फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   new reserch, dr kewal krishan, dr kewal krishan reserch, punjab university, chandigarh

नई रिसर्च: चप्पलों पर पैरों के निशान पकड़ाएंगे अपराधी का गिरेबान

Sat, 01 Oct 2016 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 01 Oct 2016 09:30 AM IST
विज्ञापन
new reserch, dr kewal krishan, dr kewal krishan reserch, punjab university, chandigarh
डॉ. केवल कृष्ण ने पैरों के प्रिंट पर खास शोध किया है।
अब पुलिस को चप्पलों पर पैरों के पड़ने वाले निशान अपराधियों के गिरेबान तक पहुंचाएंगे।
विज्ञापन


पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित इंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केवल कृष्ण ने पैरों के प्रिंट पर खास शोध किया है। शोध के अनुसार शरीर का भार, चलने का तरीका और लंबाई पैरों के निशान पर असर डालते हैं। इस कारण हरेक व्यक्ति के पैरों के निशान अलग होते हैं।

चप्पलों के निशान से क्रिमिनल को पकड़ने के शोध को डॉ. केवल 4 से 7 अक्तूबर तक आस्ट्रिया में होने वाली 12वीं इंटरनेेशनल यूरोपियन फुटप्रिंट एंड टूलमार्क मीटिंग में पेश करेंगे। डॉ. केवल ने बताया कि उनके द्वारा चप्पलों के निशानों पर किए गए शोध में 80 फीसदी से अधिक सक्सेस रेट है। 
विज्ञापन


पैरों के निशानों पर पहली बार हुआ काम
डॉ. केवल ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए फिंगरप्रिंट पर पहले काम हो चुका है, लेकिन पैरों के निशान से अपराधियों को पकड़ने के लिए इस तरह का पहली बार काम हुआ है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की ओर से करीब 7 लाख के प्रोजेक्ट को तीन साल में पूरा किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जूतों पर भी इस शोध को करना चाहते हैं
डॉ. केवल ने बताया कि 200 से अधिक लोगों को 4 से 5 महीने तक प्लास्टिक की चप्पलें पहनने को दी गईं। इसके बाद उनके पैरों के  निशानों का किसी घटना के निशानों से मिलान किया गया। उन्होंने बताया कि शोध का रिजल्ट उम्मीद से काफी बेहतर रहा। उन्होंने बताया कि भविष्य में फंडिंग होने पर वह जूतों पर इस तरह का शोध करने की सोच रहे हैं।


137 से अधिक शोधपत्र पेश कर चुके
डॉ. केवल ने बताया कि शोध के अलग-अलग उम्र के लोगों को शामिल किया है, लेकिन इसमें अधिकतर हॉस्टल स्टूडेंट शामिल थे। डॉ. केवल के अनुसार 100 से 200 लोगों की चप्पलों के सैंपल से अपराधी को आसानी से पकड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक में अभी ओर सुधार किया जा सकता है। फिंगरप्रिंट में एक्सपर्ट माने जाने वाले डॉ. केवल अभी तक फोरेंसिक साइंस में 137 से अधिक शोधपत्र नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर पेश कर चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed