{"_id":"58983ee54f1c1b90523784c3","slug":"no-benefit-will-be-of-punjab-fees-policy-for-entry-level-admission-in-chandigarh-schools","type":"story","status":"publish","title_hn":"एंट्री लेवल पर नौनिहालों का दाखिला करवाने की सोच रहे पेरेंट्स पढ़ें बुरी खबर","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
एंट्री लेवल पर नौनिहालों का दाखिला करवाने की सोच रहे पेरेंट्स पढ़ें बुरी खबर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 06 Feb 2017 02:46 PM IST
विज्ञापन
school admission
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एंट्री लेवल पर नौनिहालों का स्कूलों में दाखिला करवाने की सोच रहे अभिभावकों के लिए बुरी खबर है। शिक्षा विभाग ने फरमान जारी किया है। अपनी फीस पॉलिसी खारिज होने के बाद अब यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट पंजाब की फीस पॉलिसी को अपनाने जा रहा है। फीस पॉलिसी को अपनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, लेकिन अभिभावकों के लिए बुरी खबर यह है कि इस पॉलिसी का फायदा उन्हें इस सत्र से नहीं मिल पाएगा।
वर्तमान सत्र में एंट्री लेवल कक्षाओं में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। अधिकतर निजी स्कूलों में दाखिले के लिए ड्रा भी हो चुके हैं। फीस जमा हो रही है। ऐसे में अगर फीस पॉलिसी होती तो अभिभावकों को फायदा मिल सकता था। पॉलिसी नहीं होने की वजह से अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी फीस ही चुकानी पड़ रही है। कई स्कूलों ने नए सत्र केसाथ ही फीस भी बढ़ा दी है। कोई ट्यूशन फीस तो कोई री-एडमिशन फीस बढ़ाकर ले रहा है।
इस फीस को रेगुलेट करने के लिए ही यह फीस पॉलिसी बनाई जा रही है। लेकिन अभी तक फीस पॉलिसी नहीं बन पाई है जिस कारण इसका फायदा सीधा-सीधा स्कूलों को मिल रहा है। इससे पहले प्रशासन ने अपनी फीस पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया था। लेकिन कई कानूनी पेचीदगियों में ही यह पॉलिसी उलझ कर रह गई। जिसके बाद एजुकेशन विभाग ने पंजाब की पॉलिसी को अपनाने का फैसला लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्तमान सत्र में एंट्री लेवल कक्षाओं में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। अधिकतर निजी स्कूलों में दाखिले के लिए ड्रा भी हो चुके हैं। फीस जमा हो रही है। ऐसे में अगर फीस पॉलिसी होती तो अभिभावकों को फायदा मिल सकता था। पॉलिसी नहीं होने की वजह से अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी फीस ही चुकानी पड़ रही है। कई स्कूलों ने नए सत्र केसाथ ही फीस भी बढ़ा दी है। कोई ट्यूशन फीस तो कोई री-एडमिशन फीस बढ़ाकर ले रहा है।
विज्ञापन
इस फीस को रेगुलेट करने के लिए ही यह फीस पॉलिसी बनाई जा रही है। लेकिन अभी तक फीस पॉलिसी नहीं बन पाई है जिस कारण इसका फायदा सीधा-सीधा स्कूलों को मिल रहा है। इससे पहले प्रशासन ने अपनी फीस पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया था। लेकिन कई कानूनी पेचीदगियों में ही यह पॉलिसी उलझ कर रह गई। जिसके बाद एजुकेशन विभाग ने पंजाब की पॉलिसी को अपनाने का फैसला लिया है।
विज्ञापन