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नई व्यवस्थाः सीबीएसई स्कूलों में अब हेल्थ और फिजिकल एजुकेशन अनिवार्य, रोज लगाना होगा पीरियड
Fri, 26 Jul 2019 03:21 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 26 Jul 2019 03:21 PM IST
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फाइल फोटो
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने स्कूलों में हेल्थ और फिजिकल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सीबीएसई ने सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं में हेल्थ और फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य सब्जेक्ट की कैटेगिरी में डाल दिया है। इन दोनों सब्जेक्टों का रोजाना पीरियड लगाना अनिवार्य होगा।
इस संबंध में सीबीएसई के कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डॉ. संयम भारद्वाज की तरफ से एक लेटर जारी किया गया है। सीबीएसई के अनुसार डिफरेंटली एबल्ड बच्चों के लिए फिजिकल एजुकेशन की स्पेशल कक्षाएं लगेंगी। खेलों में ऐसे बच्चों को शामिल करने के लिए साइन लैंग्वेज, व्हीलचेयर आदि के उपयोग सहित कुछ तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
सीबीएसई ने बोर्ड की कक्षाओं में पढ़ने वाले उन स्टूडेंट्स को भी राहत दी है जो गेम्स और परीक्षाओं की तिथियां एक समय पर होने की वजह से स्पोर्ट्स से समझौता कर लेते हैं। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए सीबीएसई ने अलग से परीक्षाएं आयोजित करने की बात कही है, बशर्ते इसके लिए स्कूल व स्टूडेंट्स की तरफ से एडवांस में अप्लाई करना होगा।
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इस संबंध में सीबीएसई के कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डॉ. संयम भारद्वाज की तरफ से एक लेटर जारी किया गया है। सीबीएसई के अनुसार डिफरेंटली एबल्ड बच्चों के लिए फिजिकल एजुकेशन की स्पेशल कक्षाएं लगेंगी। खेलों में ऐसे बच्चों को शामिल करने के लिए साइन लैंग्वेज, व्हीलचेयर आदि के उपयोग सहित कुछ तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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सीबीएसई ने बोर्ड की कक्षाओं में पढ़ने वाले उन स्टूडेंट्स को भी राहत दी है जो गेम्स और परीक्षाओं की तिथियां एक समय पर होने की वजह से स्पोर्ट्स से समझौता कर लेते हैं। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए सीबीएसई ने अलग से परीक्षाएं आयोजित करने की बात कही है, बशर्ते इसके लिए स्कूल व स्टूडेंट्स की तरफ से एडवांस में अप्लाई करना होगा।
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स्पोर्ट्स में भाग लेने वाले स्टूडेंट के लिए अलग से बनेगी पॉलिसी
वहीं नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़े किसी भी खेल प्रतियोगिता में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के लिए सीबीएसई ने एक पॉलिसी भी बनाने की बात कही है, ताकि अगर खेल प्रतियोगिता परीक्षा के दिनों में आयोजित की जाती है तो स्टूडेंट्स के लिए अलग से बाद से परीक्षा आयोजित कराई जा सके।
सीबीएसई का यह कदम स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। सीबीएसई की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि हेल्थ और फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य करने का मकसद बच्चों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करना है।
वहीं, यदि कोई बच्चा रुचि दिखाता है या कुछ खेलों या एथलेटिक्स में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है, तो उन्हें बड़े लेवल पर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। स्पोर्ट्स टीचर की अनुपस्थिति के मामले में क्लास इंचार्ज पीरियड के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्हें ध्यान देना होगा कि प्रत्येक छात्र किसी न किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि में भाग ले।
सीबीएसई का यह कदम स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। सीबीएसई की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि हेल्थ और फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य करने का मकसद बच्चों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करना है।
वहीं, यदि कोई बच्चा रुचि दिखाता है या कुछ खेलों या एथलेटिक्स में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है, तो उन्हें बड़े लेवल पर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। स्पोर्ट्स टीचर की अनुपस्थिति के मामले में क्लास इंचार्ज पीरियड के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्हें ध्यान देना होगा कि प्रत्येक छात्र किसी न किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि में भाग ले।