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परेशानी: पीयू के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के पास न किताबें और न नेटवर्क, फिर भी नहीं खुल रही पंजाब यूनिवर्सिटी

Mon, 08 Nov 2021 01:48 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 08 Nov 2021 01:48 PM IST
सार

पंजाब यूनिवर्सिटी में चुनिंदा विभागों के एमए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए ही विभाग खोले गए हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि ऑनलाइन कक्षाओं में सिर्फ उपस्थिति दर्ज हो रही है, पढ़ाई नहीं हो रही।

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No decision on Opening of Panjab University Chandigarh Yet
पंजाब यूनिवर्सिटी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में शिक्षण व्यवस्था एकदम चरमराई हुई है। पीयू में अधिकतर विद्यार्थी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जहां वाई-फाई की सुविधा नहीं है और मोबाइल नेटवर्क पर ऑनलाइन कक्षाएं सक्षम तरीके से लगाने जितना नेटवर्क नहीं है। विद्यार्थी पिछले एक साल अपनी ये समस्याएं रख रहे हैं, लेकिन ऑफलाइन कक्षाओं को लेकर कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है। चुनिंदा विभागों के एमए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए ही विभाग खोले गए हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि ऑनलाइन कक्षाओं में सिर्फ उपस्थिति दर्ज हो रही है, पढ़ाई नहीं हो रही।

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विद्यार्थियों के समक्ष ये चुनौतियां 
1. पीयू की तरफ से हर पाठ्यक्रम के प्रत्येक विषय में 5 से 10 रेफरेंस किताबें लगाई जाती है। बड़े शहरों के अलावा अन्य जगहों पर किताबें उपलब्ध ही नहीं हैं।
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2. विज्ञान, इंजीनियरिंग, कानून और अंग्रेजी साहित्य की बहुत-सी किताबों का मूल्य हजार से ज्यादा है, जिन्हें विद्यार्थी खरीदने में नाकाम हैं।
3. शोधकर्ताओं के अलावा किसी विद्यार्थी को डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा नहीं, जिस कारण विद्यार्थी ऑनलाइन उपलब्ध मैटिरियल से ही काम चला रहे हैं।
4. ज्यादातर विद्यार्थियों के घरों में वाई-फाई की सुविधा ही नहीं है, ग्रामीण परिवेश में मांग कम होने के कारण कंपनियां लगाती भी नहीं हैं।
5. कई शिक्षकों ने बिना कक्षाएं लगाए ही सेमेस्टर निकाल दिया, विद्यार्थियों को विषय के बारे में पढ़ाया ही नहीं गया है।
6. कई शिक्षक ऑनलाइन कक्षा में बिना कैमरा चालू किए ही कक्षाएं ले रहे हैं, जिस कारण कक्षा मात्र मोबाइल पर एकपक्षीय वार्तालाप बनकर रह गई है।
7. अगर विद्यार्थी शिक्षकों से मदद के लिए विभाग का दौरा भी करते हैं तो वहां पर प्रोफेसर मौजूद ही नहीं होते।
8. बहुत से शिक्षक कक्षा के शेड्यूल के बजाय अपनी मनमर्जी के समय कक्षाएं लगा रहे हैं, जिस कारण घर बैठे विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है, क्योंकि उन्हें जानकारी ही नहीं मिल पाती कि कब कक्षा लग चुकी है।
9. प्रोफेशनल और प्रैक्टिकल लर्निंग वाले कोर्स के विद्यार्थियों को बिना लैब में प्रशिक्षण दिए ही डिग्री पूरी करवा रहे हैं।
10. किताबों और लाइब्रेरी की कमी के कारण प्रोफेशनल कोर्स, साहित्यिक कोर्स और एमए के विद्यार्थियों की डिग्री बिना शोध के ही पूरी हो रही है।
11. शिक्षकों ने ऑनलाइन कक्षाओं की रिकार्डिंग पर रोक लगाई हुई है, जिसके कारण नेटवर्क की कमी के कारण कक्षा नहीं लगने के बाद विद्यार्थियों के पास पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं रहता है।


कानून की पढ़ाई बिना वकालत सीखे ही हुई पूरी
एलएलबी की पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप भी ऑनलाइन ही निकल गई। वकालत के कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन न तो वकालत सीखी और न ही कोर्ट की प्रक्रिया। पाठ्यक्रम में मूट कोर्स होती है, लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं में व्यावहारिक ज्ञान दिया ही नहीं गया। एलएलबी की डिग्री लेने का विद्यार्थियों को कोई फायदा नहीं हुआ है। -कुदरतजोत कौर, छात्रा, पीयू

ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों के पास नेटवर्क ही नहीं

पीयू में बहुत से विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जो इस समय अपने घर ही हैं। वहां न तो वाई-फाई की सुविधा है और न ही अच्छे से मोबाइल नेटवर्क आता है। ये विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाएं लगाने में सक्षम ही नहीं हैं। पीयू आकर अगर कोई विद्यार्थी विभागों का दौरा करते हैं तो वहां प्रोफेसर के कमरों पर ताला मिलता है। - अमन, छात्र, पीयू
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