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बेहद खास है ये मास्टर नोटबुक, रिश्ते को करेगी मजूबत, पर्यावरण भी बचाएगी

Sat, 16 Nov 2019 02:23 PM IST
ajay kumar अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 16 Nov 2019 02:23 PM IST
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Master notebook will save the environment
मास्टर नोटबुक - फोटो : अमर उजाला

पर्यावरण को बचाने, बच्चों को मोबाइल और अन्य गैजेट से बचाने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के साइंटिस्ट डॉ. सम्राट घोष ने एक और पहल की है। उन्होंने मास्टर नोटबुक बनाने का आइडिया दिया है।

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इससे जहां हर साल रद्दी होने वाली डायरी और पेपर का सही प्रयोग होगा। वहीं, बच्चों की भी किताबों से दोस्ती होगी। इसके अलावा मास्टर नोटबुक को आसानी से कैरी किया जा सकता है। वहीं, नोट्स चोरी या गायब आदि होने की आशंका पूरी तरह से कम हो जाएगी। 
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डॉ. सम्राट घोष ने बताया कि लगातार चेतावनी दी जा रही है कि हरियाली खत्म हो रही है। पेड़ों को बचाया जाए, नहीं तो आने वाले समय में धरती पर जीवन संकट में पड़ जाएगा। देखने में आया है कि हर साल करोड़ों का कागज देश में प्रयोग होता है। उसमें काफी कागज बेकार हो जाता है। एक आम घर में करीब पांच से सात किलो कागज हर साल खराब होता है। 
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ऐसे में रिसर्च और लोगों से बातचीत के आधार पर उन्होंने मास्टर नोटबुक का आइडिया निकाला। इस नोटबुक को बनाने की तकनीक काफी आसान है। जो डायरी या नोटबुक हम प्रयोग करते हैं। साल के अंत में रद्दी वाले को बेचने से पहले खाली कागजों को आसानी से निकाल लेना चाहिए। 

इसके बाद उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार साइज के हिसाब से नोट्स के स्टाइल में बना लेना चाहिए। वहीं, जो मास्टर नोटबुक होती है। उसमें टैग को फिट कर दिया जाता है। वहीं, उसके बाहरी साइड आकर्षक टेप का प्रयोग किया जा सकता है। यह काफी फायदेमंद रहता है। वहीं, रोजाना मास्टर नोटबुक से इन्हें निकाला जा सकता है।

दो मिनट की ट्रेनिंग से बचेंगे लाखों पेड़
डॉ. सम्राट घोष ने बताया कि यह आइडिया काफी बेहतर है। उन्होंने इस संबंध में सरकार को लिखा है, ताकि स्कूलों में बच्चों को इसे बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। मात्र दो मिनट के लेक्चर से हम हर साल लाखों पेड़ बचा सकते हैं।

बच्चों के लिए ज्यादा फायदेमंद
डॉ. सम्राट घोष के मुताबिक सबसे ज्यादा कागज बच्चे खराब करते हैं। उनका किसी भी चीज से जल्दी दिल भर जाता है। वह हर समय नई किताब या डायरी चाहते हैं। उनके लिए यह नोटबुक सबसे फायदेमंद है। वहीं, इससे रिश्ते भी मजबूत होंगे। माता-पिता जब ऐसी बुक खुद बनाएंगे तो कुछ समय के लिए वह मोबाइल से दूर रहेंगे।

संस्थान में प्रयोग हो रहा है, दुकानों में मिल रहे हैं
डॉ. सम्राट के मुताबिक उनका यह आइडिया इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के विद्यार्थियों को काफी भा रहा है। संस्थान के कई स्कॉलर इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें नोट्स चोरी होने का खतरा बहुत कम रहता है, क्योंकि जो नोटस हम एक दिन में बनाते हैं, उन्हें आसानी से घर में आकर निकाल लेते हैं। इतना ही नहीं उनकी मोबाइल में फोटो कर हम आसानी से इन्हें शेयर कर सकते हैं। संस्थान के बुक स्टाल पर ऐसी मास्टर बुक बनाई जाती हैं। वहीं, उनके टैग भी आसानी से खरीद सकते हैं।

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