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पीयू पहुंचे मनीष तिवारी, बोले- केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने के लिए लड़ो लड़ाई

Sun, 30 Apr 2017 09:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 30 Apr 2017 09:55 AM IST
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Manish Tiwari at Punjab university, chandigarh news
पीयू पहुंचे मनीष तिवारी
पूर्व सांसद मनीष तिवारी पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जहां पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली, वहीं छात्रों को बड़ी नसीहत दे डाली। तिवारी ने छात्रों से कहा कि पीयू को केंद्र के अधीन करने के लिए काम करें, ताकि हर साल के झंझट का स्थायी समाधान हो सके।
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लुधियाना से पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी पीयू के छात्र रह चुके हैं। शनिवार को पीयू आए तिवारी ने भूख हड़ताल पर बैठे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं से कहा, फीस बढ़ोतरी की समस्या का स्थायी हल निकालना है, तो पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाकर केंद्र सरकार के अधीन करने के लिए लड़ाई लड़ो।
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अगर इस बार किसी तरह पीयू प्रबंधन ने फीस बढ़ोतरी को टाल भी दिया तो अगले साल फिर यह दिक्कत आएगी। इसलिए बेहतर इसी में है कि पीयू को किसी तरह केंद्र के अधीन कराया जाए।
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...तो क्या इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी

Manish Tiwari at Punjab university, chandigarh news
Panjab University - फोटो : amar ujala
अभी पीयू डिम्ड यूनिवर्सिटी तो है, जो दर्जा कांग्रेस सरकार के समय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दिया था। अगर पीयू पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन हो जाती है तो हर साल बजट में बढ़ोतरी के साथ पीयू को ग्रांट जारी होगी, जोकि कानूनी तौर पर केंद्र सरकार को देनी ही होगी।

एनएसयूआई ने इस दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज किए गए केस के बारे में तिवारी को बताया। पूर्व सांसद ने कहा कि इस बारे में उच्च स्तर पर बात की जाएगी। अगर पीयू प्रशासन चाहे तो शिकायत वापस लेकर केस खारिज करवा सकता है।

...तो क्या इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी
इस मुलाकात के दौरान एक छात्र ने कहा कि अगर पीयू पूरी तरह केंद्र के अधीन हो गई तो क्या यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी? इस पर मनीष तिवारी ने कहा कि यूनिवर्सिटी लाहौर से ज्वाइंट पंजाब में आ गई, फिर ज्वाइंट पंजाब से दो अलग राज्य भी निकल गए, तब तो इतिहास पर कोई फर्क नहीं पड़ा, आगे भी कुछ नहीं होगा। अगर पीयू को बचाना है तो केंद्र के अधीन करना ही स्थायी समाधान है।
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