फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Parents Have No Knowledge about Commette Constructed to Sort Out Fees Problems

चंडीगढ़ः फीस संबंधी शिकायतों के निपटान को बनी कमेटी से परिजन अनजान, यहां जानिए समाधान

Mon, 25 May 2020 02:03 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 25 May 2020 02:03 PM IST
विज्ञापन
Parents Have No Knowledge about Commette Constructed to Sort Out Fees Problems
सांकेतिक तस्वीर
प्राइवेट स्कूलों से परिजनों को फीस के मामलों में इंसाफ दिलाने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के ऑडर्स के बाद प्रशासन ने फीस रेगुलेटरी कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी को लेकर पैरेंट्स को जानकारी नहीं है। आलम यह है कि यह कमेटी सिर्फ नाम की ही बनकर रह गई है। न तो इसके माध्यम से परिजन शिकायत करते हैं और न ही आई हुई शिकायतों का निपटारा होता है। पिछले साल कमेटी के पास सिर्फ एक शिकायत आई थी। आरटीआई में यह खुलासा हुआ है कि अभी तक यह एक शिकायत भी पेंडिंग है। जब इस बारे में परिजनों से बात की तो पता चला कि वे प्लेटफार्म से वाकिफ नहीं हैं।    
विज्ञापन

          
यह मामला आया था कमेटी के पास
          
फीस रेगुलेटरी कमेटी के पास जो एक शिकायत आई थी वह चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष नितिन गोयल ने 13 मई 2019 को चितकारा स्कूल के खिलाफ दी थी। इस शिकायत में फी रेगुलेटरी कमेटी में अधिकारियों की ढील सामने आई। एक साल पहले की इस शिकायत का अभी तक निपटारा नहीं हुआ है।
विज्ञापन


ये है नियम..
फीस रेगुलेटरी एक्ट नियमों के अनुसार कमेटी में आई शिकायत को 60 दिनों में हल करना पड़ता है। लेकिन शहर में इस नियम को ताक पर रखा जा रहा है। यह जानकारी चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन की तरफ से डाली गई आरटीआई के माध्यम से मिली है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

ये है कमेटी की कार्यशैली

नियमों के अनुसार शैक्षणिक संस्थान में फीस वृद्धि के मामले को फीस रेगुलेटरी कमिटी को ही निपटारा करना होता है। अगर किसी परिजन को संबंधित स्कूल की फीस से कोई दिक्कत है तो वह उस स्कूल की शिकायत फी रेगुलेटरी कमेटी को दे सकता है। अगर कमेटी में इस मुद्दे का निपटारा नहीं होता है तो फिर वह केस कोर्ट में जाता है।

कमेटी का पता चला तो इस बार की शिकायत
परिजन अदित राठी ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले स्कूल की तरफ से फीस बढ़ाए जाने की शिकायत फीस रेगुलेटरी कमेटी को दी है। वह पिछले साल भी स्कूल की तरफ से की जा रही मनमानी से परेशान थे, लेकिन उन्हें परिजनों की शिकायत सुनने के लिए बने इस प्लेटफार्म के बारे में पता नहीं था। इस बार आर्थिक हालात खराब होने के बाद उन्होंने प्राइवेट स्कूल और परिजनों के लिए बने नियमों पर अध्ययन किया तब कमेटी के बारे में उन्हें पता चला।

कमेटी के बारे में नहीं है जानकारी
एक अन्य तीसरी कक्षा के छात्र की मां सुरिंदर कौर ने बताया कि उन्हें कमेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने फीस को लेकर स्कूल को ही लिखित में शिकायत सौंपी है।              

कमेटी में हैं ये सात सदस्य

इस कमेटी के कुल सात सदस्य हैं जो मिलकर परिजनों की शिकायत पर फैसला लेते हैं। इन सात सदस्यों में एजुकेशन सेक्रेटरी बतौर चेयरपर्सन, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन बतौर मेंबर सेक्रेटरी, डिप्टी डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन बतौर मेंबर, डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर बतौर मेंबर शामिल हैं। इसके अलावा तीन नॉमिनेटेड सदस्य हैं जिनमें शामिल हैं असिस्टेंट कंट्रोलर एफएंडए सीमा शर्मा, पूर्व डायरेक्टर एनसीईआरटी प्रोफेसर किश्न कुमार और पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर शिव कुमार शर्मा।                                                                       

एक साल पहले आई शिकायत का क्या स्टेटस है, इसकी जानकारी सोमवार को दे पाएंगे। इस वर्ष कमेटी के पास फीस बढ़ाने और प्राइवेट स्कूलों की ओर से बैलेंस शीट नहीं अपलोड करने को लेकर परिजनों की कई शिकायतें आई हैं।                 
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, मेंबर सेक्रेटरी
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed