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फीस पर फसादः अब दिल्ली तक जाएंगे छात्र, NSUI की खास रणनीति
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 15 Apr 2017 10:32 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का विरोध प्रदर्शन
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पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस को लेकर चल रहा फसाद भी थमा नहीं। अब स्टूडेंट्स शांति से संघर्ष करेंगे, वो भी एक रणनीति के तहत। 11 अप्रैल को हुई हिंसा के बाद कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई ने खुद को फीस वृद्धि के लिए मिलकर संघर्ष कर ही विभिन्न संगठनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी से खुद को अलग कर लिया है।
एनएसयूआई से जुड़े छात्र नेताओं का कहना है कि फीसवृद्धि के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा, लेकिन अपने शांतिपूर्वक तरीके से। इसके लिए पहले चंडीगढ़ सांसद किरण खेर के घर का घेराव कर धरना दिया जाएगा। उसके बाद पंजाब के सीएम से मिला जाएगा।
फिर भी कुछ नहीं हुआ तो दिल्ली जाकर धरने पर बैठ जाएंगे। छात्रों के अनुसार सांसद किरण खेर ने पीयू को 140 करोड़ फंड दिलवाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक वफा नहीं हुआ।
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एनएसयूआई से जुड़े छात्र नेताओं का कहना है कि फीसवृद्धि के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा, लेकिन अपने शांतिपूर्वक तरीके से। इसके लिए पहले चंडीगढ़ सांसद किरण खेर के घर का घेराव कर धरना दिया जाएगा। उसके बाद पंजाब के सीएम से मिला जाएगा।
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फिर भी कुछ नहीं हुआ तो दिल्ली जाकर धरने पर बैठ जाएंगे। छात्रों के अनुसार सांसद किरण खेर ने पीयू को 140 करोड़ फंड दिलवाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक वफा नहीं हुआ।
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11 अप्रैल को वीसी कार्यालय परिसर में हुई हिंसा
फीस वृद्धि को लेकर छात्रों का संघर्ष तेज
- फोटो : अमर उजाला
एनएसयूआई के छात्र नेताओं मनोज लुबाना, निशांत मैनी, साबिर सिंह, चंदन राणा, निखिल, चैतन्य, सिया, अमृत, पीयूष, टैरी इत्यादि ने कहा कि उनका संगठन सिर्फ फीस वृद्धि के खिलाफ है, लेकिन 11 अप्रैल को जो हिंसा वीसी कार्यालय परिसर में हुई, उनसे एनएसयूआई के सदस्य बेहद आहत हैं।
जब तक ज्वाइंट एक्शन कमेटी का एजेंडा सिर्फ फीस वृद्धि के खिलाफ था, तब तक एनएसयूआई का समर्थन भी ज्वाइंट एक्शन कमेटी को था। लेकिन इस हिंसा के बाद ये प्रतीत हो रहा है कि ज्वाइंट एक्शन कमेटी में शामिल कुछ छात्र संगठनों का मकसद फीस वृद्धि के पीछे कुछ और ही है, जिसका खुलासा वे नहीं करना चाहिए।
लिहाजा एनएसयूआई अब अकेले ही इस संघर्ष को आगे बढ़ाएगी। एनएसयूआई ने पीयू प्रशासन से भी मांग की कि वे छात्रों पर दर्ज करवाए केस वापस ले, क्योंकि छात्रों की मंशा पथराव की नहीं थी।
जब तक ज्वाइंट एक्शन कमेटी का एजेंडा सिर्फ फीस वृद्धि के खिलाफ था, तब तक एनएसयूआई का समर्थन भी ज्वाइंट एक्शन कमेटी को था। लेकिन इस हिंसा के बाद ये प्रतीत हो रहा है कि ज्वाइंट एक्शन कमेटी में शामिल कुछ छात्र संगठनों का मकसद फीस वृद्धि के पीछे कुछ और ही है, जिसका खुलासा वे नहीं करना चाहिए।
लिहाजा एनएसयूआई अब अकेले ही इस संघर्ष को आगे बढ़ाएगी। एनएसयूआई ने पीयू प्रशासन से भी मांग की कि वे छात्रों पर दर्ज करवाए केस वापस ले, क्योंकि छात्रों की मंशा पथराव की नहीं थी।
पूर्व कैंपस प्रेसिडेंट बोले, जिम्मेवार पीयू प्रशासन
फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शनों का दौर जारी
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी की कैंपस स्टूडेंट काउंसिल के पूर्व प्रधान, हरियाणा स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष व युवा कांग्रेसी नेता भूपिंद्र सिंह भूप्पी ने कहा कि 11 अप्रैल को पीयू में जो हिंसा हुई उसके लिए पीयू प्रशासन ही जिम्मेवार है। छात्र सिर्फ धरना प्रदर्शन कर वीसी से मुलाकात की मांग कर रहे थे।
लिहाजा पीयू प्रशासन को चाहिए था कि या तो वीसी छात्रों से मिलकर छात्रों को ज्ञापन लेते या अपने किसी प्रतिनिधि को भेजते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पीयू में बड़ी हिंसा हो गई। उनके कार्यकाल में भी फीस वृद्धि के विरुद्ध बड़ा आंदोलन हुआ था, वे खुद 12 दिन वीसी कार्यालय के ठीक सामने भूखहड़ताल पर बैठ गए थे।
बाद में छात्र संगठन के दबाव से फीस वृद्धि वापस हुई। उनके अनुसार अब तो जबरदस्त हिंसा हो चुकी है, ऐसे में पीयू प्रशासन को तुरंत फीसवृद्धि वापस लेकर छात्रों का गुस्सा शांत करना चाहिए।
लिहाजा पीयू प्रशासन को चाहिए था कि या तो वीसी छात्रों से मिलकर छात्रों को ज्ञापन लेते या अपने किसी प्रतिनिधि को भेजते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पीयू में बड़ी हिंसा हो गई। उनके कार्यकाल में भी फीस वृद्धि के विरुद्ध बड़ा आंदोलन हुआ था, वे खुद 12 दिन वीसी कार्यालय के ठीक सामने भूखहड़ताल पर बैठ गए थे।
बाद में छात्र संगठन के दबाव से फीस वृद्धि वापस हुई। उनके अनुसार अब तो जबरदस्त हिंसा हो चुकी है, ऐसे में पीयू प्रशासन को तुरंत फीसवृद्धि वापस लेकर छात्रों का गुस्सा शांत करना चाहिए।