पीयू : फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट दिया तो दर्ज होगी एफआईआर
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के विभागों में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर रोक लगाने के लिए पीयू प्रशासन ने नए सिरे से रणनीति तैयार की है। अब गलत मेडिकल सर्टिफिकेट देने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ पीयू प्रशासन पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाएगा।
साथ ही ऐसे स्टूडेंट्स को एक सेमेस्टर के लिए सस्पेंड करने पर भी विचार किया जा रहा है। इस संबंध में पीयू प्रशासन की ओर से गठित कमेटी ने डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन (डीयूआई) को सुझाव दिए है।
जल्द ही मेडिकल सर्टिफिकेट्स को लेकर नए नियमों को मंजूरी दे दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, अगले सेमेस्टर से मेडिकल सर्टिफिकेट्स का लाभ पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए नियम निर्धारित कर दिए जाएंगे।
छुट्टी के एक हफ्ते के अंदर स्टूडेंट्स को मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा। मेडिकल सर्टिफिके टकिस स्तर के डॉक्टर से अप्रूव होना चाहिए यह भी निर्धारित कर दिया गया है।
मेडिकल सर्टिफिकेट का लाभ पंजाब यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर के चीफ मेडिकल अफस की अप्रुवल के बाद ही मिल सकेगा। पीयू प्रशासन ने मेडिकल सर्टिफिकेट्स की प्रमाणिकता जांचने के लिए स्थायी तौर पर कमेटी बनाने का फैसला लिया है।
कमेटी में पीयू के कुछ आला अधिकारी, स्टूडेंट काउंसिल सदस्य और पीयू हेल्थ सेंटर के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल होंगे। कमेटी ने कुछ बाहरी एक्सपर्ट को भी कमेटी में शामिल करने की सिफारिश की है।
तीन पर हुई कार्रवाई, चौथे पर जल्द फैसला
पीयू स्टूडेंट्स द्वारा लगातार फर्जी मेडिकल दिए जाने के मामले में कार्रवाई का प्रस्ताव सिंडीकेट में भी लाया जा सकता है। गौरतलब है कि पीयू के एक सेमेस्टर में ही हजार से अधिक मेडिकल सर्टिफिकेट जमा होते हैं।
पीयू के कुछ विभागों में तो 400 से 500 स्टूडेंट्स मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करा देते हैं। पीयू स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआईएलएस), तीन वर्षीय लॉ, एमबीए, यूआईईटी जैसे विभागों से सबसे अधिक मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करते हैं।
तीन पर हुई कार्रवाई, चौथे पर जल्द फैसला
पंजाब यूनिवर्सिटी में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर अटेंडेंस पूरी करने का खेल काफी लंबे समय से चल रहा था। अमर उजाला ने मामले में कई खबरें प्रकाशित की थी।
इसके बाद पीयू के डेंटल कॉलेज और पीयू रीजनल सेंटर होशियारपुर लॉ विभाग के दो स्टूडेंट्स को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया था। हाल ही में फर्जी सर्टिफिकेट का एक और मामला सामने आया है।
अगले हफ्ते इस मामले के संबंध में कमेटी की बैठक होनी है। जानकारी के अनुसार, हर सेमेस्टर में एक हजार से अधिक मेडिकल सर्टिफिकेट अटेंडेंस पूरी करने के लिए विभागों में जमा होते हैं।
पीयू स्टूडेंट द्वारा दिए गए कई मेडिकल सर्टिफिकेट जांच में फर्जी पाए गए हैं। अटेंडेंस पूरी करने के लिए स्टूडेंट्स फर्जी सर्टिफिकेट देते हैं। कमेटी ने फर्जी सर्टिफिकेट देने वाले स्टूडेंट्स पर सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराने और एक सेमेस्टर से सस्पेंड करने का सुझाव दिया है। -डॉ. देवेंदर धवन, चीफ मेडिकल अफसर, पंजाब यूनिवर्सिटी