चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय में बिना प्रयोग के ही तैयार हो रहे भावी इंजीनियर और वैज्ञानिक
- कोरोना के चलते ऑनलाइन ही निकल गए दो साल, छात्रों ने नहीं किए लैब के दर्शन
- विज्ञान, इंजीनियरिंग और रंगमंच के विद्यार्थियों का सबसे अधिक नुकसान
- शहर में एक महीने पहले ही खुल चुके हैं स्कूल, पीयू को सता रहा कोरोना का डर
- पिछले पंद्रह दिन से विद्यार्थी ऑफलाइन कक्षाओं के लिए वीसी दफ्तर के बाहर कर रहे प्रदर्शन
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विस्तार
पंजाब यूनिवर्सिटी बिना प्रायोगिक शिक्षा के ही भावी इंजीनियर और वैज्ञानिकों की पौध तैयार करने में लगी है। शहर में एक महीने पहले ही प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों की पढ़ाई के नुकसान को देखते हुए स्कूल खोल दिए गए थे लेकिन पीयू विद्यार्थियों के टीकाकरण के बाद भी विभागों में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करवाने को लेकर कोई फैसला नहीं ले पा रही है। वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से मिलने की कोशिश की है कि लेकिन न तो विभाग अधिकारियों और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से कोई जवाब मिलता है।
विद्यार्थियों ने बताया कि पिछले लगभग दो वर्षों में सबसे अधिक प्रायोगिक विषयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हुआ है। एमएससी और एमए के विद्यार्थियों की पूरी डिग्री ऑनलाइन ही निकल गई है। ऐसे में बिना प्रायोगिक जानकारी के भविष्य में नौकरी के लिए भी संभावनाएं न के बराबर रह गई हैं और शोध के लिए भी आधार तैयार नहीं हो पाया है।
स्नातक में भी विज्ञान के विषयों के विद्यार्थियों की ऑनलाइन कक्षाओं के कारण नींव नहीं तैयार हो पाई है। स्कूलों में कई जगह 80-90 प्रतिशत विद्यार्थी रोजाना स्कूल आ रहे हैं जबकि यूनिवर्सिटी में सभी विद्यार्थी 18 उम्र और इससे अधिक के हैं, जिनमें ज्यादातर विद्यार्थियों ने कोरोना का टीका भी लगवा लिया है। विद्यार्थी पीयू प्रशासन को 50 से अधिक ई-मेल लिखने के अलावा कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।
बिना शोध और प्रयोगों के नहीं मिलेगी नौकरी
मैं मेकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा हूं। पिछले लगभग दो साल से कोई शोध या प्रयोग नहीं किया है। बिना प्रयोग के हमारी डिग्री की कोई अहमियत नहीं है, क्योंकि हमारी 90 प्रतिशत से अधिक पढ़ाई लैब की है। ऑनलाइन में डिग्री महज कागज का टुकड़ा हो गई है। हमें चिंता है कि ऐसे में नौकरी के लिए कैसे आवेदन करेंगे। - अनुराग वर्धान
ऑनलाइन में नहीं हुई मूट कोर्ट
कानून की पढ़ाई का अंतिम वर्ष है। दूसरे वर्ष से मूट कोर्ट की प्रायोगिक शिक्षा की शुरुआत होती है, जिसमें हमें कोर्ट के संचालन की प्रक्रिया के साथ बहस इत्यादि करना सिखाते हैं लेकिन पिछले दो सालों में हमने कुछ नहीं सीखा है। नौकरी पहले ही नहीं है, ऐसे में बिना प्रायोगिक शिक्षा के हमारी नींव कैसे तैयार होगी। - अमन, विद्यार्थी
ऑनलाइन कैसे इंजीनियर बनेंगे
यूनिवर्सिटी को समझना चाहिए कि ऑनलाइन डॉक्टर और इंजीनियर नहीं बन सकते हैं। जब स्कूल खुल गए हैं तो यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी तो टीकाकरण भी करवा चुके हैं, उन्हें विभाग में बुलवाना चाहिए। हमें बिना प्रायोगिक शिक्षा के नौकरी कौन देगा। मेरी एमई बायोटेक की डिग्री ऑनलाइन ही निकल गई है। - निखिल, विद्यार्थी
बिना ब्लड टेस्ट सीखे डिग्री पूरी
मैंने बीएससी-एमएससी माइक्रोबायोलॉजी में दाखिला लिया था। पीयू में दाखिला लेने का मकसद था कि प्रायोगिक शिक्षा मिलेगी लेकिन मेरी इस साल बीएससी बिना ब्लड टेस्ट, फूड टेस्ट सीखे ही हो गई। हमारी नौकरी ब्लड लैब, फूड लैब आदि में लगती है। बिना प्रायोगिक जानकारी के लिए हम कहां नौकरी के लिए आवेदन कर पाएंगे। - शाश्वत, विद्यर्थी