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चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय की लेटलतीफी, एक साल में भी स्थापित नहीं हो पाईं उच्चस्तरीय प्रयोगशालाएं

Sun, 05 Dec 2021 02:50 PM IST
ajay kumar सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 05 Dec 2021 02:50 PM IST
सार

पीयू प्रशासन की ओर से रूसा का जिम्मा कुछ शिक्षकों को दिया गया है। उन्हीं में से एक अधिकारी का कहना है कि ऊष्मायन केंद्र पर तेजी से काम चल रहा है। प्रयोगशालाएं भी इसी माह में लगभग बनकर तैयार हो जाएंगी। नए साल में विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल जाएगा। विभागों से भी प्रयोगशालाओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है। 

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High level laboratories could not be established in Panjab University in one year
पंजाब विश्वविद्यालय। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब विश्वविद्यालय हर साल आर्थिक संकट से घिरा बताता है लेकिन जो रकम मिलती भी है तो उसका सदुपयोग नहीं कर पा रहा है। कोविड काल से पहले पीयू को ऊष्मायन केंद्र के लिए सात करोड़ रुपये मिले थे लेकिन इसका काम एक साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। यही नहीं छह विभागों को उच्चस्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए लाखों रुपये दिए गए, मगर अब तक काम भी लटका हुआ है। इसका लाभ न यहां के विद्यार्थी उठा पाए और न बाहरी विद्यार्थी या दूसरे विभागों के।

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राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू है। पीयू ने यहां से भी ऊष्मायन केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इस केंद्र के जरिए युवाओं के विचारों को पंख लगाने थे। इससे स्टार्टअप आदि को बढ़ावा मिलना था। इसके अलावा पीयू के शिक्षकों से शोध प्रस्ताव लिखवाकर भेजे गए थे। 
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लगभग 55 करोड़ का यह पूरा प्रोजेक्ट था, जिसमें से लगभग 50 करोड़ रुपये मंजूर हो गए। पहली किश्त के रूप में पीयू को एक साल पहले सात करोड़ रुपये मिले। इस रकम से पहले ऊष्मायन केंद्र की स्थापना करनी थी। इसी में विज्ञान संकाय के रसायन विज्ञान विभाग, भौतिक विज्ञान विभाग, जंतु विज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग आदि में उच्चस्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित होनी थीं।
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पीयू ने हर विभाग को लगभग 20-20 लाख रुपये इसके लिए एक साल पहले जारी किए थे। वह उपकरण खरीदे जाने थे, जिनके लिए विद्यार्थियों को प्रयोग के लिए बाहर जाना पड़ता था। विदेशी विद्यार्थियों को भी इन प्रयोगशालाओं के जरिए आकर्षित किए जाने का लक्ष्य था। दूसरे विभागों के विद्यार्थियों को भी बुलाना था।

रसायन, भौतिक, वनस्पति विज्ञान की प्रयोगशालाओं का ये है हाल

आज प्रयोगशालाओं का लाभ विद्यार्थियों को मिलना चाहिए था लेकिन प्रयोगशालाओं का काम आधा-अधूरा है। रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में टाइल्स तो लग गईं लेकिन न उपकरण आए और न मशीनें। यहां बिजली फिटिंग से लेकर कई कार्य बाकी हैं। भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला के लिए तो अभी कमरा ही आवंटित हुआ है। पूरा कमरा उखड़ा हुआ है। बॉटनी विभाग का भी यही हाल है यानी प्रमुख विज्ञान संकायों ने इस पर पूरी तरह ध्यान ही नहीं दिया। केवल पैसे लेने की जल्दी थी। विद्यार्थी इंतजार में थे कि उन्हें अगस्त या सितंबर में प्रयोगशालाओं का लाभ मिल जाएगा। शिक्षकों ने भी सवाल खड़े किए हैं कि विभागों ने इसे प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया। पैसे मिलने के बाद तेजी से काम होना चाहिए था।

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