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सहपाठी के लिए कॉलेज प्रबंधन से भिड़े छात्र को मिल सजा, जानिए मामला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 13 Jul 2016 12:55 PM IST
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यह पाठ्यक्रम जनवरी 2017 के दौरान आयोजित होने वाली एचएएस परीक्षा से कार्यान्वित होगा।
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कॉलेज प्रबंधन ने छात्र से नाइंसाफी की तो दूसरे छात्र ने उसके खिलाफ आवाज बुलंद कर दी, लेकिन उसे सजा भुगतनी पड़ी। कालेज प्रबंधन ने उसका फार्म रद कर परीक्षा में बैठने से रोक दिया। इससे छात्र का एक वर्ष बर्बाद हो गया। पीड़ित छात्र ने लालड़ू स्थित पंजाब कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रबंधकों के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
छात्र की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। एडवोकेट एसपी सोई के मार्फत दायर की गई याचिका में छात्र अभिषेक कुमार ने कहा है कि उसने वर्ष 2012 में लालड़ू स्थित कालेज में बीटेक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में दाखिला लिया और पहला, दूसरा, तीसरा व चौथा सेमेस्टर सफलतापूर्वक पास कर लिया। इसके बाद उसने 2014 में पांचवें और छठे सेमेस्टर के लिए 23,764 रुपये फीस भी जमा करा दी।
इससे पहले 7 अगस्त, 2013 को याचिकाकर्ता ने हिमांशु कुमार दुबे नामक एक छात्र को इसी कालेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा कोर्स में दाखिला दिलाया था। एक साल का सेशन खत्म होने के बाद जब कालेज प्रबंधन ने एग्जामिनेशन फार्म यूनिवर्सिटी को भेजे तो हिमांशु दुबे का फार्म इसलिए रद कर दिया गया क्योंकि उसने मैट्रिक में अंग्रेजी विषय पास नहीं किया था।
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छात्र की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। एडवोकेट एसपी सोई के मार्फत दायर की गई याचिका में छात्र अभिषेक कुमार ने कहा है कि उसने वर्ष 2012 में लालड़ू स्थित कालेज में बीटेक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में दाखिला लिया और पहला, दूसरा, तीसरा व चौथा सेमेस्टर सफलतापूर्वक पास कर लिया। इसके बाद उसने 2014 में पांचवें और छठे सेमेस्टर के लिए 23,764 रुपये फीस भी जमा करा दी।
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इससे पहले 7 अगस्त, 2013 को याचिकाकर्ता ने हिमांशु कुमार दुबे नामक एक छात्र को इसी कालेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा कोर्स में दाखिला दिलाया था। एक साल का सेशन खत्म होने के बाद जब कालेज प्रबंधन ने एग्जामिनेशन फार्म यूनिवर्सिटी को भेजे तो हिमांशु दुबे का फार्म इसलिए रद कर दिया गया क्योंकि उसने मैट्रिक में अंग्रेजी विषय पास नहीं किया था।
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कॉलेज में चल रही धांधली की पुलिस में शिकायत की
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याचिकाकर्ता का कहना है कि हिमांशु दुबे ने बिहार में दसवीं पास की है, जहां अंग्रेजी विषय अनिवार्य नहीं है और अंग्रेजी में फेल होने व अन्य विषयों में पास होने पर पास घोषित कर दिया जाता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कालेज प्रबंधन ने हिमांशु दुबे को एडमिशन देते समय अंग्रेजी के बिना मैट्रिक पास होने पर आपत्ति नहीं की और कोर्स की पूरी फीस भी ले ली। हिमांशु के साथ कालेज प्रबंधन के व्यवहार का याचिकाकर्ता ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया और कालेज में चल रही धांधलियों की पुलिस थाने में शिकायत भी दी।
याचिकाकर्ता के इस आचरण से गुस्साए कालेज प्रबंधन ने उसे पांचवें और छठे सेमेस्टर में बैठने से रोक दिया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि उसे पांचवें व छठे सेमेस्टर की परीक्षा का अवसर दिया जाए और एक साल बर्बाद करने को लेकर कालेज प्रबंधन से मुआवजा दिलाया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कालेज प्रबंधन ने हिमांशु दुबे को एडमिशन देते समय अंग्रेजी के बिना मैट्रिक पास होने पर आपत्ति नहीं की और कोर्स की पूरी फीस भी ले ली। हिमांशु के साथ कालेज प्रबंधन के व्यवहार का याचिकाकर्ता ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया और कालेज में चल रही धांधलियों की पुलिस थाने में शिकायत भी दी।
याचिकाकर्ता के इस आचरण से गुस्साए कालेज प्रबंधन ने उसे पांचवें और छठे सेमेस्टर में बैठने से रोक दिया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि उसे पांचवें व छठे सेमेस्टर की परीक्षा का अवसर दिया जाए और एक साल बर्बाद करने को लेकर कालेज प्रबंधन से मुआवजा दिलाया जाए।