaching in Punjab Universirty Chandigarh
फाइल फोटो
पंजाब विश्वविद्यालय ने अपनी रैंकिंग में सुधार करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। शुरुआत शिक्षण कार्य से की है। शिक्षण प्रभावी हो इसके लिए शिक्षकों का पीएचडी होना अनिवार्य होगा। नए शिक्षक जो भी पीयू में रखे जाएंगे, उनकी शैक्षिक योग्यता में पीएचडी होना जरूरी होगा। इससे पूर्व जिन शिक्षकों ने पीएचडी नहीं की है उनको भी पीयू रिसर्च कराएगा। हालांकि 90 से अधिक शिक्षक पीएचडी कर रहे हैं। पीयू में शिक्षकों की संख्या एक हजार से अधिक है।
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गैस फैकल्टी अलग हैं। पिछले पांच साल में पीयू की रैंकिंग में अधिक सुधार नहीं हो पाया है। भारत सरकार की ‘निरफ रैंकिंग’ समेत कई में पीयू पिछड़ा है। उसका एक प्रमुख कारण ये भी रहा कि इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि विभागों में कई शिक्षक पीएचडी नहीं किए हैं। हालांकि कुछ शिक्षकों ने इसके लिए अप्लाई कर दिया है। रैंकिंग आगे न गिरे इसके लिए शिक्षकों का पीएचडी होना अनिवार्य है। सूत्रों का कहना है कि इसी शैक्षिक सत्र से यह नियम लागू होने जा रहा है। नई तैनाती में इस आदेश का पालन होगा।
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चलेंगे ट्रेनिंग प्रोग्राम
पीयू के शिक्षकों के अलावा कर्मचारियों के लिए भी समय-समय पर ट्रेनिंग प्रोग्राम पीयू प्रशासन कराने की योजना बना रहा है। ज्ञान में वृद्धि के लिए यह प्रोग्राम उपयोगी साबित होंगे। बताया जाता है कि यह प्रशिक्षण जुलाई से शुरू हो जाएंगे। पांच ग्रुप में यह प्रोग्राम होंगे।
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यहां सुधार की जरूरत
कूड़ा प्रबंधन पीयू प्रशासन पूरी तरह नहीं कर पा रहा है। यह भी पीयू की रैंकिंग में बट्टा लगा रहा है। जानकारों का कहना है कि गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग किया जाना है। उसके लिए अलग-अलग बॉक्स भी लगाए गए हैं लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। हैरत तो यह है कि केंद्र सरकार स्वच्छता अभियान चला रहा है लेकिन पीयू में इसका पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग भी कागजों में हो रही है। जानकारों का कहना है कि यदि इसमें सुधार नहीं हुआ तो पीयू की रैंकिंग को फिर बट्टा लगेगा।
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