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चंडीगढ़ के 12123 विद्यार्थियों ने छोड़े सरकारी स्कूल, प्रवासी मजदूर परिवार समेत कर गए पलायन
Mon, 13 Jul 2020 12:27 PM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 13 Jul 2020 12:27 PM IST
सार
- शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों से इकट्ठा किया विद्यार्थियों का डाटा
- डीईओ बोले- ज्यादातर विद्यार्थियों ने नहीं ली एसएलसी, वापस लौटने की उम्मीद
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परिवार के साथ लौटते मजदूर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
लॉकडाउन के दौरान चंडीगढ़ के 115 सरकारी स्कूलों के 12 हजार 123 विद्यार्थी स्कूल छोड़कर पलायन कर चुके हैं। इनमें से कई ऐसे बच्चे हैं जो स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) भी ले गए हैं। ये विद्यार्थी चंडीगढ़ में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों के बच्चे हैं।
इनके पैरेंट्स को लॉकडाउन के दौरान काम नहीं होने और पैसे की तंगी के कारण अपने गांवों में लौटना पड़ा। शिक्षा विभाग ने इन्हें ऑप्शन दिया है कि कोरोना के चलते अभी स्कूल नहीं खुले हैं, अगर ये लोग माहौल ठीक होने पर वापस आते हैं तो इन्हें एडमिशन दे दिया जाएगा। शहर के सरकारी स्कूलों में इस समय कुल एक लाख 13 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
बिना एसएलसी नहीं ले पाएंगे दूसरे स्कूलों में दाखिला
सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि अगर विद्यार्थी सात दिन से ज्यादा अकारण छुट्टी पर रहता है तो स्कूल की तरफ से उसका नाम काट दिया जाता है। फिलहाल स्कूलों में छुट्टियां चल रही है। ऑनलाइन क्लास में किसी बच्चे की गैरहाजिर नहीं लगा रहे हैं। स्कूल से एक लड़की एसएलसी लेकर गई हैं।
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अन्य विद्यार्थी बिना एसएलसी लिए गए हैं। अगर ऐसे में वे वापस नहीं लौटते हैं तो बिना एसएलसी वे दूसरे किसी स्कूल में भी दाखिला नहीं ले पाएंगे।
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इनके पैरेंट्स को लॉकडाउन के दौरान काम नहीं होने और पैसे की तंगी के कारण अपने गांवों में लौटना पड़ा। शिक्षा विभाग ने इन्हें ऑप्शन दिया है कि कोरोना के चलते अभी स्कूल नहीं खुले हैं, अगर ये लोग माहौल ठीक होने पर वापस आते हैं तो इन्हें एडमिशन दे दिया जाएगा। शहर के सरकारी स्कूलों में इस समय कुल एक लाख 13 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
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बिना एसएलसी नहीं ले पाएंगे दूसरे स्कूलों में दाखिला
सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि अगर विद्यार्थी सात दिन से ज्यादा अकारण छुट्टी पर रहता है तो स्कूल की तरफ से उसका नाम काट दिया जाता है। फिलहाल स्कूलों में छुट्टियां चल रही है। ऑनलाइन क्लास में किसी बच्चे की गैरहाजिर नहीं लगा रहे हैं। स्कूल से एक लड़की एसएलसी लेकर गई हैं।
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अन्य विद्यार्थी बिना एसएलसी लिए गए हैं। अगर ऐसे में वे वापस नहीं लौटते हैं तो बिना एसएलसी वे दूसरे किसी स्कूल में भी दाखिला नहीं ले पाएंगे।
सरकार नियमों में करे बदलाव
गवर्नमेंट मॉडल हाईस्कूल-20 में इस सेशन दसवीं में हुई छात्रा शिवानी ने बताया कि उनका परिवार चंडीगढ़ छोड़कर घर संत कबीर नगर यूपी जा रहा है। उन्होंने स्कूल से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट भी ले लिया है। उनके पिता चंडीगढ़ में पेंटर का काम करते थे। वे यहां विकासनगर में रह रहे थे।
सरकारी स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि नौंवी कक्षा में सभी विद्यार्थियों की दसवीं बोर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन हो जाती है। जिस स्कूल से नौवीं कक्षा पास की है, वहीं से दसवीं करना जरूरी होता है। देश में ऐसे बहुत से विद्यार्थी होंगे जिन्हें बोर्ड की कक्षा में स्कूल छोड़कर जाना पड़ा है। अब सरकार को चाहिए कि वे इस वर्ष के लिए नियमों में बदलाव करे अन्यथा विद्यार्थियों को कक्षा रिपीट करनी पड़ेगी, ऐसे में उनका एक साल व्यर्थ होगा।
विद्यार्थियों का डाटा स्कूलों ने फोन पर बातचीत कर तैयार किया है। बहुत सारे विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिनसे स्कूल संपर्क नहीं कर पा रहा है। इनमें से ज्यादातर विद्यार्थियों ने अभी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं लिया है। उम्मीद है हालात सही होने पर ये वापस स्कूलों में लौटेंगे।
- हरबीर सिंह आनंद, डीईओ
सरकारी स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि नौंवी कक्षा में सभी विद्यार्थियों की दसवीं बोर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन हो जाती है। जिस स्कूल से नौवीं कक्षा पास की है, वहीं से दसवीं करना जरूरी होता है। देश में ऐसे बहुत से विद्यार्थी होंगे जिन्हें बोर्ड की कक्षा में स्कूल छोड़कर जाना पड़ा है। अब सरकार को चाहिए कि वे इस वर्ष के लिए नियमों में बदलाव करे अन्यथा विद्यार्थियों को कक्षा रिपीट करनी पड़ेगी, ऐसे में उनका एक साल व्यर्थ होगा।
विद्यार्थियों का डाटा स्कूलों ने फोन पर बातचीत कर तैयार किया है। बहुत सारे विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिनसे स्कूल संपर्क नहीं कर पा रहा है। इनमें से ज्यादातर विद्यार्थियों ने अभी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं लिया है। उम्मीद है हालात सही होने पर ये वापस स्कूलों में लौटेंगे।
- हरबीर सिंह आनंद, डीईओ
कर्जदार होने के कारण पलायन करने के लिए हुए मजबूर
धनास कच्ची कॉलोनी निवासी दिहाड़ीदार मजदूर ने कहा कि लॉकडाउन में उनकी कॉलोनी ढाई महीने तक प्रशासन ने सील करके रखी। ऐसे में उनके पास खाना और घर का किराया देने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। उन्हें परिवार को खाना खिलाने के लिए ही 10 हजार रुपए का कर्ज हो गया था।
इसके बाद उन्होंने अपने ठेकेदार से 20 हजार रुपए उधार लिए, जिसमें से 10 हजार खाने का चुकाया। सात हजार रुपए यूपी के जौनपुर से 25 किमी दूर गांव जाने के लिए किराया लगा। आम दिनों में वे परिवार के साथ हजार रुपए में गांव पहुंच जाते थे।
शिव ने बताया उनके चार बच्चे, जिनमें 18 वर्ष की बेटी नौंवी, 15 वर्ष की बेटी आठवीं, 12 वर्ष का बेटा छटी और 7 वर्षीय बेटा तीसरी कक्षा में चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे। अभी चारों बच्चों के साथ वे गांव में जमींदार के खेत में धान की बुवाई करने जाते हैं, ताकि 20 हजार रुपए जमा कर ठेकेदार को लौटा सकें और चंडीगढ़ आकर वापस कोई काम ढूंढ सकें। इससे बच्चों की भी पढ़ाई चलती रहेगी।
इसके बाद उन्होंने अपने ठेकेदार से 20 हजार रुपए उधार लिए, जिसमें से 10 हजार खाने का चुकाया। सात हजार रुपए यूपी के जौनपुर से 25 किमी दूर गांव जाने के लिए किराया लगा। आम दिनों में वे परिवार के साथ हजार रुपए में गांव पहुंच जाते थे।
शिव ने बताया उनके चार बच्चे, जिनमें 18 वर्ष की बेटी नौंवी, 15 वर्ष की बेटी आठवीं, 12 वर्ष का बेटा छटी और 7 वर्षीय बेटा तीसरी कक्षा में चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे। अभी चारों बच्चों के साथ वे गांव में जमींदार के खेत में धान की बुवाई करने जाते हैं, ताकि 20 हजार रुपए जमा कर ठेकेदार को लौटा सकें और चंडीगढ़ आकर वापस कोई काम ढूंढ सकें। इससे बच्चों की भी पढ़ाई चलती रहेगी।