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हाईकोर्ट का पीयू में प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने से इनकार

Wed, 17 Aug 2016 09:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 17 Aug 2016 09:22 AM IST
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High court refuse to Raising the retirement age of Panjab University Professors
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के प्रोफेसरों को मंगलवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले से करारा झटका लगा, जिसमें हाईकोर्ट ने पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र को 60 साल से बढ़ाकर 65 साल करने से इंकार कर दिया। 
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जस्टिस अमोल रतन सिंह की बेंच ने इस मांग को लेकर दायर की गई 68 अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए पीयू प्रशासन को निर्देश दिए कि वह अगले तीन माह के भीतर नई नियुक्तियों का काम पूरा करे। जिन प्रोफेसरों ने याचिकाएं दाखिल की थीं, उन्हें रिटायर किए जाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। मंगलवार के फैसले में जस्टिस अमोल रतन सिंह ने उक्त सभी याचिकाएं खारिज करते हुए 68 प्रोफेसरों को तुरंत सेवानिवृत्त करने के आदेश भी दिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीयू प्रशासन ने हाईकोर्ट के स्टे के आधार पर रिटायरमेंट उम्र (60 साल) के बाद भी कार्यरत रहे प्रोफेसरों से रिकवरी करने की छूट भी दे दी।
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हाईकोर्ट की ओर से मंगलवार को करीब सौ पन्ने के फैसले में कहा गया कि बेशक पीयू सेंट्रली फंडेड यूनिवर्सिटी है और भले ही पीयू के बजट की 92 फीसदी से ज्यादा राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है, फिर भी केंद्र सरकार ने पीयू को सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने संबंधी कोई आदेश अब तक पारित नहीं किया है। ऐसे में हाईकोर्ट पीयू को सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी नहीं मान सकता और इसी के आधार पर पीयू के प्रोफेसरों को सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों की तर्ज पर 65 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट की सुविधा प्रदान नहीं कर सकता।
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उल्लेखनीय है कि पीयू की सीनेट और सिंडिकेट ने वर्ष 2010 और फिर 18 मई, 2015 में पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र को केंद्र सरकार और यूजीसी के प्रावधानों के अनुसार 60 से बढ़ाकर 65 साल करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव पीयू की तरफ से केंद्र सरकार को भेजा गया, लेकिन इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की ओर से आज तक कोई निर्णय लिया ही नहीं गया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि पीयू न तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी है और न ही स्टेट यूनिवर्सिटी, बल्कि पंजाब री-ऑगेनार्जेशन एक्ट-1966 के तहत पीयू का दर्जा इंटर स्टेट बॉडी कॉपरेट का है। इसलिए इन मामलों में पंजाब सरकार की सहमति जरूरी है। उधर, पंजाब सरकार ने भी कोर्ट में साफ कर दिया कि वह पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी रिटायरमेंट ऐज बढ़ाए जाने से मना कर दिया था।

पीयू के 45 और एफिलेटिड कालेजों के 23 प्रोफेसर होंगे रिटायर

High court refuse to Raising the retirement age of Panjab University Professors
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़। - फोटो : डेमो फोटो
मंगलवार को हाईकोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले में उन 68 प्रोफेसरों को तुरंत प्रभाव से रिटायर करने का आदेश जारी किया गया है, जिन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर 60 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट को चुनौती दी थी और हाईकोर्ट ने भी इन याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए उन्हें 60 साल की उम्र में रिटायर किए जाने पर रोक लगा दी थी।

मंगलवार को आए फैसले और याचिकाकर्ता प्रोफेसरों की सूची पर नजर डालें तो पीयू कैंपस में विभिन्न विभागों में कार्यरत 45 प्रोफेसरों और पीयू के एफिलेटिड कालेजों में कार्यरत 23 प्रोफेसरों की रिटायरमेंट तुरंत प्रभाव से होगी। हाईकोर्ट के फैसले से याचिकाकर्ताओं को रिटायरमेंट के मामले में मिली स्टे भी हट गई है और कोर्ट ने इन्हें तुरंत रिटायर करने को भी कह दिया है।

जस्टिस अमोल रतन सिंह मंगलवार को जब फैसला सुना रहे थे तब एडवोकेट पुनीत जिंदल ने पीयू के एक साथ 45 प्रोफेसरों के रिटायर होने पर चिंता जताते हुए कोर्ट से यह भी कहा कि पीयू में नया शैक्षिक सत्र जुलाई में ही शुरू हुआ है। इतने अधिक प्रोफेसरों के हटने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि इतनी बड़ी संख्या में प्रोफेसरों को एक साथ रिटायर न किया जाए, लेकिन हाईकोर्ट ने अपील को अस्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को अब और सेवा में नहीं रहने दे सकते। जस्टिस अमोल रतन सिंह ने कहा कि इन प्रोफेसरों में से कुछ तो 62 वर्ष से भी अधिक उम्र के हो चुके हैं, जबकि उन्हें 60 की उम्र में रिटायर हो जाना चाहिए थे।

स्टे लेकर पढ़ाते रहे प्रोफेसरों से वसूली जा सकती है वेतन राशि
प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र को लेकर आए फैसले के बाद उन प्रोफेसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनकी रिटायरमेंट पर हाईकोर्ट ने ही स्टे लगा रखा था। स्टे के आधार पर प्रोफेसरों को रिटायर नहीं होने का अवसर मिल गया था और वे 60 वर्ष की उम्र के हो जाने के बाद भी पीयू में कार्यरत रहे। मंगलवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने पीयू प्रशासन से कह दिया है कि 60 वर्ष की उम्र के बाद नौकरी में बने रहे प्रोफेसरों की ओर से जो वेतन लिया जाता रहा, पीयू चाहे तो उस वेतन की राशि की रिकवरी कर सकता है।
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