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पंजाब यूनिवर्सिटी सिंडिकेट में नहीं आया प्रस्ताव, अब अगले साल शुरू होगा शाहमुखी कोर्स
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Sep 2018 04:41 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी में इस साल शाहमुखी कोर्स शुरू होने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। इस संदर्भ में सिंडिकेट की बैठक में मंजूरी नहीं मिल सकी है। अब अगले सत्र से ही यह कोर्स शुरू हो सकेगा। सिंडिकेट सदस्य अशोक गोयल ने बताया कि कोर्स का प्रस्ताव बैठक में नहीं आया। शैक्षिक सत्र के शुरुआत में पंजाब यूनिवर्सिटी ने निर्णय लिया था कि वर्ष 2018-19 में ही शाहमुखी कोर्स शुरू हो जाएगा। शाहमुखी पंजाबी भाषा की एक लिपि है। दूसरी लिपि गुरमुखी है। शाहमुखी लिपि का कोर्स डिफेंस विभाग की ओर से शुरू किया जाना था। इसके लिए प्रस्ताव तैयार हो चुका है, विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरू करने के लिए मुहर भी लगा दी थी।
उसी दौरान पंजाबी विभाग को सिलेबस बनाने के निर्देश दिए गए। विभाग ने दो माह में सिलेबस तैयार कर दिया। सिलेबस को सिंडिकेट की बैठक में पास कराया जाना था, लेकिन यह रखा ही नहीं गया। इस वजह से इस सत्र में कोर्स शुरू करने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है। जुलाई से जून तक विश्वविद्यालय का शैक्षिक सत्र होता है। 18 अगस्त से पढ़ाई भी शुरू हो जाती है। ऐसे में यदि यह सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया तो देरी होगी।
कोर्स में यह खास
पीयू के गुरु तेग बहादुर भवन में शुरू होने वाले शाहमुखी कोर्स के लिए 40 सीटें तय की गई थीं। प्रथम चरण में इन सीटों पर दाखिले मुफ्त दिए जाने थे। इस संबंध में कोई शुल्क नहीं लिया जाना था। यह कोर्स छह माह का था। इसके लिए योग्यता स्नातक रखी गई थी। 45 फीसदी अंक पाने वाले विद्यार्थी इस कोर्स में दाखिला ले सकते थे।
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फैकल्टी भी करेगी कोर्स
इस कोर्स के दूसरे चरण में ऑनलाइन व्यवस्था लागू किए जाने की योजना थी। उसी के मुताबिक विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर दाखिले दिए जाएंगे। फीस भी चयनित स्टूडेंट्स से ली जानी थी। साथ ही पढ़ाने के लिए फैकल्टी भी रखी जानी थी। इसके अलावा पंजाबी विभाग की फैकल्टी को भी इसमें पारंगत किया जाना था ताकि वह आगे खुद ही स्टूडेंट्स को इस पंजाबी लिपि का कोर्स करा सके।
यह बनी थी योजना
फिलहाल कोर्स को पंजाब विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रो. मधुकर आर्या व अली अब्बास की ओर से पढ़ाए जाने की योजना बनी थी। दो से तीन शिक्षक और रखे जाने थे। प्रथम चरण में सर्टिफिकेट कोर्स पास हो जाता तो दूसरे चरण में डिप्लोमा कोर्स शुरू होता, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिल पाई।
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उसी दौरान पंजाबी विभाग को सिलेबस बनाने के निर्देश दिए गए। विभाग ने दो माह में सिलेबस तैयार कर दिया। सिलेबस को सिंडिकेट की बैठक में पास कराया जाना था, लेकिन यह रखा ही नहीं गया। इस वजह से इस सत्र में कोर्स शुरू करने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है। जुलाई से जून तक विश्वविद्यालय का शैक्षिक सत्र होता है। 18 अगस्त से पढ़ाई भी शुरू हो जाती है। ऐसे में यदि यह सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया तो देरी होगी।
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कोर्स में यह खास
पीयू के गुरु तेग बहादुर भवन में शुरू होने वाले शाहमुखी कोर्स के लिए 40 सीटें तय की गई थीं। प्रथम चरण में इन सीटों पर दाखिले मुफ्त दिए जाने थे। इस संबंध में कोई शुल्क नहीं लिया जाना था। यह कोर्स छह माह का था। इसके लिए योग्यता स्नातक रखी गई थी। 45 फीसदी अंक पाने वाले विद्यार्थी इस कोर्स में दाखिला ले सकते थे।
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फैकल्टी भी करेगी कोर्स
इस कोर्स के दूसरे चरण में ऑनलाइन व्यवस्था लागू किए जाने की योजना थी। उसी के मुताबिक विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर दाखिले दिए जाएंगे। फीस भी चयनित स्टूडेंट्स से ली जानी थी। साथ ही पढ़ाने के लिए फैकल्टी भी रखी जानी थी। इसके अलावा पंजाबी विभाग की फैकल्टी को भी इसमें पारंगत किया जाना था ताकि वह आगे खुद ही स्टूडेंट्स को इस पंजाबी लिपि का कोर्स करा सके।
यह बनी थी योजना
फिलहाल कोर्स को पंजाब विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रो. मधुकर आर्या व अली अब्बास की ओर से पढ़ाए जाने की योजना बनी थी। दो से तीन शिक्षक और रखे जाने थे। प्रथम चरण में सर्टिफिकेट कोर्स पास हो जाता तो दूसरे चरण में डिप्लोमा कोर्स शुरू होता, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिल पाई।