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चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़ने को बेताब हैं हरियाणा के कई कॉलेज, बात बनी तो पीयू की आर्थिक तंगी होगी दूर

Mon, 26 Jul 2021 03:08 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 26 Jul 2021 03:08 PM IST
सार

पंजाब यूनिवर्सिटी के पास बजट की कमी रहती है। पीयू को पंजाब सरकार की ओर से हर साल 30 से 35 करोड़ रुपये मिलते हैं। वहीं केंद्र सरकार 250 करोड़ रुपये से अधिक बजट देती है। यदि हरियाणा को शामिल किया जाता है, तो पीयू के पास पैसों की कमी नहीं होगी।

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Many Colleges of Haryana Wants to Connect with Panjab University
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय शासन सुधार के लिए बनाई उच्च स्तरीय कमेटी ने पंजाब के कुछ कॉलेजों को भौगोलिक आधार पर बांटने का एक सुझाव दिया था। इसके बाद अब हरियाणा के कॉलेज भी पीयू में शामिल होने की चाहत पाल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि हरियाणा के कॉलेज यदि पीयू से जुड़ते हैं तो विश्वविद्यालय की आर्थिक तंगी दूर हो सकती है, क्योंकि हरियाणा सरकार भी फिर मदद को आगे आएगी। पैसे की कमी नहीं होगी तो पीयू आगे बढ़ेगी।

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हाल ही में उच्च स्तरीय समिति ने चांसलर को सिफारिश भेजी थी कि रोपड़, मोहाली से लगे कॉलेजों को पीयू में शामिल किया जा सकता है। इससे इन कॉलेजों का संचालन और बेहतर हो सकेगा। सूत्रों का कहना है कि इस सिफारिश के बाद अंबाला, यमुनानगर समेत आसपास के क्षेत्रों के कई कॉलेजों ने भी पीयू से जुड़ने की इच्छा जताई है।
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इससे पहले भी हरियाणा सरकार ने पीयू के समक्ष प्रस्ताव रखा था कि वह उनके कॉलेजों को मान्यता दे तो वह पीयू की आर्थिक तंगी दूर करने की पूरी कोशिश करेगी। साथ ही आय के नए साधनों को विकसित किया जा सकेगा। जानकारों का भी कहना है कि पीयू को पंजाब सरकार की ओर से हर साल 30 से 35 करोड़ रुपये ही मिलते हैं। वहीं केंद्र सरकार 250 करोड़ रुपये से अधिक बजट देती है। यदि हरियाणा को शामिल किया जाता है, तो पीयू के पास पैसों की कमी नहीं होगी।
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हरियाणा, हिमाचल के कॉलेज पहले जुड़े थे पीयू से
1954 में चंडीगढ़ में पीयू का कैंपस स्थापित किया गया था। 1966 में पंजाब राज्य को पुनर्गठित किए जाने से पहले हरियाणा के नए क्षेत्र के कॉलेजों को पीयू ने मान्यता प्रदान की। अंबाला और आसपास के जिलों के कॉलेजों को यहां से मान्यता मिली और उनका संचालन भी बेहतर तरीके से चला। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश के भी कॉलेजों को यहां से मान्यता प्रदान की गई थी।


पीयू का नाम पूरे देश के अच्छे विश्वविद्यालयों में आता है। धीरे-धीरे समय बीता और पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश ने अपने-अपने राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों की स्थापना कर ली। उसके बाद से पीयू में पैसे का संकट खड़ा होने लगा और शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ने लगे तो शिक्षकों ने तीन माह तक लगातार प्रदर्शन किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने वेतन का बजट देने के लिए हामी भर दी, तब से वेतन का संकट तो खड़ा नहीं होता, लेकिन अन्य कार्यों के लिए दिक्कतें आ रही हैं।

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