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समीक्षा में खुलासाः निरफ रैंकिंग में इंजीनियरिंग विभाग ने पंजाब यूनिवर्सिटी को पीछे धकेला था

Tue, 30 Jun 2020 11:09 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 30 Jun 2020 11:09 AM IST
सार

  • समीक्षा करने के बाद सामने आई विभाग की सच्चाई
  • न इंडस्ट्री लिंकेज थे और न विभाग के पास प्लेसमेंट का डेटा था
  • यूआईपीएस, यूबीएस, डेंटल कॉलेज ने रखी पीयू की लाज

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Niraf Ranking, Engineering Department and Punjab University
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

विस्तार

निरफ रैंकिंग में पीयू के पीछे जाने का सबसे बड़ा कारण इंजीनियरिंग विभाग बना। 20 रैंक पीछे धकेलने में इसी विभाग का हाथ रहा। यही कारण रहा कि ओवरऑल रैंकिंग में पीयू इस बार दस रैंक पीछे यानी 44वें स्थान पर आया। इंजीनियरिंग विभाग के पास न प्लेसमेंट का कोई डेटा था और न ही उद्योग इससे जुड़े हुए थे।
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यूआईपीएस, यूबीएस और डेंटल कॉलेज ने जरूर पीयू की लाज रखी अन्यथा इंजीनियरिंग की तरह यह विभाग भी होते तो पीयू रैंक की सूची में ही शायद ही दिखता। केंद्र सरकार हर साल निरफ रैंकिंग जारी करती है। रिसर्च से लेकर रोजगार तक के डेटा इसके पात्रता के आधार बनते हैं। हर विभाग को अपनी परफोर्मेंस देनी होती है। इस साल भी निरफ रैंकिंग जारी हुई।
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इसमें पीयू पिछले साल के मुताबिक दस रैंक नीचे आ गया। विशेषज्ञों की टीम ने इसके कारणों के लिए मंथन किया और इसके कारण तलाशे जो बाहर निकलकर आए। यूआईईटी विभाग ही इसका कारण बना है। यह विभाग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है। पीयू का सबसे बड़ा विभाग यही है और सर्वाधिक आर्थिक मजबूती पीयू को इसी विभाग के जरिये मिलती है। इस विभाग में लगभग तीन हजार स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं।
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इंजीनियरिंग विभाग के पास प्लेसमेंट, इंडस्ट्री लिंकेज का डेटा नहीं था। इसके कारण निरफ में हम पीछे आए हैं। आगे ऐसी नौबत न आए, इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं।
- प्रो. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी

देश में दूसरे नंबर पर आता है यूआईपीएस विभाग

पीयू का यूआईपीएस विभाग देश में दूसरे नंबर पर आता है। इसके रिसर्च से लेकर प्लेसमेंट तक का कोई जवाब नहीं। सभी कार्य इस विभाग के अव्वल आए हैं। इसी तरह यूबीएस विभाग एमबीए करवाता है। टॉप स्टूडेंट्स इस विभाग में शिक्षा पाते हैं। यह विभाग दुनिया में अपनी पहचान रखता है।

अंतरराष्ट्रीय जगत में भी इसकी रैंकिंग 15 वें स्थान पर है। प्लेसमेंट यहां शत-प्रतिशत स्टूडेंट्स की होती है। इसी तरह डेंटल कॉलेज की भी अपनी एक अच्छी छवि है। यहां एमडीएस कोर्स भी शुरू हो गया है। साथ ही यहां दांतों का अस्पताल भी संचालित हो गया।

इन विभागों का डेटा मजबूत था, इसके कारण पीयू को निरफ रैंकिंग में कुछ राहत मिली। पीयू की समीक्षा में कई अन्य कारण भी सामने आए लेकिन सबसे बड़ा कारण यूआईईटी विभाग बना। रिसर्च को भी और मजबूती प्रदान करने की योजना है। साथ ही विषयों का भी विस्तार किया जाएगा।
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