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Hindi News ›   Chandigarh ›   Letter of MHRD to UGC, Instant Release to PU Fund

एमएचआरडी का यूजीसी को पत्र, तुरंत पीयू को जारी करो फंड

Thu, 04 May 2017 09:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 04 May 2017 09:41 AM IST
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Letter of MHRD to UGC, Instant Release to PU Fund
Panjab University - फोटो : File Photo
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब बुधवार को एचएचआरडी ने यूजीसी को पत्र लिखकर ये आदेश दे दिए हैं कि वे जल्द से जल्द पंजाब यूनिवर्सिटी को फंड जारी करे। इससे अब पीयू को फिलहाल कुछ मदद राशि मिलने की उम्मीद बन गई है। यूजीसी जल्द ही कुछ मदद राशि पीयू को जारी करेगा।
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गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी यूजीसी को आदेश जारी कर ये कहा था कि वे पीयू को अतिरिक्त ग्रांट पांच मई तक जारी करे और इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर दे। इसके बावजूद यूजीसी ने 3 मई तक पीयू को कोई अतिरिक्त ग्रांट जारी नहीं की। बुधवार को ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी अफसरों को पत्र भेजकर उन्हें निर्देश दे दिए हैं कि यूजीसी तुरंत प्रभाव से पंजाब यूनिवर्सिटी को अतिरिक्त ग्रांट जारी करे और इसकी रिपोर्ट एमएचआरडी को भी दी। 
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दरअसल, यूजीसी पहले पंजाब यूनिवर्सिटी को अतिरिक्त ग्रांट देने में असमर्थता जाहिर कर चुका था, लेकिन पहले सुप्रीम कोर्ट और अब मानव संसधान विकास मंत्रालय के आदेश के बाद यूजीसी को मजबूरन पीयू को अतिरिक्त ग्रांट जारी करनी पड़ेगी। अब देखना यह है कि यूजीसी पीयू को कितनी ग्रांट जारी करता है। उधर, जबरदस्त आर्थिक संकट से गुजर रही पीयू अथारिटी भी यूजीसी द्वारा जारी अतिरिक्त फंड का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
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एजेंडे से अलग सीनेटर करेंगे छात्रों की आवाज बुलंद

Letter of MHRD to UGC, Instant Release to PU Fund
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़। - फोटो : डेमो फोटो
फीस वृद्धि को पूरी तरह रोल बैक करवाने के मद्देनजर जहां विभिन्न छात्र संगठन सीनेटरों पर लगातार दबाव बना रहे हैं, वहीं पीयू अथारिटी ने भी कूटनीति का इस्तेमाल करते हुए 7 मई को होने वाली सीनेट की बैठक  के एजेंडे से फीस वृद्धि के मसले को बाहर रखा है। हालांकि कई सीनेटर्स ऐसे हैं, जिन्होेंने पीयू के इस एजेंडे से बाहर जाकर सीनेट मीटिंग में फीस वृद्धि के इस मसले को उठाने का फैसला लिया है। करीबन बारह सीनेटर्स ने तो पीयू अथारिटी को लिखकर भी दे दिया है कि  वे फीस वृद्धि के समर्थन में नहीं हैं। यही सीनेटर्स अब सीनेट की बैठक में भी फीस वृद्धि के मुद्दे को जोर-शोर से उठाएंगे।

दूसरी ओर, विभिन्न छात्र संगठनों ने भी ये निर्णय कर लिया है कि वे सीनेट मीटिंग से पहले प्रशासनिक ब्लाक  के बाहर प्रदर्शन करेंगे और सीनेट पर दबाव बनाएंगे कि वे सीनेट में छात्रों की फीस वृद्धि को वापस लेने का प्रस्ताव पारित करें। छात्र इसलिए सीनेट पर दबाव बना रहे हैं, क्योंकि पीयू अथारिटी इस मसले पर बार-बार यही कहती आ रही कि फीस वृद्धि के प्रस्ताव पर सीनेट ने ही मुहर लगाई थी और फीस वृद्धि रोलबैक का अधिकार भी सीनेट के पास है।

लेकिन दूसरी ओर, कूटनीति का इस्तेमाल करते हुए पीयू ने सीनेट की सात मई को होने वाली बैठक के एजेंडे में फीस वृद्धि का मुद्दा ही शामिल नहीं किया। अब वैधानिक  रूप से न तो सीनेट इस मसले पर चरचा कर सकती है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव पास कर सकती है। एजेंडे में सिर्फ यूजीसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में डाली एसएलपी और उसके खिलाफ पीयू के जवाब को ही चर्चा के लिए रखा गया है।  
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