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पुटा चुनाव: वोट डालना है तो मतदाता साथ लाएं अपना पेन, जारी किए गए कोरोना संबंधी निर्देश

Wed, 23 Sep 2020 04:39 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 23 Sep 2020 04:39 PM IST
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Instructions Regarding Punjab University Teacher's Association Election
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव के लिए इस बार कुछ निर्देश जारी किए गए हैं। मतदाताओं को अपना पेन साथ लाना होगा, जिससे वे मतपत्र पर टिक लगाएंगे। यह कोरोना के कारण सुरक्षा की दृष्टि से किया गया है। इस निर्णय का सभी शिक्षकों ने स्वागत किया है क्योंकि तमाम शिक्षक इसलिए वोट डालने से डर रहे थे कि उन्हें वही पेन दिया जाएगा जो अन्य शिक्षक वोट डालने के लिए प्रयोग में लाएंगे।
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पुटा के इस निर्णय से चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा चुनाव अधिकारी प्रो. विजय नागपाल ने निर्देश दिए हैं कि वोट डालने आने वाले सभी शिक्षक मास्क लगाकर आएं। जिस विभाग को जो समय दिया गया है, उसी समय पर आएं। साथ ही मतदान केंद्रों के बाहर बिल्कुल न खड़े हों। कोरोना के चलते समय-समय पर सैनिटाइजेशन का काम करवाया जाएगा। साथ ही गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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अफसरों के निर्णयों के खिलाफ नहीं जा सकती विपक्षी टीम

मृत्युंजय-नौरा टीम ने खालिद-सिद्धू टीम पर आरोप लगाए हैं कि वे अधिकारियों के निर्णय के खिलाफ नहीं जा सके क्योंकि वे डरते हैं। साथ ही शिक्षकों के हितैषी नहीं हैं। वे केवल आरोप लगाने में ही माहिर हैं। शिक्षकों को साथ लेकर चलने में विश्वास नहीं करते। हमने तीन बार चुनाव काम के बलबूते जीता है। चौथी बार भी शिक्षकों की अनुमति होने पर ही मैदान में आए हैं। शिक्षक चाहते हैं कि पहले के कार्यकालों में जिस तरह पुटा ने कार्य किया है, वैसे ही शिक्षकों के लिए वे आगे भी खड़े रहें।

हमारी टीम युवा है, ऊर्जावान है जो शिक्षकों के लिए हमेशा खड़ी रहेगी। हम हर मुद्दे व फाइल का पीछा करते हैं और शिक्षकों की समस्याओं को हल कराकर दम लेेते हैं। रोटेशन व वरिष्ठता के मानक को भी पटरी से उतारने के लिए कोशिश की जा रही हैं लेकिन ऐसा नहीं होने देंगे। शिक्षकों के अपमान से विपक्षी टीम को कोई लेना-देना नहीं है। वे केवल अधिकारियों के कानों में फुसफुसाने का कार्य कर सकते हैं।

खालिद-सिद्धू ग्रुप का पलटवार.. कौन है कुलपतियों के खास, यह जान लें

खालिद-सिद्धू ग्रुप ने मृत्युंजय-नौरा ग्रुप के आरोपों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें वीसी पक्ष का बताया जा रहा है जबकि हकीकत कुछ और है। एक व्यक्ति एक ही साथ तीन-तीन लाभों से नवाजा गया। वह प्रोफेसर बना और उसी समय वार्डन भी रहा। यही नहीं एक केंद्र का डायरेक्टर भी उसी कार्यकाल में रहा। प्रोफेसर होकर वार्डन कैसे हुआ जा सकता है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुलपतियों के कौन करीब रहे हैं हम या विपक्षी। यही नहीं तीन पदों पर रहते हुए सभी भत्तों का लाभ दिया गया। तीन साल तक पुटा पर राज करने वाले लोगों की हकीकत शिक्षक जान चुके हैं। पुटा का चुनाव इसलिए लड़ा गया कि सीनेट में जगह बनाई जा सके और सीनेट के ग्रुप को समर्थन दिया जा सके। शिक्षकों के मुद्दों पर सीनेट में दबाव आज तक नहीं बनाया गया। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मृत्युंजय कुमार को अपना पद नाम बदलवाना है।

पिछले कार्यकाल में भी उसके लिए प्रयास किए गए और आगे भी किए जाएंगे। जो व्यक्ति सामने आकर शिक्षकों व अपने साथियों के सवालों का जवाब नहीं दे सकता, दूसरे मठाधीशों के इशारों पर चल सकता है, वह शिक्षकों का भला नहीं कर सकता। शिक्षक समुदाय को कैसे शिक्षक नेता चाहिए, यह तय हो चुका है। बस, परिणाम आना बाकी है। हम प्रचार फोन के जरिये व ऑनलाइन साधनों से कर रहे हैं लेकिन वे लोग कक्षाओं में जाकर शिक्षकों को परेशान कर रहे हैं। वे बीमारी फैलाने का काम कर रहे हैं।
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