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एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री के छात्रों का ऐलान, पंजाब यूनिवर्सिटी से नहीं लेंगे डिग्रियां, जानें मामला

Fri, 10 Jul 2020 04:05 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 10 Jul 2020 04:05 PM IST
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MSc Industrial Chemistry Students Refused to Accept Degrees from Punjab University
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब यूनिवर्सिटी से एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री कोर्स कर रहे छात्रों ने एलान कर दिया कि वह डिग्रियां नहीं लेंगे। फाइनल ईयर के छात्रों ने कहा कि उनके कोर्स का संचालन केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के बजाय रसायन विज्ञान विभाग से करवाया जाए। उन्हें रसायन विज्ञान विभाग के जरिये ही डिग्री मिलनी चाहिए। इसके लिए छात्र पैसे और समय पीयू को देने के लिए तैयार हैं।
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छात्रों ने साफ कह दिया कि कोविड के कारण तमाम लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में वह कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग के जरिये संचालित कोर्स की डिग्रियां लेकर बाहर निकलेंगे तो उन्हें नौकरियां नहीं मिलेंगी। सरकारी नौकरियों में तो उनके रास्ते बंद हैं। छात्रों का आरोप है कि पीयू प्रशासन उनके भविष्य को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। वीसी, डीयूआई से लेकर कई अधिकारियों को मेल किए, लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला।
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सरकारी नौकरियों में प्रवेश नहीं, कंपनियां भी समझती हैं दोयम दर्जे
पीयू में कई वर्षों से एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री कोर्स का संचालन कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग के जरिये हो रहा है जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में इस कोर्स का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के अंतर्गत हो रहा है। पीयू से जो भी छात्र पासआउट होकर निकले हैं उन्हें सरकारी नौकरियों जैसे शिक्षा विभाग में नौकरियां नहीं मिली।
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यदि वह विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पढ़ाना चाहते हैं तो वह सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। कंपनियों में भी इन छात्रों को दोयम दर्जे का समझा जा रहा है। एलुमनी भी बाजार का हाल बता चुके हैं। इसका कारण यह है कि केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के जरिये कोर्स का संचालन होना। छात्रों को केमेस्ट्री के पाठ्यक्रम की बजाय अधिकांश सिलेबस केमिकल इंजीनियरिंग का पढ़ाया जा रहा है। इसकी डिमांड बाजार में नहीं है।

छात्रों ने इसलिए उठाया कदम

छात्रों को जब बाजार व सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी का पता लगा तो वह हैरत में पड़ गए और उन्हें भविष्य को लेकर चिंता होने लगी। उन्होंने इस कोर्स का संचालन रसायन विज्ञान विभाग से करवाने के लिए कई मेल अफसरों को किए, लेकिन किसी ने उनको जवाब देना उचित नहीं समझा। एलुमनी, छात्र संगठनों ने भी यह मुद्दा उठाया, लेकिन पीयू ने एक नहीं सुनी। इसी से परेशान होकर फाइनल ईयर के छात्रों ने ऐलान कर दिया कि वह डिग्रियां नहीं लेंगे।

सिंडिकेट का हो सकता है घेराव
14 जुलाई को होने जा रही सिंडिकेट की बैठक का घेराव छात्र संगठन इस मुद्दे को लेकर कर सकते हैं। धरना-प्रदर्शन भी किया जा सकता है। पहले भी छात्रों ने यह मुद्दा कई बार उठाया लेकिन पीयू के अफसरों की नींद नहीं खुली। समय बीत रहा है, इसलिए छात्रों की धड़कनें बढ़ रही हैं। छात्रों ने कहा कि पीयू इस कोर्स का संचालन रसायन विज्ञान विभाग से करवाए। एक साल उन्हें पढ़ाई भी करवाए। उसके लिए वह समय भी देंगे और फीस भी।
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