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पेक की सराहनीय पहल: देश भर में भ्रमण कर आम लोगों की जरूरतें समझेंगे छात्र, कॉलेज देगा पैसा
Wed, 27 Mar 2019 02:08 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 27 Mar 2019 02:08 PM IST
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आम लोग किस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं और उनकी बेहतरी के लिए टेक्नोलॉजी की मदद से क्या कुछ किया जा सकता है। इसके लिए पेक चंडीगढ़ ने एक सराहनीय पहल की है। सेक्टर-12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के 15 छात्र गर्मियों की छुट्टियों में देश भ्रमण पर जाएंगे। यह पहल की है पेक के डायरेक्टर प्रो. धीरज सांघी ने। करीब 6 हफ्तों के सफर के दौरान छात्र स्लीपर व जनरल श्रेणी में यात्रा कर, नॉन एसी बसों में बैठ कर और धर्मशालाओं में रहकर आम आदमी की जरूरत को महसूस करेंगे। छात्रों को भेजने का 90 प्रतिशत खर्चा भी पेक ही उठाएगा। इस यात्रा से पेक की कोशिश है कि स्टूडेंट यह जानें कि ग्राउंड लेवल पर किन बदलावों की जरूरत है और उनको दूर करने के लिए किस तरह के अविष्कारों की जरूरत है।
3-3 छात्रों के बनाए 5 ग्रुप, देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे
पेक के डायरेक्टर प्रो. धीरज सांघी ने बताया कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों के लिए यह कोई टूरिस्ट प्रोग्राम नहीं है बल्कि यह उनके लिए चुनौती है। 3-3 छात्रों के 5 ग्रुप बनाए जा रहे हैं, जिन्हें देश के अलग अलग हिस्सों में भेजा जाएगा। इसके लिए 90 प्रतिशत पैसा कालेज देगा। हालांकि प्रो. धीरज सांघी ने कहा कि फंड के लिए अगले साल एल्युमनि छात्रों से संपर्क करेंगे, ताकि 15 से ज्यादा बच्चों को भेज सकें। प्रो. सांघी ने बताया कि छात्रों को आम आदमी की तरह लोगों के बीच रहना है और उनसे बातचीत कर हर तरह का अनुभव लेना है। छात्र जब उनकी समस्याओं को महसूस करेंगे तो उन्हें शिक्षा का असली महत्व समझ आएगा। साथ लोगों को किन आविष्कारों की जरूरत है, यह पता करना है और फिर वापस आकर उन पर काम करना है।
यात्रा में छात्रों पर कोई बंदिश नहीं
इस पूरी यात्रा में छात्रों पर कोई बंदिश नहीं रहेगी। प्रो. धीरज सांघी ने बताया कि छात्रों को पूरी तरह से छूट है, वह खूब घूमें। यात्रा के दौरान आर्टिकल लिखें, फोटो क्लिक करें और लोगों को समझे। पेक का मानना है कि गर्मी के मौसम में जब छात्र बस, ट्रेन, ऑटो, रिक्शा आदि से सफर करेंगे तो वह लोगों को और करीब से जानेंगे। इस बीच तो संबंध बनेंगे वह जीवनभर कायम करेंगे। इस दौरान मिलने वाली सीख भी जिंदगी भर याद रहेगी।
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कॉलेज में छात्रों में उत्सुकता
पेक के इस पहल के बाद पूरे कॉलेज के छात्रों में काफी उत्सुकता है। काफी ज्यादा संख्या में बच्चे इस पहल में शामिल होना चाहते हैं। प्रो. सांघी ने बताया कि फंड की कमी के चलते सभी छात्रों को नहीं भेजा जा सकता। सिर्फ पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को ही भेजा जाएगा, क्योंकि इन छात्रों के पास काफी समय है। लेकिन जाने के लिए आखिरी वर्ष के छात्र भी संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरे कैंपस में छात्रों के बीच काफी उत्सुकता है।
आईआईटी गांधीनगर भी करता है ऐसा प्रयोग
प्रो. धीरज सांघी ने बताया कि आईआईटी गांधीनगर में पिछले 5 सालों से छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजा जाता है। इसके लिए आईआईटी गांधीनगर के पास काफी अच्छा बजट है। इसमें सबसे ज्यादा सहयोग एल्युमनि स्टूडेंट करते हैं। इस प्रयोग से काफी बदलाव आया है। आईआईटी गांधीनगर कई नए नए प्रयोग कर पा रहा है। आईआईटी गांधीनगर की तरफ से हर साल करीब 100 छात्रों को भेजा जाता है।
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3-3 छात्रों के बनाए 5 ग्रुप, देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे
पेक के डायरेक्टर प्रो. धीरज सांघी ने बताया कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों के लिए यह कोई टूरिस्ट प्रोग्राम नहीं है बल्कि यह उनके लिए चुनौती है। 3-3 छात्रों के 5 ग्रुप बनाए जा रहे हैं, जिन्हें देश के अलग अलग हिस्सों में भेजा जाएगा। इसके लिए 90 प्रतिशत पैसा कालेज देगा। हालांकि प्रो. धीरज सांघी ने कहा कि फंड के लिए अगले साल एल्युमनि छात्रों से संपर्क करेंगे, ताकि 15 से ज्यादा बच्चों को भेज सकें। प्रो. सांघी ने बताया कि छात्रों को आम आदमी की तरह लोगों के बीच रहना है और उनसे बातचीत कर हर तरह का अनुभव लेना है। छात्र जब उनकी समस्याओं को महसूस करेंगे तो उन्हें शिक्षा का असली महत्व समझ आएगा। साथ लोगों को किन आविष्कारों की जरूरत है, यह पता करना है और फिर वापस आकर उन पर काम करना है।
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यात्रा में छात्रों पर कोई बंदिश नहीं
इस पूरी यात्रा में छात्रों पर कोई बंदिश नहीं रहेगी। प्रो. धीरज सांघी ने बताया कि छात्रों को पूरी तरह से छूट है, वह खूब घूमें। यात्रा के दौरान आर्टिकल लिखें, फोटो क्लिक करें और लोगों को समझे। पेक का मानना है कि गर्मी के मौसम में जब छात्र बस, ट्रेन, ऑटो, रिक्शा आदि से सफर करेंगे तो वह लोगों को और करीब से जानेंगे। इस बीच तो संबंध बनेंगे वह जीवनभर कायम करेंगे। इस दौरान मिलने वाली सीख भी जिंदगी भर याद रहेगी।
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कॉलेज में छात्रों में उत्सुकता
पेक के इस पहल के बाद पूरे कॉलेज के छात्रों में काफी उत्सुकता है। काफी ज्यादा संख्या में बच्चे इस पहल में शामिल होना चाहते हैं। प्रो. सांघी ने बताया कि फंड की कमी के चलते सभी छात्रों को नहीं भेजा जा सकता। सिर्फ पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को ही भेजा जाएगा, क्योंकि इन छात्रों के पास काफी समय है। लेकिन जाने के लिए आखिरी वर्ष के छात्र भी संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरे कैंपस में छात्रों के बीच काफी उत्सुकता है।
आईआईटी गांधीनगर भी करता है ऐसा प्रयोग
प्रो. धीरज सांघी ने बताया कि आईआईटी गांधीनगर में पिछले 5 सालों से छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजा जाता है। इसके लिए आईआईटी गांधीनगर के पास काफी अच्छा बजट है। इसमें सबसे ज्यादा सहयोग एल्युमनि स्टूडेंट करते हैं। इस प्रयोग से काफी बदलाव आया है। आईआईटी गांधीनगर कई नए नए प्रयोग कर पा रहा है। आईआईटी गांधीनगर की तरफ से हर साल करीब 100 छात्रों को भेजा जाता है।